रूस के हमले को लेकर भारत के रुख़ पर यूक्रेन ने क्या कहा - प्रेस रिव्यू

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भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉक्टर आइगोर पोलिखा ने गुरुवार को कहा कि अपने देश में रूस की सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत के रुख़ से वो ''काफ़ी असंतुष्ट हैं''.
उन्होंने कहा कि यूक्रेन को भारत से इस संकट की स्थिति में और ज़्यादा सहयोग की उम्मीद थी. इस खबर को अंग्रेज़ी अख़बार द टेलीग्राफ़ ने प्रमुखता दी है.
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद राजदूत आइगोर पोलिखा ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की मांग की थी.
उन्होंने कहा था, "हम इस मौक़े पर ये अपेक्षा कर रहे हैं कि पीएम मोदी किसी तरह पुतिन पर प्रभाव डालने की कोशिश करें. इसके साथ ही पीएम मोदी अगर यूक्रेन के समर्थन में कोई बयान देते हैं या कारगर ढंग से मदद करते हैं तो यूक्रेन इसके लिए शुक्रगुज़ार रहेगा."
उन्होंने कहा, ''हम अपने सभी मित्र देशों से मदद मांग रहे हैं ताकि इस युद्ध को रोका जा सके. यूक्रेन एक शांतिप्रिय देश है. वो लड़ने के लिए तैयार है लेकिन शांति सबसे अच्छा समाधान है. हम अपने सभी साझीदारों से कह रहे हैं कि वे किसी तरह हमारी मदद करें.''
यूक्रेन के राजदूत की इस मांग को लेकर भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने इस बात की पुष्टि की कि पीएम नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बात भी हुई.
श्रृंगला ने ये भी कहा, ''इन हालात में भारत का भी काफ़ी कुछ दांव पर लगा है. हम इससे जुड़े हुए हैं. हमारे आर्थिक हित दांव पर हैं और हमारे नागरिक वहां हैं.''
श्रृंगला ने कहा कि यूक्रेन ने भारत के रुख़ को लेकर भारत से कोई असंतुष्टि ज़ाहिर नहीं की है.
भारत ने इस मामले पर अब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठकों में और यूक्रेन में भारतीय दूतावास की ओर से जारी सलाह में रूस का हमलावर के तौर पर ज़िक्र नहीं किया है.

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पीएम मोदी ने की राष्ट्रपति पुतिन से बात
यूक्रेन पर रूस के हमले के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से गुरुवार को फ़ोन पर बात की. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से यूक्रेन में तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है.
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ रूसी राष्ट्रपति के यूक्रेन में सैन्य अभियान के आदेश के बाद पीएम मोदी पहले ऐसे वैश्विक नेता हैं जिन्होंने राष्ट्रपति पुतिन से बात की.
दोनों नेताओं के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत के बाद जारी बयान में कहा गया, ''पीएम मोदी ने हिंसा तुरंत रोकने की अपील की है. साथ ही राजनयिक बातचीत और संवाद के रास्ते पर लौटने का प्रयास करने के लिए कहा है.''
पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से यूक्रेन में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर कीं. वहीं, राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन में हुए हालिया घटनक्रमों के बारे में पीएम मोदी को संक्षिप्त में जानकारी दी.

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'अयोध्या में प्रतिष्ठा दांव पर, आरएसएस भी मैदान में'
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, अयोध्या में बीजेपी जहां जातिगत समीकरणों को साधने में लगी है वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी मैदान में कमान संभाल ली है.
अयोध्या में पांच विधानसभा सीटें हैं- अयोध्या, बिकापुर, सोहवाल, मिल्कीपुर और गोसाईगंज. यहां बात सिर्फ़ जीतने या हारने की नहीं बल्कि ये बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का मामला भी है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि अयोध्या आरएसएस के हिंदुत्व प्रोजेक्ट का केंद्र रहा है. ऐसे में राम मंदिर निर्माण की अपील करने के साथ-साथ आरएसएस के कार्यकर्ता लोगों को योगी आदित्यनाथ सरकार के कामों का लेखा-जोखा दे रहे हैं. साथ ही राम लला का प्रसाद और रजकण (मिट्टी) भी दे रहे हैं.
पिछले 15 दिनों में आरएसएस के शीर्ष नेताओं ने अयोध्या में बैठकें की हैं. इन नेताओं में सहसरकार्यवाह और बीजेपी प्रभारी अरुण कुमार भी शामिल हैं.
लखनऊ के रहने वाले प्रांत प्रचारक कौशल किशोर भी पिछले हफ़्ते से वहां प्रचार कर रहे हैं और 27 फ़रवरी के मतदान तक वहां रहेंगे.
आरएसएस सूत्रों के मुताबिक़ संघ के क़रीब 100 कार्यकर्ता रोज़ पांच से 10 बैठकें कर रहे हैं. इन बैठकों में वो बीजेपी सरकार की उपलब्धियों की बात करते हैं और राम के नाम पर वोट देने का अनुरोध करते हैं. इसके अलावा बीजेपी का अपना संगठन भी प्रचार में जुटा हुआ है.
2017 के विधानसभा चुनाव में आयोध्या की पांचों सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. इस बार कोशिश है कि 'आरएसएस की मदद से' ना सिर्फ़ कुछ लोगों की असंतुष्टि को कम किया जा सके बल्कि जातिगत समीकरणों को भी साधा जा सके.
अख़बार के मुताबिक़ बीजेपी को बनिया, ठाकुर और ब्राह्मण वोट मिलने की संभावना है. वहीं, पार्टी को सरकार की योजनाओं के आधार पर दलितों से भी समर्थन की उम्मीद है. लेकिन, समाजवादी पार्टी के पवन पांडे फ़िलहाल बीजेपी के लिए चुनौती बने हुए हैं. जो ब्राह्मण हैं और इलाके में काफ़ी पसंद किए जाते हैं.

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धार्मिक कपड़ों को लेकर हाई कोर्ट के आदेश पर उलझन
कर्नाटक सरकार की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया है कि वो निजी-अल्पसंख्यक संस्थानों के यूनिफ़ॉर्म में कोई दखल नहीं दे रही है. लेकिन, शिक्षा विभाग के अधिकारी इसके उलट काम कर रहे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बेंगलुरू के माउंट कार्मल कॉलेज में पगड़ी पहने एक सिख लड़की को क्लास लेने से रोकने की कोशिश की गई. हालांकि, बाद में लड़की ने क्लास ली. माउंट कार्मल कॉलेज एक निजी अल्पसंख्यक संस्थान है.
उत्तरी बेंगलुरू में शिक्षा विभाग के उपनिदेशक जीके श्रीराम ने कहा कि उन्हें माउंट कार्मल कॉलेज के अधिकारियों से बात करने का ज़िम्मा सौंपा गया था ताकि हाई कोर्ट के 10 फ़रवरी के आदेश के मुताबिक धार्मिक कपड़ों पर प्रतिबंध लगाया जा सके.
उन्होंने कहा, ''हाई कोर्ट का आदेश केवल ये कहता है कि ये आदेश सिर्फ़ उन कॉलेज पर लागू होगा जहां यूनिफ़ॉर्म तय की गई है. ये आदेश निजी अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर स्पष्ट नहीं है.''

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