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पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम: बादल, कैप्टन, चन्नी, सिद्धू, सुखबीर और मनप्रीत जैसे दिग्गजों को हराने वाले नए चेहरे
पंजाब विधानसभा चुनाव में सूबे की पुरानी और पारंपरिक पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए आम आदमी पार्टी सत्ता में आ रही है.
इस चुनाव के नतीजे किसी राजनीतिक सुनामी से कम नहीं हैं, जो प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे दिग्गजों के पैरों तले ज़मीन खिसकाकर ले गए हैं.
लेकिन दिलचस्प बात ये है कि पंजाब के बड़े नेताओं को हराने वाले आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार नए चेहरे हैं.
आइए जानते हैं कुछ ऐसे चेहरों के बारे में जिन्होंने पंजाब के राजनीतिक जानकारों का ध्यान खींचा है.
लाभ सिंह उगोके - भदौर
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भदौर सीट से हराने वाले आम आदमी पार्टी के लाभ सिंह उगोके की ख़ास तौर पर चर्चा हो रही है.
लाभ सिंह उगोके को आम आदमी पार्टी ने भदौर सीट से उम्मीदवार बनाया. उनकी उम्र 35 साल है.
लाभ सिंह उगोके भदौर क्षेत्र के उगोके गांव के रहने वाले हैं. राजनीति में आने से पहले वो एक मोबाइल फोन की दुकाने चलाते थे.
लाभ सिंह के पिता ड्राइवर हैं और उनकी मां गांव के ही एक स्कूल में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करती हैं.
उगोके साल 2013 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे.
2017 में उन्होंने भदौर से आप के उम्मीदवार पीरमल सिंह खालसा के चुनाव अभियान में सक्रिय तौर पर हिस्सा लिया था.
पीरमल सिंह खालसा पहले खैरा गुट के साथ चले गए थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
इस बार आम आदमी पार्टी ने उगोके को टिकट दिया था और उन्होंने बड़े मार्जिन से चरणजीत सिंह चन्नी को हराया.
डॉक्टर चरणजीत सिंह - चमकौर साहिब
इसके अलावा चमकौर साहिब सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को हराने वाले आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार का नाम भी चरणजीत सिंह ही है.
उसी इलाक़े के रहने वाले हैं और पेशे से आंखों के डॉक्टर हैं. उस इलाक़े में लंबे समय से समाज सेवा करते आ रहे हैं. जिस वजह से उनका इलाक़े में काफ़ी सम्मान किया जाता है.
डॉ चरणजीत सिंह नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं. उन्होंने नेत्र विज्ञान में एमएस किया है और पीजीआई चंडीगढ़ में कार्यरत हैं.
वो हर वक़्त लोगों की मदद के लिए तैयार रहते हैं और लोगों के मुद्दों को समय-समय पर उठाते रहते हैं. वो मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़े हैं.
जीवनजोत कौर - अमृतसर पूर्व सीट
जीवनजोत कौर पंजाब की अमृतसर पूर्व सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार थीं. इसी सीट से पंजाब की सियासत के दो बड़े चेहरों, कांग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू और शिरोमणि अकाली दल के विक्रम सिंह मजीठिया ने भी चुनाव लड़ा है.
जीवनजोत कौर के मुताबिक़, वो पिछले 20-25 सालों से सामाजिक कामों में काफी सक्रिय रही हैं.
बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि उन्होंने कभी राजनीति में आने के बारे में तो नहीं सोचा था लेकिन स्कूल के दिनों से ही उनकी ऐसी पहचान थी कि जब वो प्रिंसिपल के ऑफ़िस जाती थीं तो सोचा जाता था कि ज़रूर कोई पंगा हुआ होगा इसलिए जीवनजोत वहां जा रही हैं.
वो कहती हैं कि परिवार के सहयोग के बिना एक महिला का यहां तक आ जाना संभव नहीं है और उन्हें शादी के बाद भी ये सहयोग मिलता रहा.
1992 के दौरान श्री हेमकुंट एजुकेशन सोसायटी में एक स्कूल खोला गया था और उस दौरान जीवनजोत ख़ुद भी पढ़ाई कर रही थीं. उनके मुताबिक़, उसी वक़्त उन्होंने उस स्कूल में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था.
जीवनजोत के मुताबिक़, उन्होंने 'इकोशी' नाम का एक प्रोजेक्ट भी चलाया है. उन्हें पंजाब की पैड वुमन के रूप में भी जानी जाता है. वो रीयूज़ेबल सैनिटरी पैड को बढ़ावा देती हैं.
गुरमीत सिंह खुडियां - लंबी
गुरमीत सिंह खुडियां श्री मुक्तसर साहिब ज़िले के खुडियां महां सिंह गांव के रहने वाले हैं. उनकी उम्र 59 साल है और 12वीं पास हैं.
गुरमीत सिंह खुडियां के पिता जगदेव सिंह खुडियां 1989 में फरीदकोट लोक सभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे.
गुरमीत सिंह खुडियां अपने पिता की मौत के बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे. कांग्रेस में लंबे समय तक रहने के बाद वो हाल ही में वो आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे.
आम आदमी पार्टी ने उन्हें लंबी विधान सभा सीट से मौदान में उतारा. उनका मुक़ाबला पांच बार मुख्यमंत्री रहे और शिरोमणि अकाली दल के बड़े नेता प्रकाश सिंह बादल से था.
जिसमें उन्होंने पंजाब के ही नहीं बल्कि भारत के वरिष्ठ राजनेता समझे जाने वाले प्रकाश सिंह बादल को हराने में कामयाबी हासिल की है.
जगदीप कंबोज गोल्डी - जलालाबाद
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के ख़िलाफ़ चुनाव लड़े जगदीप सिंह गोल्डी कंबोज जलालाबाद के रहने वाले हैं. वो एलएलबी पास हैं और अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के पदाधिकारी भी रहे हैं.
पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने जलालाबाद से निर्दलीय चुनाव लड़ा था क्योंकि उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया था और अब आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं.
2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 5800 वोट मिले थे और इस बार उन्होंने सुखबीर सिंह बादल को कड़ी चुनौती दी है.
जगरूप सिंह गिल - बठिंडा शहर
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को हराने वाले जगरूप सिंह गिल ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं.
कभी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के क़रीबी रहे जगरूप सिंह गिल 1979 से पार्षद बनते आ रहे हैं. इस बार वो सातवीं बार पार्षद चुने गए थे.
जगरूप सिंह गिल 1992 से 1997 तक बठिंडा नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे.
उन्होंने हाल ही में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे. आप पार्टी ने उन्हें बठिंडा शहर से मनप्रीत सिंह बादल के ख़िलाफ़ मैदान में उतारा.
अजीतपाल कोहली - पटियाला शहर
अजीतपाल कोहली अकाली दल के साथ पुराने वक़्त से जुड़े रहे हैं. पहले अकाली दल की सरकार के दौरान पटियाला के मेयर भी रहे हैं. कुछ वक़्त पहले ही आप में शामिल हुए हैं.
अजीतपाल कोहली पटियाला शहरी सीट से कैप्टन अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव लड़े और जीते.
उनके पिता सुरजीत सिंह कोहली विधायक रह चुके हैं. अजीतपाल कोहली पोस्ट ग्रैजुएट हैं और उन्होंने 2006 में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से एमए (पॉलिटिकल साइंस) किया है.
वो अपना ट्रांसपोर्ट का बिज़नेस करते हैं.
अजीतपाल कोहली पटियाला में 2007 से 2012 तक अकाली दल में होते हुए मेयर रहे चुके हैं. उनकी उम्र 43 साल है.
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