राहुल और प्रियंका के पास अनुभव नहीं है: अमरिंदर सिंह- प्रेस रिव्यू

राहुल प्रियंका

इमेज स्रोत, Getty Images

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने बुधवार को कहा कि उन्होंने तीन हफ़्ते पहले ही इस्तीफ़े की पेशकश की थी लेकिन उन्हें पद पर बने रहने के लिए कहा गया था.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर प्रमुखता से जगह दी है.

सिद्धू के साथ जारी विवाद और मुख्यमंत्री की कुर्सी गँवाने के बाद अमरिंदर सिंह ने पहली बार कांग्रेस नेतृत्व पर खुलकर बोला है. पार्टी कोशिश करती रही कि सिद्धू और कैप्टन के बीच विवाद सुलझ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ था.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, अमरिंदर सिंह ने कहा, ''मैं जीत के बाद ही पद छोड़ने को तैयार था लेकिन हार के बाद कभी नहीं. मैंने तीन हफ़्ते पहले ही कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से इस्तीफ़े की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने पद पर बने रहने के लिए कहा था. अगर वो मुझे कहतीं कि मुख्यमंत्री से इस्तीफ़ा देना है तो मैं दे देता. एक सैनिक के तौर मैं अपना काम करना जानता हूँ.''

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ''पंजाब में दूसरी जीत के बाद उन्होंने सोनिया गांधी से किसी और को मुख्यमंत्री का पद देने के लिए कहा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए मैं अब लड़ूंगा. जब कांग्रेस विधायक दल की बैठक गोपनीय तरीक़े से बुलाई गई तो मैंने ख़ुद को अपमानित महसूस किया. मुझे भरोसे तक में नहीं लिया गया. मैं विधायकों को फ्लाइट से गोवा लेकर नहीं गया था. मैं तिकड़म में भरोसा नहीं करता हूँ. राहुल और प्रियंका को पता है कि यह मेरा तरीक़ा नहीं है. प्रियंका और राहुल मेरे बच्चे की तरह हैं. जो कुछ भी हुआ, उसे ऐसा नहीं होने देना चाहिए था. मैं दुखी हूँ.''

अमरिंदर सिंह ने कहा कि राहुल और प्रियंका के पास अनुभव नहीं है और उनके सलाहकार उन्हें ग़लत जानकारी दे रहे हैं. अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक विकल्प खुला रखा है. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनके लिए उम्र बाधा नहीं है क्योंकि कोई 40 में भी ख़ुद को बूढ़ा मान सकता है और 80 में भी जवान. बादल और मजिठिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर अमरिंदर सिंह ने कहा कि क़ानून अपना काम करेगा.

ब्रिटेन

इमेज स्रोत, @10DOWNINGSTREE

ब्रिटेन मानकर भी नहीं माना

ब्रिटेन ने भारत में बनी कोविड वैक्सीन कोविशील्ड को मान्य वैक्सीन के तौर पर स्वीकार कर लिया है लेकिन भारत में प्रशासन की तरफ़ से जारी किए गए वैक्सीन सर्टिफिकेट को मान्यता देने से इनकार कर दिया है. इस ख़बर के अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू ने पहले पन्ने पर छापा है.

ब्रिटेन के इस फ़ैसले के बावजूद भारतीयों को ब्रिटेन में 10 दिनों तक क्वॉरंटीन में रहना होगा. ब्रिटेन के इस रुख़ से दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ सकता है. भारत ने इसे भेदभाव पूर्ण नीति क़रार दिया था और जवाबी क़दम उठाने की चेतावनी दी थी. हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस मसले पर अब भी बातचीत चल रही है.

ब्रिटिश और भारतीय अधिकारियों को उम्मीद है कि वैक्सीन सर्टिफिकेशन का मसला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. ब्रिटेन ने भारत को उस सूची में रखा है, जहाँ के नागरिकों को स्थानीय प्रशासन से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद उसे मान्यता नहीं दी जा रही है. यूके ने 18 देशों के नागरिकों को हरी झंडी दी है कि वे अगर वैक्सीन लगवा चुके हैं तो उन्हें ब्रिटेन में क्वॉरंटीन की ज़रूरत नहीं होगी. इनमें कनाडा, डेनामार्क, एंटिगुआ और बार्बुडा तक शामिल हैं. इन्हें ब्रिटेन ने ग्रीन लिस्ट में रखा है.

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

कोरोना से मरने वालों के परिवार को 50 हज़ार रुपए का मुआवज़ा

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण समेत कई अख़बारों ने पहले पन्ने पर एक और ख़बर प्रकाशित की है कि कोरोना से मरने वालों के परिवार को 50 हज़ार रुपए का मुआवज़ा मिलेगा. दैनिक जागरण ने अपनी ख़बर में लिखा है कि कोरोना संक्रमण से मरने वालों के परिजनों को 50 हज़ार रुपए की अनुग्रह राशि मिल सकती है.

यह राशि राज्य आपदा राहत कोष से जारी की जाएगी और संबंधित परिवार के सदस्य के आधार से जुड़े खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की ओर से तैयार गाइडलाइंस को गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कोरोना से होने वाली मौतों के लिए अनुग्रह राशि दिए जाने की गाइडलाइंस तैयार करने का आदेश दिया था. अदालत गुरुवार को इन गाइडलाइंस पर सुनवाई करेगी.

सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, कोरोना से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने का फ़ैसला मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज़ों की पड़ताल के बाद ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण करेगा लेकिन पैसे का भुगतान राज्य आपदा राहत कोष से किया जाएगा.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोरोना से होने वाली मौत के पंजीकरण के लिए अलग-अलग गाइडलाइंस जारी की जा चुकी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)