झारखंड: क्या अनसुलझी पहेली बन गयी है जज उत्तम आनंद की मौत?

जस्टिस उत्तम आनंद

इमेज स्रोत, Ravi Prakash\BBC

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए

'आपलोग नकारा हैं.'

'आपकी चार्जशीट स्टीरियोटाइप है.'

'आपके डायरेक्टर को ही बुलाना पड़ेगा.'

'आप रोज नयी कहानी गढ़ रहे हैं.'

'आप मामले को डायवर्ट करने की कोशिशें कर रहे हैं.'

ऊपर लिखी गयी ये पंक्तियां दरअसल झारखंड हाईकोर्ट की टिप्पणियां हैं. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस डॉ. रवि रंजन ने ये टिप्पणियां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के लिए की है. झारखंड हाईकोर्ट धनबाद में पदस्थापित रहे जज (एडीजे) जज उत्तम आनंद की मौत के मामले की सुनवाई कर रहा है. ये टिप्पणियां उसी सुनवाई के दौरान अलग-अलग तारीखों पर की गई हैं.

ये टिप्पणियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट ने भी सीबीआई के लिए कड़े कमेंट किए थे. दोनों अदालतों ने सीबीआई को 'पिजरे में बंद तोता' कहा था.

देश की सबसे पेशेवर जांच एजेंसी मानी जाने वाली सीबीआई के लिए की गई ये टिप्पणियां उसकी साख और काम के तौर-तरीकों पर सवाल खड़ा कर रही हैं.

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस डॉ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने जज उत्तम आनंद मामले की वर्चुअल सुनवाई करते हुए 14 जनवरी को कहा कि सीबीआई की जांच से लगता है कि यह मामला 'मिस्ट्री अनएक्सप्लेंड' की तरफ बढ़ रहा है. सीबीआई के पास कोई ठोस सबूत नहीं है.

इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होनी है. तब सीबीआई को अभियुक्तों के नारको टेस्ट और दूसरी जांच रिपोर्टें भी कोर्ट में पेश कराना होगा. वह जज उत्तम आनंद की मौत के मामले की जांचकर्ता एजेंसी है.

झारखंड हाई कोर्ट

इमेज स्रोत, Ravi Prakash\BBC

इमेज कैप्शन, रांची में मौजूद झारखंड हाई कोर्ट

सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तार लखन वर्मा और राहुल वर्मा का दो-दो बार नारको टेस्ट कराया है. उनकी ब्रेन मैपिंग, फोरेंसिक स्टेटमेंट एनालिसिस, लेयर्ड वॉयस एनालिसिस, फारेंसिक साइकोलॉजिकल एनालिसिस और पॉलिग्राफ़ टेस्ट भी कराए गए हैं.

इसके बावजूद सीबीआई अपनी चार्जशीट में सिर्फ़ इतना बता सकी है कि जज उत्तम आनंद की मौत सामान्य दुर्घटना न होकर साजिश के तहत की गई हत्या है. लेकिन, जांच एजेंसी अभी तक इस हत्या की ठोस वजह बताने में विफल रही है.

झारखंड हाईकोर्ट इससे नाराज है. कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई की चार्जशीट उपन्यास की तरह है. यह चार्जशीट धनबाद कोर्ट में पिछले 20 अक्टूबर को सौंपी गई. इसमें दोनों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 302, 201 और 34 के तहत कार्रवाई की सिफ़ारिश की गई है.

सीबीआई

इमेज स्रोत, Ravi Prakash\BBC

कैसे हुई थी ज उत्तम आनंद की मौत?

2021 की 28 जुलाई को धनबाद के तत्कालीन एडीजे जज उत्तम आनंद मार्निंग वॉक के बाद जज कालोनी स्थित अपने आवास लौट रहे थे. तभी उनके घर से महज 500 मीटर पहले एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें पीछे से धक्का मार दिया.

वे मुंह के बल गिरे और इस कारण उनकी मौत हो गई. वे एक फोरलेन सड़क किनारे चल रहे थे और ऑटो बीच सड़क पर था. लेकिन अचानक ही ऑटो रिक्शा चालक ने ने सड़क के बीचोंबीच चल रहे अपने गाड़ी को उनकी तरफ मोड़ लिया. जज उत्तम आनंद को टक्कर मारने के बाद ऑटो वहां से फरार हो गया. तब सुबह होने के कारण सड़क पर इक्का-दुक्का लोग ही थे.

उसके बाद इस घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ. इससे यह बात चर्चा में आई कि जज उत्तम आनंद की मौत सामान्य एक्सीडेंट न होकर साजिश के तहत क गई थी. फुटेज देखने से स्पष्ट था कि ड्राईवर ने अपना ऑटो रिक्शा धक्का मारने के इरादे से ही उनकी तरफ मोड़ा था.

अब उनकी मौत को छह महीने पूरे होने वाले हैं लेकिन उनकी मौत की गुत्थी अब तक अनसुलझी है. अब तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि उनकी हत्या के पीछे कौन था और उनकी हत्या क्यों हुई.

