'तालिबान पर भरोसा नहीं कर सकते, वो सबको पीट रहे हैं'

यात्री

इमेज स्रोत, RAVINDER SINGH ROBIN/BBC

हरदीत सिंह के चेहरे पर मुस्कराहट थी और वो इसे छिपाने की कोशिश भी नहीं कर रहे थे.

वो मुश्किलों का लंबा रास्ता पार करते हुए रविवार को भारत आए थे. राजधानी दिल्ली के करीब हिंडन एयरबेस पर उतरने के बाद वो मीडिया से बात कर रहे थे.

अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा हालात का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मुश्किल तो बहुत ज़्यादा थी, अब क्या कह सकते हैं. "

हालांकि, हरदीत ने दावा किया कि वो उन खुशकिस्मतों में से एक थे जिन्हें तालिबान ने ज़्यादा परेशान नहीं किया.

उन्होंने बताया, "हमारे लिए तो ठीक था. दूसरे लोगों के लिए बहुत मुश्किल है. हम तो गुरुद्वारा साहिब में थे और ठीक थे."

दीपेन शेरपा

इमेज स्रोत, ANI

हावी है डर

दीपेन शेरपा उन मुश्किलों से दो-चार हुए थे जिनका ज़िक्र हरदीत सिंह कर रहे थे.

दीपेन ने हालात की जानकारी देते हुए कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में लोगों के लिए हालात बहुत खराब हैं. चारों तरफ फायरिंग और बमबारी हो रही है."

दीपेन ने आगे कहा, "तालिबान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. वो लोगों को पीट रहे हैं. हम बहुत डर में जी रहे थे."

अफ़गानिस्तान से रविवार को कुल 392 लोग भारत आए. इनमें से 168 लोग हिंडन एयरबेस पर उतरे. इनमें से 107 भारतीय नागरिक थे और 23 अफ़ग़ानिस्तान के हिंदू और सिख समुदाय के लोग. इनमें दो सांसद अनारकली और नरेंद्र सिंह खालसा शामिल थे.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

'सबकुछ ख़त्म है, अब ज़ीरो है'

नरेंद्र सिंह खालसा को भारत आने की तसल्ली है. लेकिन दिल में अपने घर अफ़ग़ानिस्तान को छोड़कर आने की तकलीफ भी है.

उन्होंने कहा, "मुझे रोना आ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में (हम) पीढ़ियों से रह रहे थे. इस तरह के हालात पहले नहीं देखे थे जो अब देख रहे हैं उधर."

आंखों में आंसू और रुंधे गले को साफ करते हुए नरेंद्र सिंह ने कहा, "सब कुछ ख़त्म हो गया. 20 साल तक जो सरकार बनी थी, वो सबकुछ ख़त्म है, अब ज़ीरो है."

भारत का विदेश मंत्रालय अफ़ग़ानिस्तान में फंसे भारतीयों को निकालने की कोशिश कर रहा है. सरकार के अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ान हिंदुओं और सिखों को सुरक्षित निकालना भी प्राथमिकता है. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के नागरिकों के लिए भारत का रास्ता आसान नहीं है.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

अफ़ग़ानिस्तान के अनुभव

तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के ऐसे नागरिकों की ख़ासतौर पर जांच कर रहे हैं जिनके पास भारत का वीजा है. रविवार को भारत आए 168 लोगों की यात्रा भी आसान नहीं रही है. इन लोगों को दो दिन तक एयरपोर्ट के पास एक हॉल में रोका गया था.

अफ़ग़ानिस्तान की सांसद अनारकली ने कहा कि वो भारत आकर खुश हैं लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के अपने अनुभव के बारे में बाद में बात करेंगी.

रविवार को परिवार के साथ पहुंची अफ़ग़ानिस्तान की एक महिला ने से कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में हालात बिगड़ रहे थे, इसलिए मैं अपनी बेटी और दो पोते-पोतियों के साथ यहां आई हूँ.''

उन्होंने कहा, "हमारे भारतीय भाई-बहन हमारे बचाव में आए. उन्होंने (तालिबान ने) मेरा घर जला दिया. मैं भारत को हमारी मदद करने के लिए धन्यवाद देती हूँ."

भारत आए विमान में बैठे यात्री

इमेज स्रोत, ANI

कैसे दूर होगी दिक्कत?

भारत ने बीते दो दशक के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में आधारभूत ढांचा खड़ा करने पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं. भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की संसद के अलावा वहां बांध, स्कूल और अस्पताल भी बनाए हैं. अफ़ग़ानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकारों के साथ भारत के रिश्ते मजबूत रहे हैं लेकिन तालिबान को लेकर भारत सरकार ने अब तक अपना रुख जाहिर नहीं किया है.

भारत सरकार सिख और हिंदू समुदाय के लोगों को शरण देने का संकेत दे चुकी है.

विदेश मंत्रालय की ओर से 16 अगस्त को जारी बयान में कहा गया कि जो सिख और हिंदू अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना चाहते हैं, "भारत उन्हें आने देगा." इस बयान में ये भी कहा गया है कि भारत सरकार उन अफ़ग़ान लोगों के साथ 'खड़ी रहेगी' जो परस्पर विकास, शिक्षा और जनहित के मुद्दों में साझेदार रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान से निकले 87 भारतीयों और नेपाल के दो नागरिकों का जत्था ताजिकिस्तान के रास्ते देर रात भारत आया. वहीं कतर की राजधानी दोहा से विशेष विमान के जरिए 135 यात्री दिल्ली पहुंचे. वो कुछ दिन पहले काबुल से दोहा गए थे. काबुल पर तालिबान के कब्ज़े के दो दिन बाद भारत ने 200 लोगों को निकाला था. इनमें भारतीय राजदूत और दूतावास के कर्मचारी शामिल थे.

इस बीच भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंदजई ने कहा कि 'कुशल नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय मदद' के जरिए ही उनके देश की तकलीफें कम हो सकती हैं.

ये भी पढ़ें

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)