मौलाना कलीम सिद्दीक़ी कौन हैं जिन्हें यूपी एटीएस ने गिरफ़्तार किया है

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
मौलाना कलीम सिद्दीक़ी और उनके तीन साथियों को यूपी एटीएस की टीम ने मंगलवार को मेरठ से गिरफ़्तार किया था.
एटीएस का आरोप है कि मौलाना कलीम सिद्दीक़ी का वास्ता धर्मांतरण के बड़े गिरोह से है और अभी उनके अन्य साथियों की भी तलाश की जा रही है.
इस बीच, मौलाना कलीम के गाँव खतौली से उनके एक अन्य साथी इदरीस से भी एटीएस पूछताछ कर रही है.
इलाक़े में बड़े इस्लामिक विद्वान के रूप में पहचाने जाने वाले मौलाना कलीम सिद्दीक़ी की गिरफ़्तारी की ख़बर के तत्काल बाद स्थानीय लोगों ने काफ़ी विरोध किया और सड़क भी जाम किया.
बुधवार को लखनऊ में मौलाना की गिरफ़्तारी की बात की पुष्टि करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने मौलाना की संस्थाओं पर अवैध तरीक़े से विदेशी फ़ंडिंग के भी आरोप लगाए.
फ़िलहाल उनके मदरसों और संस्थाओं में सन्नाटा पसरा हुआ है.

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क्या कहती है यूपी पुलिस
एडीजी प्रशांत कुमार का कहना था, "इंटेलीजेंस रिपोर्ट के अनुसार ये तथ्य प्रकाश में आए कि मौलाना कलीम सिद्दीक़ी अवैध धर्मांतरण के कार्य में लिप्त हैं और विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं की आड़ में अवैध धर्मांतरण का कार्य देशव्यापी स्तर पर किया जा रहा है."
प्रशांत कुमार ने कहा है, "जिन संगठनों ने उमर गौतम से संबंधित ट्रस्ट को फ़ंडिंग की थी उन्हीं स्रोतों से मौलाना कलीम के ट्रस्ट को भी अनियमित रूप से भारी मात्रा में फ़ंडिंग की गई है. अभी तक की जाँच के बाद उनके खाते में एकमुश्त डेढ़ करोड़ रुपये बहरीन से आए हैं और कुल तीन करोड़ रुपये विभिन्न स्रोतों से आए हैं."
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कौन हैं मौलाना कलीम सिद्दीक़ी
मूल रूप से मुज़फ़्फ़रनगर के खतौली क्षेत्र के फूलत गाँव के निवासी मौलाना कलीम सिद्दीक़ी की पहचान बड़े इस्लामिक विद्वानों में की जाती है. मौलाना कलीम ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष और जमीयत-ए-वलीउल्लाह ट्रस्ट के भी अध्यक्ष हैं.
साल 1987 में उन्होंने खतौली क्षेत्र के गाँव फुलत में जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया की स्थापना की, जिसका संचालन वो ख़ुद करते हैं. मौलाना कलीम के मदरसे में क़रीब 300 छात्र अरबी, उर्दू, क़ुरान की पढ़ाई करते हैं. मौजूदा समय में यहाँ ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है.
सात सितंबर को मुंबई में 'राष्ट्र प्रथम और राष्ट्र सर्वोपरि' के नाम से आयोजित एक कार्यक्रम में भी वे शामिल हुए थे. उस कार्यक्रम में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि थे.
मौलाना कलीम सिद्दीक़ी का परिवार दिल्ली के शाहीन बाग़ में रहता है लेकिन गाँव में उनके परिवार के अन्य लोग रहते हैं और उनके एक बेटे वहीं डेयरी का व्यवसाय करते हैं.

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क्या कहते हैं पड़ोसी
फुलत गाँव के ही रहने वाले मौलाना कलीम सिद्दीक़ी के पड़ोसी और रिश्ते में उनके भतीजे मोहम्मद शाहनवाज़ बताते हैं, "मौलाना कलीम का ताल्लुक़ प्रतिष्ठित और ज़मींदार घराने से है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा फुलत गाँव के ही एक मदरसे में हुई. खतौली से ही इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने मेरठ कॉलेज से बीएससी और एमएससी की."
स्थानीय लोगों के मुताबिक़, मौलाना कलीम के सहयोग से मुज़फ़्फ़रनगर के अलावा कई अन्य जगहों पर भी मदरसे संचालित किए जाते हैं और वो देश भर में ग़रीब मुसलमान बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक सुधार के कामों में जुड़े हुए हैं.
शाहनवाज़ आलम बताते हैं कि हरियाणा में स्वामी अग्निवेश के साथ मिलकर उन्होंने शराब बंदी अभियान में भी हिस्सा लिया था. देश-विदेश में धार्मिक कार्यक्रमों में अक्सर उन्हें बुलाया जाता है.

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मौलाना कलीम सिद्दीक़ी पर आरोप
मौलाना कलीम की गिरफ़्तारी के बाद अब कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जो मौलाना पर कथित धर्मांतरण का आरोप लगा रहे हैं लेकिन उनके गाँव फूलत और आस-पास के गाँव वालों को इस बात का यक़ीन नहीं है.
मुज़फ़्फ़रनगर के थाना छपार क्षेत्र के रहने वाले 43 वर्षीय अरविंद कश्यप ने मौलाना कमील सिद्दीक़ी की गिरफ़्तारी के बाद गुरुवार को हिन्दू जागरण मंच के साथ पुलिस स्टेशन पहुँच कर मौलाना के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की माँग की है.
अरविंद कश्यप का आरोप है कि कुछ साल पहले उन्हें खुड्डा गाँव में दो मुस्लिम युवकों ने धर्म परिवर्तन करने की सलाह दी थी.
स्थानीय पत्रकार योगेश त्यागी से बातचीत में अरविंद कश्यप ने बताया, "युवकों ने मुझे धर्म बदलने के एवज़ में दस लाख रुपये ओर शादी कराने का वादा किया था. जब मैं तैयार हो गया तो खुड्डा गांव के मदरसे में मौलाना कलीम सिद्दक़ी ने कलमा पढ़ाकर मेरा नाम अरविंद से बदलकर अकबर कर दिया. लेकिन धर्म परिवर्तन से पहले मुझे जो लालच दिया गया था वो पूरा नहीं किया गया. जिसकी वजह से मैंने हिन्दू जागरण मंच के माध्यम से दोबारा हिन्दू धर्म में वापसी कर ली है. मैंने कुछ महीने पहले पुलिस में शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी लेकिन आज तक पुलिस ने धर्म परिवर्तन कराने वाले मौलाना के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है."

