दिवाली 2021: रंगारंग तस्वीरों में देखें कोविड के साये में कैसे दीपावली मना रहा है भारत

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भारत में करोड़ों लोग हिंदुओं का पवित्र पर्व दिवाली मना रहे हैं. पूरा देश लाइटों और दीयों की रंगीन रोशनी से सराबोर है. लेकिन इस बार ये त्यौहार कोरोना महामारी और प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं के साये में मनाया जा रहा है.
पूजा, खानपान, दीयों और आतिशबाज़ी के साथ मनाई जाने वाली दिवाली भारत का सबसे अहम पर्व है. अंधेरे के ऊपर रोशनी और बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत के प्रतीक में लोग तेल के दीये और मोमबत्तियां जलाते हैं. इसलिए ही दिवाली को रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है.
ऐसे समय में जब कोरोना महामारी ने लोगों की ज़िंदगी में खलल डाला हुआ है, ये त्यौहार और इससे जुड़े प्रतीक और भी अहम हो जाते हैं. बीते एक महीने में भारत में कोविड संक्रमण के मामले तेज़ी से गिरे हैं, बावजूद इसके भारत अभी भी दनिया में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित देशों में है. भारत में अब तक साढ़े तीन करोड़ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और साढ़े चार लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
कुछ लोगों के लिए दिवाली नए साल की शुरुआत भी होती है. ये भारत के सामाजिक जीवन का अहम दौर भी होता है. दिवाली के दौरान पूजा होती है, लोग एक दूसरे को बधाई संदेश और तोहफ़े भेजते हैं और परिवार और रिश्तेदारों से मिलते हैं.

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दिवाली के पर्व की तारीख़ चांद के हिसाब से हर साल बदलती है लेकिन आमतौर पर ये त्यौहार अक्तूबर-नवंबर में ही पड़ता है. इस बार दिवाली गुरुवार यानी चार नवंबर को मनाई जा रही है
बीते साल की तरह इस बार भी दिवाली से जुड़ी कई परंपराएं कोरोना वायस की वजह से प्रभावित हैं. सरकार ने लोगों से भीड़भाड़ वाले इलाक़ों में न जाने की अपील की है. बहुत से लोग घरों में रहकर ही दिवाली मना रहे हैं. कई मंदिर पूजा को ऑनलाइन दिखा रहे हैं ताकि मंदिरों में भीड़ कम हो.
लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाज़ारों में भारी भीड़ रही. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की भीड़ से भारत में फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ सकता है और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं.

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भारत में अप्रैल और मई में कोरोना अपने चरम पर था और उस समय स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल हो गई थी. अस्पतालों के बाहर मरीज़ों की भीड़ थी और ऑक्सीजन संकट पैदा हो गया था.
अब जन स्वास्थ्य संकट लगभग समाप्त हो चुका है. रोज़ाना दस-बारह हज़ार मामले सामने आ रहे हैं. मई में एक समय चार लाख तक मामले आ रहे थे. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ढील बरतने से कोरोना संक्रमण फिर से बढ़ सकता है.

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लेकिन कोविड सिर्फ़ एकमात्र समस्या नहीं है. दिवाली पर आतिशबाज़ी से हर तरहा के प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है.
दिल्ली में हालात ख़ासतौर पर ख़राब हो जाते हैं. हर साल दिवाली के दौरान दिल्ली पर धुएं के बादल मंडराने लगते हैं और प्रदूषण का स्तर ख़तरनाक स्तर को पार कर जाता है. आसपास के राज्यों में किसानों के धान की पराली जलाने की वजह से दिल्ली में हवा की गुणवत्ता और ख़राब हो जाती है.
दुनियाभर में हुए शोधों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण के बढ़ने से कोरोना संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक शोध में दावा किया गया है कि पीएम 2.5 का सिर्फ़ एक माइक्रोग्राम बढ़ने से कोरोना संक्रमण से मौत का ख़तरा 8 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.
दिवाली से पहले कई राज्यों ने आतिशबाज़ी के इस्तेमाल पर आंशिक और पूर्ण रोक लगाई है. पहले भी इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं.
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