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जम्मू कश्मीर: बिजली आपूर्ति बहाल करने को मांगी सेना की मदद, कर्मचारी बोले- नहीं झुकेंगे
- Author, मोहित कंधारी और माजिद जहांगीर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 20,000 से ज़्यादा बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं. इसके बाद जम्मू में प्रशासन ने बिजली समेत आवश्यक सेवाओं को सुचारु रूप से बहाल करने के लिए सेना की मदद मांगी है.
बिजली विभाग के कर्मचारी निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर हैं. ये हड़ताल शनिवार को शुरू हुई. इसके चलते जम्मू कश्मीर के 20 ज़िलों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित है.
प्रशासन ने जम्मू संभाग के 10 ज़िलों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सेना से मदद मांगी है. वहीं, कश्मीर घाटी में लोग अपनी दिक्कतों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इस मामले को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और दूसरे राजनीतिक दल भी प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.
कड़ाके की ठण्ड के बीच पूरे जम्मू संभाग में सेना की तकनीकी टीम की मदद से बिजली आपूर्ति सुचारु करने की कोशिश की जा रही है. सरकार ने सोमवार तक बिजली आपूर्ति बहाल हो जाने का भरोसा दिया है.
कर्मचारी पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (पीडीडी) कॉर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर हड़ताल कर रहे हैं.
सेना से मदद मांगने के फ़ैसले से सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है कि वह आसानी से बिजली विभाग के कर्मचारियों के दबाव में नहीं आएंगे.
सरकार द्वारा उठाए गए इस क़दम के बाद हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि वो झुकेंगे नहीं और सभी मांगों के पूरा होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
'बातचीत जारी'
जम्मू संभाग के मंडलायुक्त डॉ राघव लंगर ने रविवार देर शाम मीडिया से कहा है कि सरकार ने बिजली कर्मचारियों के साथ बातचीत की है और मामले के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसके लिए कर्मचारियों की पेंशन, नियमितकरण, वेतन वृद्धि और अन्य सेवा सम्बन्धी मामलों पर चर्चा की जा रही है.
वहीं जम्मू विद्युत वितरण निगम के एमडी शिव अनंत त्याल ने जम्मू संभाग में बिजली आपूर्ति व्यवस्था के बारे में बताया,''12 ट्रांसमिशन और 1096 डिस्ट्रीब्यूशन फ़ीडरों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, जिसमें आधे से ज़्यादा फ़ीडर चालू किये जा चुके हैं बाकी सोमवार तक चालू करने की कोशिश की जा रही है.''
कर्मचारियों की मांगों पर उन्होंने कहा, ''बिजली क्षेत्र के सुधारों को लेकर जारी आदेश के मुताबिक राज्यों में अलग-अलग बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन वितरण कंपनियां होंगी इसलिए वेतन का आतंरिक लेखा अलग अलग किया जाएगा, पुरानी व्यवस्था को लागू करना संभव नहीं होगा.''
पीडीडी कॉर्डिनेशन कमेटी के महासचिव सचिन टीकू का कहना है कि निजीकरण किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा, "हमारी माँग है कि सरकार अपना फ़ैसला वापस ले. निजीकरण के चलते सारा काम ठेके पर जाएगा जिसकी वजह से कर्मचारियों को सेवा लाभ नहीं मिल सकेंगे. यही वजह है लाइनमैन से लेकर वरिष्ठ इंजीनियर हड़ताल पर हैं."
'पानी की आपूर्ति भी ठप'
वहीं अपनी मांगों को लेकर हड़ताली बिजली कर्मचारियों ने जम्मू समेत विभिन्न ज़िला मुखायलों में धरना प्रदर्शन किया है. बिजली आपूर्ति न होने की वजह से परेशान लोगों ने भी जगह जगह सरकार और बिजली कर्मचारियों के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी कर अपना रोष जताया.
वैसे बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह से कई इलाक़ों में पानी की भी किल्लत पैदा हो गयी है.
जम्मू के शास्त्री नगर की रहने वाली पूजा गुप्ता ने बीबीसी हिंदी के बताया, "शनिवार को सुबह से ही बिजली गुल हुई थी, अभी तक बहाल नहीं हो पाई है. पानी की आपूर्ति भी ठप है. इस मौसम में सर्दी के साथ साथ बिजली पानी की सुविधा न मिलने से परेशानी बढ़ गयी है."
इस बीच नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है कि नागरिक प्रशासन के विफल होने की इससे बड़ी कोई और स्वीकारोक्ति नहीं हो सकती है कि बिजली बहाली के लिए सेना बुलानी पड़ी, इसका मतलब है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुशासन के पूरी तरह विफल होने को स्वीकार कर लिया है.
लोगों को हो रही है परेशानी
उधर, घाटी में श्रीनगर समेत दूसरी जगहों पर दिक्कतों का सामना कर रहे लोग सड़क पर उतरकर नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं. बिजली संकट के कारण सोमवार को श्रीनगर के बेमिना इलाक़े की कई महिलाएं प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरीं.
श्रीनगर के बेमिना इलाक़े में रहने वाले मोहम्मद मोज़ीम ने बताया कि बीते शनिवार से उनके इलाक़े में अंधेरा छाया हुआ है और बिजली नहीं होने की वजह से लोगों को कई तरह की रोजमर्रा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
वहीं कुलगाम ज़िले के नूराबाद इलाक़े के नगमे गांव की एक महिला ने बताया कि बीते तीन दिनों से उनके गांव में बिजली नहीं है.
श्रीनगर में इस समय तापमान शून्य से छह डिग्री नीचे जा चुका है. जिसके कारण नदियां जम रही हैं यहां तक की नलों में आने वाला पानी भी जम रहा है.
मांगें और दावे
जम्मू -कश्मीर के पावर एम्प्लॉयीज़ कॉर्डिनेशन कमेटी के संयोजक मुंशी माजिद अली ने सोमवार को श्रीनगर में बिजली विभाग के कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान मीडिया के सामने अपनी मांगों को रखते हुए कहा कि पावर ग्रिड और पावर विभाग के बीच प्राइवेट ज्वाइंट वेंचर पावर कंपनी बनाने के प्रस्ताव को वापस लिया जाए.
उनका ये भी कहना था कि साल 2019 में सरकार ने कर्मचारियों से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा किया जाए.
मजीद अली बताते हैं कि उनके जो कर्मचारी चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं, उसमें जम्मू -कश्मीर के महज नौ कर्मचारी काम करते हैं, जबकि उस में पचास प्रतिशत की भागीदारी है.
हालांकि कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर पी के पॉल ने बताया कि बिजली विभाग के कर्मचारी अगर अपनी हड़ताल ख़त्म कर दें तो उनसे बातचीत के लिए रास्ता खुला हुआ है.
श्रीनगर के बेमिना इलाक़े में बिजली संकट के ख़िलाफ़ आम लोगों के प्रदर्शन पर पी के पॉल ने कहा कि उस पूरे इलाक़े में ओवरलोडिंग के कारण समस्या पैदा हुई है और उस पर काम किया जा रहा है.
पी के पॉल का दावा है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल से कश्मीर में बिजली सप्लाई पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा है.
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