लालू यादव क्या तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच सुलह करा पाएँगे?

तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव

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    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

रविवार शाम बिहार की राजधानी पटना में जो कुछ हुआ, उससे ऐसा लगने लगा है कि तेजस्वी यादव और तेज प्रताप के बीच जारी तनातनी लालू प्रसाद यादव के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है.

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक लंबे अरसे के बाद पटना पहुँचे हैं.

तमाम राजद समर्थकों समेत उनके बेटे तेज प्रताप यादव बेसब्री से इस मौक़े का इंतज़ार कर रहे थे. पटना एयरपोर्ट से लेकर सड़कों पर लालू यादव के आगमन के बैनर और होर्डिंग लगाए गए थे.

लालू प्रसाद यादव के समर्थक लगभग तीन सालों तक बिहार की राजनीतिक ज़मीन से अदृश्य रहे अपने नेता की एक झलक पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

इसी संघर्ष में उनके बेटे तेज प्रताप यादव भी शामिल थे, जो किसी तरह एयरपोर्ट पर अपने पिता तक पहुँचना चाह रहे थे.

बकौल तेज प्रताप यादव, उन्हें अपने पिता से मिलने के लिए काफ़ी हाथापाई का सामना करना पड़ा.

तेज प्रताप यादव चाहते थे कि उनके पिता एयरपोर्ट से सीधे उनके आवास पर आएँ और उसके बाद 10, सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी आवास पर जाएँ.

पिता के स्वागत के लिए तेज प्रताप ने अपने आवास के गेट को भी फूलों से सजवाया था.

लेकिन शाम छह बजे पटना पहुँचने के बाद लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती संग सीधे राबड़ी देवी के आवास पर चले गए.

बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट से राबड़ी आवास तक पहुँचे तेज प्रताप की गाड़ी को बंगले के अंदर नहीं जाने दिया गया.

इससे नाराज़ होकर तेज प्रताप अपने घर के बाहर कुछ समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए. लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ, उसकी उम्मीद ज़्यादा लोगों को नहीं थी.

हुआ यूँ कि लालू यादव को जब तेज प्रताप के धरने पर बैठने की ख़बर मिली, तो वह घर के कपड़ों में ही तेज प्रताप से मिलने पहुँच गए. इसके बाद तेज प्रताप गाड़ी में बैठे हुए लालू यादव के पैरों को धोते हुए दिखाई दिए.

तेज प्रताप यादव

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क्या लालू सुलझा पाएँगे ये विवाद

लालू प्रसाद यादव के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती दो विधानसभा सीटों कुशेश्वरस्थान और तारापुर में हो रहे उपचुनाव में जीत हासिल करना है.

क्योंकि इन दोनों चुनावों में राजद की जीत प्रदेश में पार्टी और पार्टी में तेजस्वी की जगह मज़बूत करेगी.

लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इस राजनीतिक संघर्ष के तार भी दोनों भाइयों के बीच जारी जंग से जुड़े हैं.

क्योंकि जहाँ एक ओर राजद की सहयोगी रही कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान सीट पर अशोक राम के बेटे अतिरेक को टिकट देने का फ़ैसला किया है.

वहीं, तेज प्रताप यादव अपनी पार्टी उम्मीदवार ख़िलाफ़ जाकर अतिरेक का समर्थन करते दिख रहे हैं.

तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव

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कांग्रेस से मिली चुनौती

इसके बाद पार्टी ने तेज प्रताप के ख़िलाफ़ क़दम उठाते हुए राजद की स्टार प्रचारकों की सूची में से उनका नाम हटा दिया है. शिवानंद तिवारी ने तो यहाँ तक कहा है कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है.

ऐसे में सवाल उठता है कि लालू प्रसाद यादव इस समस्या का हल कैसे निकालेंगे.

बिहार की राजनीति को क़रीब से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र कहते हैं, "लालू यादव के लिए इस चुनाव में जीत हासिल करना ज़रूरी है क्योंकि उन्होंने जनरल इलेक्शन में तेजस्वी को एक नेता के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया था. अब प्रदेश स्तर पर भी वह ऐसा करना चाहते हैं."

लेकिन सवाल ये उठता है कि जब चुनौती तेज प्रताप यादव की ओर से ही मिल रही है, तो लालू यादव क्या करेंगे.

