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नर्तक ज़ाकिर हुसैन को मंदिर से निकालने पर विवाद, होगी जांच
- Author, मुरलीधरन काशीविश्वनाथम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भरतनाट्यम नर्तक ज़ाकिर हुसैन को श्रीरंगम रंगनाथ स्वामी मंदिर से बाहर निकाल दिया गया और इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री सेकर बाबू ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
ज़ाकिर हुसैन अपनी पहचान एक वैष्णव व्यक्ति के तौर पर करते हैं और अपने माथे पर 'नमन' लगाते रहे हैं. वो श्रीरंगम के अराध्य देव भगवान रंगनाथ के प्रति आस्था प्रदर्शित करते रहे हैं और तमिल वैष्णव साहित्य के अध्येता रहे हैं.
वहीं, दूसरी तरफ़ श्रीरंगम तमिलनाडु में वैष्णव समुदाय का प्रमुख केंद्र हैं और अपनी बहुलवादी संस्कृति के लिए जाना जाता है.
इस मंदिर में मुसलमानों की आस्था का केंद्र देवी थुलुक्का नाचियार की भी मज़ार है. यहां प्रचलित कई मान्यताओं में से एक मान्यता ये है कि थुलुका नाचियार देवता की कई देवियों में से एक थीं.
10 दिसंबर को भरतनाट्यम के नर्तक ज़ाकिर हुसैन श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर गए थे. ज़ाकिर हुसैन का आरोप है कि रंगराजन नरसिम्हा नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें मंदिर में दाख़िल होने से रोक दिया और बाहर खदेड़ दिया.
ज़ाकिर हुसैन ने क्या कहा
फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में ज़ाकिर हुसैन ने कहा, "मुझे श्रीरंगम मंदिर से बाहर खदेड़ दिया गया, ये मेरे प्रिय भगवान रंगनाथ का घर है, जिन्हें मैं अपने हृदय के करीब रखता हूं और बिना नागा हर दिन उनकी अराधना करता हूं. ये मंदिर मेरी मां जैसा है. एक धर्मांध व्यक्ति ने मुझे मंदिर के बाहर धकेला. पहली बार मुझे ये अहसास कराया गया कि मैं इस धर्म के बाहर हूं. मुझे कई लोगों के सामने बेइज़्ज़त किया गया और भगवान रंगनाथ के दर्शन नहीं करने दिए गए."
उन्होंने लिखा, "ये कांटा हमेशा मेरे दिल में रहेगा. लेकिन आनदाल और आरंगान (रंगनाथ) के प्रति मेरी आस्था कम नहीं होगी. जैसे थीरूपन्नार (वैष्णव समुदाय के कई 12 संतों में से एक जिनके भगवान की अराधना में लिखे गए गीत पवित्र माने जाते हैं.) को मंदिर से खदेड़ने के बाद बुलाया गया था, ऐसे ही एक दिन मुझे बुलाया जाएगा. आरंगन हमेशा मेरे पथप्रदर्शक रहेंगे."
ज़ाकिर हुसैन का कहना है कि इस घटना के तनाव की वजह से उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया और उन्हें चेन्नई के राजीव गांधी अस्पताल में अपना इलाज कराना पड़ा. वो अब अपने घर आ गए हैं.
जब उनसे इस घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जब मैं तीन साल का था तब से मंदिर जा रहा हूं. कल दोपहर मैं करीब दो बजे मंदिर गया था. रंगराजन नरसिम्हा नाम के एक व्यक्ति ने मुझे पहचान लिया और चिल्लाने लगा. वो चिल्ला रहा था कि बाहर निकलो. उसने मुझसे कहा कि अगर मैं दोबारा मंदिर में आया तो वो मुझे मार देगा."
आमतौर पर हिंदू मंदिरों में एक तय स्थान के बाद ग़ैर हिंदू लोगों को जाने नहीं दिया जाता है. ज़ाकिर कहते हैं, "मेरे माता-पिता मुसलमान थे. मेरे पिता के बड़े भाई के संतान नहीं थी. उन्होंने मुझे गोद ले लिया. उनकी पत्नी एक हिंदू नायडु समुदाय की महिला थीं. वो भगवान विष्णु की भक्त थीं. उनके प्रभाव में मैं भी भगवान विष्णु का भक्त बन गया."
ज़ाकिर बताते हैं कि उन्होंने भरतनाट्यम सीखा और अपने नृत्य में वो सिर्फ़ हिंदू कहानियां ही प्रदर्शित करते हैं. वो कहते हैं, "उन्होंने एक बोर्ड लगा रखा है जिस पर लिखा है कि ग़ैर हिंदू मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं. लेकिन क्या किसी आस्थावान को मंदिर के बाहर निकालना सही है. क्या वो व्यक्ति भगवान और भक्त के बीच खड़ा हो सकता है?"
ज़ाकिर कहते हैं, "श्रीरंगम में थुलुका नाचियार के लिए भी एक पवित्र स्थान है. वो भगवान रंगनाथ को लुंगी पहनाते हैं और प्रसा में रोटी देते हैं. भगवान मुसलमानों को भी स्वीकार करते हैं. वो लोग मुझे कैसे रोक सकते हैं? येसुदा ईसाई हैं तो क्या सिर्फ़ इसलिए वो इयप्पा मंदिर में उनके गीत बजाना बंद कर देंगे?"
रंगराजन नरसिम्हा ने बात करने से किया इनकार
बीबीसी ने जब इस घटना के बारे में रंगराजन नरसिम्हा से संपर्क किया तो वो रिपोर्टर पर चिल्ला पड़े और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा, "आपके पास इस बारे में मुझसे बात करने का कोई अधिकार नहीं है."
वहीं बीबीसी से बात करते हुए मंत्री सेकर बाबू ने कहा, "मैंने इस घटना के बारे में मंदिर प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. सिर्फ़ प्रशासन के पास ही किसी को मंदिर में दाख़िल होने से रोकने का अधिकार है. किसी व्यक्ति के पास ये अधिकार नहीं है. जल्द ही हम इसे लेकर कुछ कार्रवाई करेंगे."
भरतनाट्यम नर्तक ज़ाकिर हुसैन 1990 के दशक से वैष्णव धर्म की सेवाओं से जुड़े रहे हैं. बहुत से लोग सोशल मीडिया पर उनकी सेवाओं का ज़िक्र कर रहे हैं.
संगीतकार टीएम कृष्णा ने एक बयान में कहा, "नर्तक ज़ाकिर हुसैन के साथ श्रीरंगम में भगवान रंगनाथ के दर्शन करने जाने के दौरान जो दुर्व्यवहार हुआ उससे दुखी हूं. उस व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए. हमें ये नहीं भूलना चाहिए की श्रीरंगम समधर्मी भक्ति का केंद्र है. यहां थुलुका नाचियार को विशेष स्थान दिया गया है."
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