किसान आंदोलन: दिल्ली से घर लौटे जत्थे, बरसाए गए विमान से फूल

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संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन स्थगित करने का एलान किया और क़रीब एक साल से राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर जमे किसान शनिवार से घर लौटने लगे.
सिंघू बॉर्डर और ग़ाजीपुर बॉर्डर समेत तमाम सीमाओं पर लगे किसानों के तंबू डेरे हटने लगे. घर लौटते किसानों के जत्थों की तस्वीरें भी कहानियां बयान कर रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते महीने तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने का एलान किया था. संसद ने क़ानूनों की वापसी के बिल पर मुहर लगा दी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इस पर अपनी मंजूरी दे दी.
लेकिन किसान सगंठनों ने आंदोलन ख़त्म नहीं किया. इसके बाद केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी पांच मांगों को लेकर लिखित आश्वासन दिया और संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन स्थगित करने का एलान किया.

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किसान नेताओं का कहना है कि 15 जनवरी को एक बार फिर वे स्थिति की समीक्षा करेंगे और अगर केंद्र सरकार वादे पूरे नहीं करती है, तो वे फिर आंदोलन करेंगे.
किसान नेताओं ने कहा, "15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा समीक्षा बैठक करेगा, अगर केंद्र सरकार ने बातें नहीं मानीं तो आंदोलन फिर शुरू होगा."
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किसानों ने शनिवार से घर लौटने का एलान किया था और सुबह से ही आंदोलनकारियों की वापसी शुरु हो गई.
किसान इसे अपनी जीत मान रहे हैं और लौटते समय मिठाई बांट रहे हैं और जश्न मना रहे हैं.

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प्रार्थना के बाद वापसी
दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा ग़ाज़ीपुर पर किसानों ने वापसी का रुख करने के पहले 'अरदास' की. इसके बाद अपने टैंट हटाए.
ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर मौजूद कई किसानों ने एलान किया है कि वो रविवार से वापस जाएंगे.

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मीडिया रिपोर्टों में किसान नेता राकेश टिकैत के हवाले से जानकारी दी गई है कि वो 15 दिसंबर को वापस जाएंगे.
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सिंघु बॉर्डर, जो दिल्ली और हरियाणा की सीमा है, किसान आंदोलन के दौरान लगातार चर्चा में रहा.
शनिवार सुबह यहां से घर लौटते किसानों का जोश देखते बना. ट्रैक्टर और ट्रॉलियों में सवार किसान नारे लगा रहे थे. कई किसानों ने कहा कि अगर ज़रूरत हुई तो वो 'फिर वापस आएँगे.'
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किसानों की वापसी का असर ट्रैफिक पर भी दिखा. सिंघु बॉर्डर के पास स्थित केएमपी फ्लाई ओवर पर शनिवार सुबह के समय ट्रैफिक की रफ़्तार धीमी रही.
दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर किसानों ने वापस लौटने के पहले, वहां बनाए गए अस्थाई निर्माण को हटा दिया. कई किसान ख़ुद इस काम में जुटे नज़र आए.
विमान से बरसे फूल
किसानों के लौटते जत्थे जब पंजाब और हरियाणा की सीमा शंभू बॉर्डर पर पहुंचे तो उनका अनूठे अंदाज़ में स्वागत हुआ.
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, एक अप्रवासीय भारतीय ने एक विमान का इंतज़ाम किया था, जिसके ज़रिए किसानों पर फूल बरसाए गए.
इस तरह से किए गए स्वागत को लेकर किसान काफी खुश नज़र आए

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वहीं, किसानों के लिए सिंघु बॉर्डर पर एक साल से भंडारा चला रहे एक रेस्त्रां के मालिक राणा रामपाल सिंह ने कहा कि वो अब दोबारा अपना रेस्टोरेंट खोंलेगे. प्रदर्शन की वजह से उनका रेस्त्रां बंद था.
उन्होंने ये भी कहा, "किसान मेरा परिवार हैं. जब तक यहां एक भी किसान है, लंगर चलता रहेगा "

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किन पांच मांगों पर किसानों की सरकार से बनी सहमति
किसान नेताओं ने बताया कि कृषि सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से उन्हें चिट्टी आई है जिसमें उनकी कई मांगों पर सहमति बन गई है.
ये पांच मांगें हैं -
एमएसपी- केंद्र सरकार इसे लेकर एक किसान कमेटी बनाएगी जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि लिए जाएंगे. जिन फललों पर अभी एमएसपी मिल रहा है वो जारी रहेगा.
किसानों से केस वापसी- हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड सरकार केस वापसी पर सहमत हो गई है. दिल्ली, अन्य प्रदेश और रेलवे भी तत्काल केस वापसी करेंगे.
मुआवज़ा- यूपी और हरियाणा में सहमति बन गई है. पंजाब की तर्ज पर यहां भी पांच लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा.
बिजली बिल- किसानों पर असर डालने वाले प्रावधानों पर पहले सभी पक्षों के साथ चर्चा होगी. किसान मोर्चा से चर्चा होने के बाद ही बिल संसद में पेश किया जाएगा.
पराली- भारत सरकार ने जो क़ानून पारित किए हैं उसकी धारा 14 और 15 में क्रिमिनल लाइबिलिटी से किसानों को मुक्त किया गया है.

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