दिल्ली हिंसा मामले में पहला फ़ैसला, कसूरवार शख़्स को पांच साल की जेल

दिल्ली दंगे की फ़ाइल फ़ोटो

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    • Author, सुचित्र मोहंती
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली दंगों में भूमिका के लिए दिनेश यादव नाम के एक व्यक्ति को पांच साल जेल की सज़ा सुनाई है.

साल 2020 की शुरुआत हुए इन दंगों में 50 से अधिक लोग मारे गए थे. दिल्ली में कई दशकों बाद इतनी भयानक हिंसा हुई थी. दंगे शुरू होने से पहले के कुछ महीनों में दिल्ली और देश के कई स्थानों पर नागरिकता के कानून में संशोधन को लेकर धरने-प्रदर्शन चल रहे थे.

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में पिछले महीने अभियोजन पक्ष ने कहा था कि दिनेश यादव उन 150 से 200 बलवाइयों की भीड़ का हिस्सा थे जिन्होंने मनोरी नाम की एक महिला के घर में तोड़फोड़ की और फिर उसे आग लगा दी.

दिनेश की वकील शिखा गर्ग ने बीबीसी हिंदी को बताया कि जेल के अलावा उनके मुवक्किल को 12 हज़ार रुपये का जुर्माना भी भरना है. शिखा गर्ग ने कहा कि वे जज वीरेंद्र भट्ट के लिखित फ़ैसले का अध्ययन करने के बाद ही अपने अगले क़दम के बारे में कुछ कह पाएंगी.

शिखा गर्ग ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हम कड़कड़डूमा कोर्ट के निर्णय के ख़िलाफ़ ऊपरी अदालत में जाएंगे." लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि वो इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कब दायर करेंगी.

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दिल्ली दंगों में पहली सज़ा

कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज वीरेंद्र भट्ट ने दिनेश यादव को दिल्ली दंगों में भूमिका के लिए पांच साल की सज़ा सुनाई.

फ़रवरी 2020 में हुए दंगों के लिए सज़ा पाने वाले दिनेश पहले व्यक्ति हैं.

दिनेश के पिछले महीने ही एक 73 वर्षीय महिला की घर में लूटपाट करने, उसे जलाने वाली दंगाइयों की भीड़ का हिस्सा होने का दोषी पाया गया था.

उन्हें 12 दिसंबर 2021 को अदालत ने आईपीसी की धारा 143 (अनलॉफुल असेंबली). 147 (दंगा), 148 (हथियारों के साथ दंगा), 457 (किसी के घर में ज़बरदस्ती घुसना), 392 (चोरी), 436 (घर को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा शरारत) में दोषी पाया गया था.

अदालत ने दिनेश को दोषी करार देते वक़्त कहा था कि वो दिल्ली के भागीरथी विहार इलाक़े में 200-300 लोगों की ग़ैरक़ानूनी भीड़ का हिस्सा था जिसने वहां दंगों में हिस्सा लिया था.

अदालत ने आगे कहा कि गवाहों के बयानों से पता चला कि गैरकानूनी सभा में शामिल दंगाइ हिंदू समुदाय के थे और जिनके घरों/दुकानों में तोड़फोड़ की गई, लूटपाट की गई और जला दिया गया वे मुस्लिम समुदाय से थे.

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सबसे बड़ा हिंदू-मुस्लिम दंगा

दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में 23 फरवरी 2020 को शुरू हुए दंगे में कुल 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग जख़्मी हुए थे.

इसके साथ ही कई लोगों के घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा. इसे बीते सात दशक में दिल्ली में हुआ सबसे बड़ा हिंदू-मुस्लिम दंगा कहा गया.

दिल्ली पुलिस पर आरोप लगे कि उसने दंगों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए. अदालतों में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से जवाब मांगे गए.

एक मौका ऐसा भी हुआ जब दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस एस मुरलीधर को दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर से यह कहना पड़ा कि 'जब आपके पास भड़काऊ भाषणों के क्लिप मौजूद हैं तो एफ़आईआर दर्ज करने के लिए आप किसका इंतज़ार कर रहे हैं?'

कोर्ट में यह भी कहा गया था कि 'शहर जल रहा है, तो कार्रवाई का उचित समय कब आएगा?'

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