बिहार की राजनीति को क़रीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद कहते हैं, "लालू यादव के लिए दिनों-दिन इस समस्या का समाधान निकालना मुश्किल होता जा रहा है और उनके लिए सबसे ज़्यादा कष्ट देने वाली बात ये है कि अगर तेज प्रताप टूटकर बीजेपी में चले जाते, तो ये कहा जा सकता था कि बीजेपी वाले भड़का रहे हैं, लेकिन कांग्रेस, जो राजद की पार्टनर रही है, वह तेज प्रताप का फ़ायदा उठा रही है. तेज प्रताप जहाँ कुशेश्वरस्थान में अशोक राम के बेटे के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. वहीं, तारापुर सीट पर राजद के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. इस एपिसोड का हल निकालने का वक़्त तो निकल चुका है."

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राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव

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इमेज कैप्शन, माँ राबड़ी देवी के साथ तेज प्रताप यादव

भाइयों के बीच सुलह कितनी मुश्किल

लालू यादव के परिवार में उत्तराधिकार को लेकर जंग होना कोई नई बात नहीं है. माना जाता है कि इससे पहले मीसा भारती भी आवाज़ उठा चुकी हैं, जिसके बाद उन्हें दिल्ली भेजा गया था.

लेकिन दोनों भाइयों के बीच जारी विवाद की बात करें, तो अब समाधान निकलना मुश्किल होता जा रहा है. क्योंकि तेज प्रताप पार्टी में अपने भविष्य को लेकर एक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं.

और ऐसे में पार्टी से लेकर परिवार और निजी जीवन में अकेले पड़ चुके तेज प्रताप खुलकर बयानबाज़ी कर रहे हैं.

सुरूर अहमद मानते हैं कि दोनों भाइयों के बीच सुलह होना अब मुश्किल लगता है.

वह कहते हैं, "तेज प्रताप यादव ने खुलकर मीसा भारती के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पिता को बंधक बनाकर रखा गया है. जबकि वे सभी लोग मीसा भारती के घर पर ही थे. एक बात ये है. और दूसरी बात ये है कि पहले राबड़ी देवी द्वारा तेज प्रताप को बढ़ावा दिया जा रहा था और कोशिश ये थी तेजस्वी के क़द को घटाया जाए. लेकिन बीते चुनाव में लालू के बिना 75 सीट लाकर तेजस्वी ने ख़ुद को साबित कर दिया है. ऐसे में अब सभी लोगों ने मान लिया है कि तेजस्वी ही उत्तराधिकारी बनेंगे."

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मीसा भारती

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इमेज कैप्शन, लालू यादव की बेटी मीसा भारती

लालू यादव की सबसे बड़ी चिंता क्या?

लालू यादव पहले ही ये स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव होंगे.

ऐसे में सवाल उठता है कि वह तेज प्रताप यादव की मांग और उनके बढ़ते हुए ग़ुस्से का हल कैसे निकालेंगे.

वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र मानते हैं कि इस समय लालू यादव की सबसे बड़ी चिंता संभवत: तेज प्रताप का ग़ुस्सा ही है.

वह बताते हैं, "तेज प्रताप के धरने पर बैठने से उनकी नाराज़गी स्पष्ट हो चुकी है. राजद के प्रदेश अध्यक्ष को उन्होंने आरएसएस का एजेंट बता दिया. राजद के एमएलसी समीर कुमार सिंह को भी संघ का एजेंट बता दिया."

"कल रात धरने पर बैठने के बाद उन्होंने ये भी धमकी दे डाली कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नहीं बन पाएँगे. जो परसों तक अपने आपको कृष्ण बोल रहा था, और तेजस्वी को अर्जुन बताते थे. और नाराज़गी इस स्तर पर थी कि लालू यादव को आधी रात में तेज प्रताप के घर आना पड़ा."

"और टीवी पर जो फुटेज़ चल रही थी उसे देखने से लगा कि लालू जी शायद सो गए होंगे. लालू जी ने दो-तीन बातें कहीं होंगी जिसके बाद तेज प्रताप के सुर बदल गए. ऐसे में इस समय उनकी सबसे बड़ी चिंता ये है कि तेज प्रताप यादव का ग़ुस्सा किस तरह शांत किया जाए."

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