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अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ़्तारी
वहीं फूलत गांव के ही रहने वाले दिनेश चौधरी इस बात से हैरान हैं कि मौलाना कलीम सिद्दीक़ी को अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
वो कहते हैं, "अगर मौलाना ऐसा कर रहे होते तो अपने गाँव में भी धर्मांतरण कराते. यहाँ तो किसी का धर्मांतरण नहीं हुआ और न ही कभी किसी ने मौलाना पर संदेह जताया. हर किसी की मदद करते थे. अब कैसे इस रैकेट में वो घुस गए, या फिर उन्हें जबरन फँसाया जा रहा है, यह सब हम लोग क्या जानें."
मौलाना कलीम सिद्द्क़ी की गिरफ़्तारी पर इमाम संगठन के अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती ज़ुल्फ़िक़ार अली हैरान हैं और इसके पीछे कोई साज़िश बताते हैं.
वो कहते हैं, "अभी कुछ दिन पहले मौलाना कलीम सिद्दीक़ी साहब को आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत जी का निमंत्रण आया था और वो उनके बुलावे पर वहाँ गए थे. ये बात समझ से परे है कि आरएसएस के कार्यक्रम में अगर किसी को निमंत्रण आता है तो उसकी पुलिस और एलआईयू जाँच होती है. अगर वो किसी फ़ंडिंग में शामिल थे तो उन्हें आरएसएस के कार्यक्रम में क्यों बुलाया गया? और यदि उनकी गतिविधियां संदिग्ध थीं तो अब तक पुलिस और एटीएस क्या कर रही थी?"

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गिरफ़्तारी का मतलब
मौलाना कलीम सिद्दीक़ी का किसी राजनीतिक दल से न तो जुड़ाव था और न ही किसी राजनीतिक दल ने उनकी गिरफ़्तारी पर कोई प्रतिक्रिया दी है लेकिन उनकी गिरफ़्तारी के राजनीतिक निहितार्थ ज़रूर निकाले जा रहे हैं.
उनके भतीजे मोहम्मद शाहनवाज़ कहते हैं, "राजनीतिक षड्यंत्र के तहत ये गिरफ़्तारी की गई है क्योंकि यदि पुलिस को और एटीएस को यह सब पता था तो अब तक क्यों नहीं की गई गिरफ़्तारी? दूसरी बात, जो लोग सामने आ रहे हैं और धर्मपरिवर्तन का आरोप लगा रहे हैं, ये भी अभी तक क्यों चुप थे?"
मुज़फ़्फ़रनगर के ही एक अन्य मौलाना साबिर हुसैन का कहना है कि धर्मपरिवर्तन और विदेशी फ़ंडिंग से मुसलमान धर्म गुरुओं को जोड़ देना बहुत आसान है.
साबिर हुसैन कहते हैं, "अब तक किसी भी मामले में कोई भी आरोप साबित नहीं हुए हैं लेकिन लोगों में ये संदेश दे दिया जाता है कि जब धर्मगुरु लोग ऐसे काम में शामिल हैं तो दूसरे क्यों नहीं होंगे. जबकि सच्चाई सभी को मालूम है."

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वहीं, समाजवादी पार्टी के एक नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि उनकी गिरफ़्तारी पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से की गई है जबकि यूपी में विधान सभा चुनाव सामने हैं.
उनके मुताबिक, "पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम एकता के कारण सरकार बौखलाई हुई है और इस एकता में दरार डालने की हरसंभव कोशिश कर रही है. लगातार सांप्रदायिक संघर्ष की छोटी-मोटी घटनाएं पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आ रही हैं और यह भी पता चल रहा है कि ये घटनाएं कुछ लोग साज़िशन करा रहे है. धर्मांतरण जैसे आरोप लगाकर मुसलमानों के प्रति हिन्दुओं की नफ़रत को ही उकसाना है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई भी चाल अब क़ामयाब होने वाली नहीं है."
स्थानीय पत्रकार मौलाना योगेश त्यागी बताते हैं कि मौलाना कलीम सिद्दीक़ी की इस इलाक़े में काफ़ी अच्छी छवि है और एक धर्मगुरु के तौर पर उनका सम्मान भी है लेकिन उनकी गिरफ़्तारी के बाद से ही लोग सकते में हैं.
वो बताते हैं, "जिस दिन मौलाना कलीम के बारे में ख़बर चली कि उन्हें एटीएस ने उठा लिया है, उस दिन बड़ी संख्या में लोग विरोध में सड़कों पर निकल आए. काफ़ी हंगामा भी हुआ. लेकिन जब लखनऊ में उनकी गिरफ़्तारी दिखाते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और विदेशी फ़ंडिंग जैसी बातें सामने आईं तो उसके बाद कोई विरोध नहीं हुआ. लेकिन लोगों में उनकी गिरफ़्तारी को लेकर ग़ुस्सा ज़रूर है."
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