उज्जैन में मुसलमान कबाड़ी से जय श्री राम के नारे लगवाने का क्या है पूरा मामला?

राशिद आसपास के गांवों में कबाड़ ख़रीदते हैं और उसे माहिदपुर के एक बड़े कबाड़ी को बेच देते हैं.
इमेज कैप्शन, राशिद आसपास के गांवों में कबाड़ ख़रीदते हैं और उसे माहिदपुर के एक बड़े कबाड़ी को बेच देते हैं.
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक मुसलमान कबाड़ी को काम करने से रोकने और जबरदस्ती जय श्री राम का नारा लगवाने के मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

ये घटना उज्जैन के झारडा थानाक्षेत्र के सेंकली गांव की है. सब-डिवीज़नल पुलिस अधिकारी आरके राय ने बीबीसी से कहा, "इस मामले में ईश्वर सिंह और कमल सिंह नाम के दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया है. उन्हें हिरासत में भेजा जा रहा है."

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश के उज्जैन के माहिदपुर के फकीर मोहल्ले में रहने वाले 44 साल के अब्दुल राशिद पिछले बीस सालों से कबाड़ ख़रीदने का काम करते हैं.

राशिद आसपास के गांवों में कबाड़ ख़रीदते हैं और उसे माहिदपुर आकर बड़े कबाड़ी को बेच देते हैं.

रशीीद

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शनिवार को जब रशीद सेंकली गांव में कबाड़ ख़रीद रहे थे उस वक़्त कुछ हिंदूवादी युवाओं ने उन्हें रोका और पूछा कि वो किसकी अनुमति से यहां व्यापार कर रहे हैं.

इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था.

बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए अब्दुल राशिद ने बताया, "मैं सेंकली गांव में भंगार ख़रीद रहा था. तभी मोटरसाइकलों पर कुछ युवा आए और कहने लगे कि किससे पूछ कर हमारे गांव में काम कर रहे हो. उन्होंने मेरे ख़रीदा गया भंगार गाड़ी से उतारकर फेंक दिया और बदतमीज़ी की."

अब्दुल रशीद कहते हैं कि जिस वक्त ये घटना हो रही थी, कई लोग वहां मौजूद थे लेकिन सब ख़ामोश रहे और किसी ने कुछ नहीं कहा.

रशीद कहते हैं, "इसके बाद जब मैं गांव से बाहर की तरफ आने लगा तो उन्होंने मोटरसाइकिलों से मेरा पीछा किया और रास्ते में रोककर जबरदस्ती मुझसे जय श्री राम के नारे लगवाए."

अब्दुल रशीद के मुताबिक़ इस घटना के बाद वो बहुत डर गए थे और इस कारण चुपचाप घर आ गए थे.

रशीद कहते हैं, "मैंने किसी को कुछ नहीं बताया और चुपचाप घर आ गया. मैं बहुत डर गया था. लेकिन शाम तक उन लड़कों ने मेरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया. फिर कुछ लोगों ने मेरी हिम्मत बढ़ाई और मैं थाने में शिकायत लेकर गया."

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पुलिस ने दिया सुरक्षा का भरोसा

रशीद कहते हैं पुलिस ने मेरी पूरी बात सुनी और जिन दो लड़कों ने मेरे साथ जबरदस्ती की थी उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की. घटना के वक्त वहां पर कई और लड़के भी थे लेकिन वो इतना शोर नहीं मचा रहे थे.

रशीद कहते हैं, "पुलिस ने मुझे भरोसा दिया कि मेरे साथ बदतमीज़ी करने वाले लड़कों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा."

वहीं एसडीओपी आरके राय कहते हैं, "त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. ऐसी कोई घटना आगे ना हो इसके लिए भी पूरी एहतियात बरती जा रहा है."

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कभी सोचा नहीं था ऐसा होगा

रशीद कहते हैं कि वो बीस सालों से इस इलाक़े में काम कर रहे हैं और कभी भी किसी ने उन्हें काम करने से रोका नहीं है.

वो कहते हैं, "मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरे साथ ऐसा होगा. मैं बेहिचक अपना काम करता था. मैं ग़रीब आदमी हूं, इसी काम से अपना परिवार पाल रहा हूं."

रशीद कहते हैं कि इस घटना ने उनके भीतर डर पैदा कर दिया है. वो कहते हैं, "मैंने सोचा है कि आगे से मैं सोच समझकर बाहर निकलूंगा, उन इलाक़ों में नहीं जाऊंगा जहां ख़तरा है. मैं अपने काम का दायरा कम कर लूंगा. लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि अगर काम नहीं करूंगा तो अपना परिवार कैसे पालूंगा."

रशीद

मुसलमानों में डर का माहौल

उज्जैन में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शफ़ी नागौरी कहते हैं, "इस तरह की घटनाओं से स्थानीय मुसलमान आबादी में डर का माहौल पैदा हो रहा है. प्रशासन को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सुरक्षा का माहौल बन सके."

नागौरी कहते हैं कि इस मामले में भी एफ़आईआर दर्ज कराने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को सक्रिय होना पड़ा. यदि एफ़आईआर नहीं होती तो ये मामला दब जाता और अभियुक्तों का हौसला बढ़ जाता.

नागौरी कहते हैं, "मालवा के इस क्षेत्र में हाल के दिनों में सांप्रदायिक घटनाएं बढ़ रही हैं, ख़ासकर सत्ताधारी दल से जुड़े हिंदूवादी कार्यकर्ता ऐसा कर रहे हैं. पुलिस जब तक निष्पक्ष होकर कार्रवाई नहीं करेगी ये घटनाएं नहीं रुकेंगी."

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वहीं बजरंग दल के उज्जैन ईकाई के प्रभारी नीरज कौशल कहते हैं कि हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने इलाक़े में इस तरह की किसी घटना को अंजाम नहीं दिया है.

नीरज कौशल ने कहा, "हो सकता है ये वीडियो पुराना है और माहौल ख़राब करने के लिए वायरल किया गया हो."

कौशल कहते हैं, "अभी कुछ दिन पहले मोहर्रम था और मुसलमानों ने जुलूस निकाले थे. उस पर किसी ने कहीं कोई आपत्ति नहीं की. लेकिन आजकल कुछ तालिबानी सोच के लोग इस क्षेत्र का माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं."

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