पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने मोदी सरकार को भेजा ये प्रस्ताव- प्रेस रिव्यू

अजमेर शरीफ़

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भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार के साथ यात्रा को लेकर अब भी गतिरोध ख़त्म नहीं हुआ है, लेकिन पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने पाकिस्तान की सरकार के ज़रिए भारत को एक नया प्रस्ताव भेजा है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की पहले पन्ने की लीड ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने हिन्दू, मुसलमान और सिख तीर्थयात्रियों को हवाई सेवा के ज़रिए आने देने का प्रस्ताव रखा है.

अख़बार की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग ने पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल के अध्यक्ष रमेश वाल्मीकि के इस प्रस्ताव को भारत के विदेश मंत्रालय के पास भेजा है.

रमेश वंकवानी ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के चार्टर्ड प्लेन से लाहौर और कराची के तीर्थयात्रियों को भारत में आने देने की अनुमति मांगी है.

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अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल का यह प्रस्ताव सोमवार को मिला है और अभी इसे कई स्तरों पर मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है. भारत के विदेश मंत्रालय का इस प्रस्ताव पर क्या रुख़ होगा, अभी तक इस बारे में कुछ कहा नहीं गया है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के एक सीनियर अधिकारी ने अख़बार से कहा है कि अभी तक उन्हें एयरलाइन से कोई अनुरोध नहीं मिला है.

भारत के अधिकारियों ने यह भी कहा कि पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान ने श्रीनगर-शारजाह फ़्लाइट को अपने हवाई क्षेत्र से गुज़रने की अनुमति नहीं दी थी. इसके अलावा भारत ने पीआईए के प्लेन को दिसंबर में भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जाने की अनुमति नहीं दी थी. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर दोनों देशों की ओर से राजनीतिक पहल की ज़रूरत है.

अजमेर शरीफ़

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अगर पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल के प्रस्ताव को भारत सरकार स्वीकार कर लेती है तो 2019 में दोनों देशों के बीच हवाई सेवा निलंबित होने के बाद पहली पीआईए फ़्लाइट भारत आएगी और ये 1947 के बाद दोनों तरफ़ से तीर्थयात्रियों को ले जाने वाली पहली फ़्लाइट होगी. अभी दोनों देशों के तीर्थयात्रियों के समूह 1974 के प्रोटोकॉल एक्सचेंज एग्रीमेंट के तहत वाघा-अटारी बॉर्डर से रोड के ज़रिए जाते हैं.

दिसंबर, 2021 में पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के साथ क़रीब 170 तीर्थयात्रियों के तीर्थाटन को लेकर समझौता किया था. 170 तीर्थयात्रियों में ज़्यादातर मुसलमान और 20 हिन्दू तीर्थयात्री हैं.

पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने 'धार्मिक तीर्थाटन' कार्यक्रम के तहत हाल के दिनों में कई क़दम उठाए हैं. पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने ब्रिटेन, यूएई, स्पेन और अन्य देशों के हिन्दू समूहों को पिछले कुछ हफ़्तों में पीएआईए चार्टर प्लेन के ज़रिए ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के परमहंस महाराज मंदिर में दर्शन कराया था. भारतीय तीर्थयात्री वाघा-अटारी बॉर्डर पार होकर लाहौर से पेशावर जाते हैं.

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रमेश वंकवानी ने द हिन्दू को टेलिफ़ोन इंटरव्यू में कहा, ''मैं इस तरह की आपसी यात्राओं को लेकर बहुत ही आशान्वित हूँ. पाकिस्तान के लोग अजमेर शरीफ़, निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह और अन्य धार्मिक स्थानों पर जाने की इच्छा रखते हैं. इस तरह की पहली उड़ान में मैं ख़ुद भी आना चाहता हूँ. तीर्थयात्री इस तरह की चार्टर्ड फ़्लाइट को लेकर बहुत ही उत्साहित हैं और हमें कई तरह के अनुरोध मिले हैं.''

पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल के प्रोग्राम के अनुसार, तीर्थयात्री 29 जनवरी से एक फ़रवरी तक भारत भ्रमण करेंगे. इनमें जयपुर, अजमेर, दिल्ली, आगरा और हरिद्वार शामिल हैं. रमेश वाल्मीकि इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के सांसद हैं.

उन्होंने कहा कि इसे लेकर उन्होंने पाकिस्तान के अधिकारियों से बात की है. रमेश वंकवानी ने कहा कि अगर दोनों देशों से हरी झंडी मिल जाती है तो भारत के हिन्दू तीर्थयात्री पेशावर के परमहंस मंदिर और कराची के हिंगलाज माता मंदिर आ सकते हैं. इससे पहले इंडियन एयरलाइंस ने आख़िरी बार 2008 मार्च में पाकिस्तान के लिए उड़ान भरी थी.

रमेश वंकवानी ने द हिन्दू से कहा, ''इस गतिरोध को तोड़ने की ज़रूरत है. हम इस गतिरोध को तीर्थाटन के ज़रिए तोड़ना चाहते हैं. दोनों देशों के लोगों की आवाजाही के बाद सामान्य यात्राएं और कारोबार भी शुरू हो सकेंगे.''

उमर ख़ालिद

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'सीएए विरोध प्रदर्शन का नाम सेक्युलर रखा गया लेकिन आसपास मस्जिदें थीं'

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे में जेएनयू के पूर्व स्टूडेंट उमर ख़ालिद की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने सोमवार को कहा कि सीएए विरोधी आंदोलन के सभी 25 प्रदर्शन स्थलों के जान-बूझकर 'सेक्युलर नाम' रखे गए थे, लेकिन ये सभी मस्जिदों के आसपास थे. इस ख़बर को द हिन्दू ने दूसरे पन्ने पर जगह दी है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के सामने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित प्रसाद ने सोमवार को उमर ख़ालिद की ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही.

अमित प्रसाद ने उदाहरण देते हुए कहा, ''श्रीराम कॉलोनी प्रदर्शन स्थल दरअसल, नूरानी मस्जिद है, सदर बाज़ार विरोध स्थल शाही ईदगाह है और गाँधी पार्क विरोध स्थल जामा मस्जिद है. इस विरोध-प्रर्दशन के पीछे कुछ छुपे हुए लोग थे. इनमें पीएफ़आई (पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया) और स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एसआईओ) भी शामिल थे. इन्होंने मुस्लिम समुदायों की बीच ग़लत सूचना पहुँचाई.''

हरिद्वार धर्म संसद में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय (दाएं) भी शामिल हुए थे.

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इमेज कैप्शन, हरिद्वार धर्म संसद में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय (दाएं) भी शामिल हुए थे.

नफ़रत भरे भाषण मामले में दो हिन्दू संगठन भी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने पर एक ख़बर लगाई है- नफ़रत भरे भाषण के मामले में दो हिन्दू संगठन भी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट. जागरण की इस ख़बर के अनुसार, नफ़रत फैलाने वाले भाषणों के मामले में दो हिन्दू संगठनों ने शीर्ष अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.

हिन्दू संगठनों की ओर से हस्तक्षेप अर्ज़ी दाख़िल कर मामले में उन्हें भी पक्ष रखने की इजाज़त दिए जाने की मांग की गई है. इस अर्ज़ी में कथित रूप से हिन्दुओं और उनके देवी-देवताओं के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाले भाषणों की एसआईटी से जाँच कराने की मांग की गई है. एक अर्ज़ी हिन्दू फ़्रंट फ़ॉर जस्टिस और दूसरी हिन्दू सेना की तरफ़ से दी गई है.

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