मामले की जांच

इमेज स्रोत, Ravi Prakash\BBC

जज उत्तम आनंद की शख्सियत

49 साल के जज उत्तम आनंद ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की थी. उनके पिता सदानंद प्रसाद, पत्नी कृति सिन्हा और साले प्रभात कुमार सिन्हा वकील हैं. उनका परिवार मूलतः झारखंड के हज़ारीबाग का रहने वाला है. जज उत्तम आनंद अपने फ़ैसलों के लिए भी जाने जाते रहे हैं.

जुलाई 2021 में अपनी मौत से पहले उन्होंने 36 आर्डर दिए थे. इनमें से 34 मामले जमानत से जुड़े थे. उन्होंने सिर्फ छह जमानत आवेदनों को स्वीकार किया था, जिनका आधार अभियुक्तों द्वारा काटी गई सजा की अवधि (पीरियड आफ़ कस्टडी) थी.

उनके कोर्ट ने बाकी के सभी बेल आवेदन रिजेक्ट कर दिए थे. ये सभी मामले हत्या, कोयला तस्करी, यौन उत्पीड़न, लाटरी के अवैध संचालन जैसे संगीन अपराधों से जुड़े मामले थे. उनके कोर्ट में इस तरह के दर्जनों मामलों की सुनवाई चल रही थी.

वीडियो कैप्शन, झारखंड में एक जज को ऑटो ने टक्कर मारी, मौत, मामले ने तूल पकड़ा

पहले झारखंड पुलिस ने की थी जांच

झारखंड पुलिस ने उनकी मौत की जांच विशेष जांच टीम (एसआइटी) को सौंपी थी.

पुलिस ने धनबाद में रजिस्टर्ड क़रीब 16 हजार ऑटोरिक्शा के ब्योरे को खंगाला. कई ऑटो ड्राईवर्स समेत क़रीब 250 लोगों से पूछताछ की. कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया गया. तब जाकर जज उत्तम आनंद की हत्या के लिए इस्तेमाल में लाए गए 'जेएच 10 आर 0461' नंबर के ऑटो रिक्शा की बरामदगी संभव हो सकी. इसी दौरान पुलिस ने उस ऑटो के ड्राईवर लखन वर्मा व उसके सहयोगी राहुल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. उनसे कई राउंड की पूछताछ की लेकिन दोनों अलग-अलग कहानियां बताते रहे. पुलिस जांच में पता चला कि वे पेशेवर चोर हैं.

झारखंड पुलिस ने अपनी जांच के बाद यह भी कहा कि जज की हत्या में इस्तेमाल किया गया ऑटो रिक्शा चोरी का था. ऑटो रिक्शा की मालकिन सुगनी देवी ने पाथरडीह थाना में ऑटो चोरी की शिकायत भी दर्ज कराई थी. उन्होंने कहा कि 27 जुलाई की रात उनका ऑटो चोरी हो गया था. हालांकि, पुलिस ने इसकी रिपोर्ट 29 जुलाई को दर्ज की.

इससे पहले जज उत्तम आनंद को धक्का मारते उस ऑटो का वीडियो वायरल हो चुका था. धनबाद के एसएसपी ने तब देर से रिपोर्ट दर्ज करने के आरोप में वहां के तत्कालीन थाना प्रभारी उमेश मांझी को भी निलंबित कर दिया था.

राहुल वर्मा के ख़िलाफ़ पुर्णेंदु विश्वकर्मा नामक एक व्यक्ति ने मोबाइल चोरी की भी रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

सीबीआई की पड़ताल

इमेज स्रोत, Ravi Prakash\BBC

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच

जज उत्तम आनंद मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच अगस्त महीने में सीबीआई को सौंपी गई.

उसके बाद से सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर शरद अग्रवाल के नेतृत्व में एक टीम इसकी जांच कर रही है. गृह मंत्रालय से पुरस्कृत व चर्चित अधिकारी वी के शुक्ला इसके जांचकर्ता बनाए गए हैं. सीबीआई अधिकारियों ने घटनास्थल पर सीन रिक्रियेट कर इसकी जांच शुरू की थी लेकिन घटना के 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाख़िल करने के बावजूद सीबीआई किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है. इस कारण हाईकोर्ट मे उसकी किरकिरी हो रही है.

सीबीआई ने अब कहा है कि जज उत्तम आनंद से मोबाइल छीनने के लिए ऑटो ड्राईवर ने उन्हें धक्का मारा था. हालांकि हाईकोर्ट ने सीबीआई की इस थ्योरी को मानने से इनकार किया है.

बहरहाल, जज उत्तम आनंद की हत्या का मामला एक ऐसी अनसुलझी पहेली बनकर रह गया है, जिसे भेद पाने में सीबीआई फिलहाल लाचार दिख रही है. ऐसे में इस मामले के रहस्यों से पर्दा हटने में वक्त लग सकता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)