वंदना कटारिया के घर के बाहर जातिवादी हंगामे का सच क्या है - ग्राउंड रिपोर्ट

भारतीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया

इमेज स्रोत, Alexander Hassenstein/Getty Images

इमेज कैप्शन, भारतीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया
    • Author, ध्रुव मिश्रा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, रोशनाबाद, हरिद्वार से

टोक्यो ओलंपिक में अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ भारतीय महिला हॉकी टीम के हारने के बाद खिलाड़ी वंदना कटारिया के घर के बाहर जातिवादी हंगामा करने के आरोप में हरिद्वार पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.

हरिद्वार के एसएसपी ने बीबीसी को बताया कि ये गिरफ़्तारी एससी/एसटी एक्ट के तहत की गई है.

रोशनाबाद गांव की तंग गलियों में वंदना कटारिया का घर है. गलियां इतनी तंग हैं कि उनके घर तक गाड़ी पहुँचना संभव नहीं है.

उनके घर पहुँचने के लिए बाहर मुख्य रास्ते पर गाड़ी खड़ी करनी पड़ती है. फिर क़रीब 300-400 मीटर पैदल चलकर उनके घर तक पहुँचा जा सकता है. आसपास के इलाक़े में निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं.

इस इलाक़े में वंदना कटारिया के घर का पता पूछने पर अधिकतर लोग उनके नाम से अनजान ही मिले.

वंदना कटारिया की मां

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, वंदना कटारिया की मां

पटाखे फोड़े गए?

वंदना कटारिया की मां ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "शाम के क़रीब 5 बज रहे थे और हम लोग मैच देख रहे थे, तभी पटाखे फोड़े जाने की आवाज़ सुनाई दी. हम लोग नीचे गए. हमने पूछा तो हमें बताया गया कि पटाखे फोड़े गए हैं."

वंदना की मां ब्लड प्रेशर की मरीज़ हैं. जब हमारी उनसे मुलाक़ात हुई तो उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. उन्होंने इससे आगे बात करने से मना कर दिया.

वंदना कटारिया के बड़े भाइयों में से एक लाखन सिंह कटारिया बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "हम सभी लोग यहां घर पर मैच देख रहे थे, साथ में कई मीडिया वाले भी मौजूद थे. जैसे ही टीम इंडिया मैच हारी हमारे घर के पास में ही एक घर है, वहां पटाख़े फूटने शुरू कर दिए गए. हमारे बड़े भाई ने यह सब सुनकर कहा कि देखो कौन है?"

लाखन बताते हैं, "हम नीचे गए तो देखा कि वहां काफ़ी भीड़ जमा थी. वहां कई लोगों ने पूछा कि ये लोग आतिशबाज़ी कर रहे हैं, पटाख़े फोड़ रहे हैं, इनका क्या किया जाए? तभी वहां दो कॉन्स्टेबल आ गए. उन्हें बता दिया गया था कि यहां ऐसी बात हुई है. फिर विक्की पाल (पूरा नाम विजयपाल) को पुलिसवाले अपने साथ लेकर चले गए."

वंदना कटारिया का घर

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, वंदना कटारिया का घर

दूसरा पक्ष

विजयपाल का घर वंदना कटारिया के घर से क़रीब 40 मीटर की दूरी पर है. उस वक़्त घर में उनकी दो बहनें मौजूद थीं. वो दोनों काफ़ी डरी हुई थीं. दरवाज़ा नहीं खोल रही थीं. जब हमने उनसे बात करने की कोशिश की तो छोटी बहन ने ये कहते हुए बात करने से मना कर दिया, "आप लोग भी उन्हीं (वंदना कटारिया) के घर से आए हैं. मैंने आपको उनके घर से आते हुए देखा है. हम आपसे बात नहीं करेंगे."

लेकिन कुछ देर के बाद गिरफ़्तार विजयपाल की बड़ी बहन हमसे बात करने को तैयार हुईं.

उन्होंने कहा, "मेरे भाई को फँसाया जा रहा है. मेरे परिवार के साथ वंदना कटारिया के भाइयों की पहले भी लड़ाई, यहाँ तक की हाथापाई भी हुई है." वो मारपीट के कुछ वीडियो भी हमें दिखाती हैं.

विजयपाल की बहन ये भी कहती हैं कि कोई भी मीडिया वाला अभी तक उनका पक्ष जानने उनके घर नहीं आया था. उनके अनुसार सभी मीडिया वाले वंदना कटारिया के घर जाते हैं और फिर वहीं से लौट जाते हैं.

वंदना कटारिया का परिवार

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, वंदना कटारिया का परिवार

विजयपाल की माँ कविता पाल क़ानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कोर्ट से घर पहुँचीं.

पटाखे फोड़े जाने के आरोप के जवाब में बीबीसी से बातचीत में वो कहती हैं, "मेरे बेटे की उस दिन तबीयत ख़राब थी, उसे बुख़ार और गले में ख़राश की शिकायत थी इसलिए वो अंदर कमरे में लेटा हुआ था. तभी अचानक हमारी छत पर पटाख़े फूटने की आवाज़ आई. हम लोग दौड़कर छत पर गए."

वे बताती हैं कि अभी विजयपाल के पिता को इसकी सूचना दी जा रही थी, "तभी पुलिस हमारे घर पहुँच गई और मेरे बेटे को उठाकर ले गई. क्या कभी आपने देखा है इतनी जल्दी पुलिस आई हो?"

विजय पाल की माँ से हमने पूछा कि आपकी छत पर ऐसे पटाखे कौन फोड़ सकता है, छत आपकी है तो कोई दूसरा पटाखे कैसे फोड़ सकता है?

इसके जवाब में वो कहती हैं, "हमारी छतें आसपास में मिली हुई हैं. हमारी वंदना कटारिया के परिजनों से पुरानी रंजिश है. हम दोनों के बीच और लड़ाइयां बढ़ें, इस वजह से भी हो सकता है किसी ने ये हरकत की हो."

आसपास पड़ोस के लोगों से जब हमने इस बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की तो ज़्यादातर लोग इस मामले पर बोलने से बचते नज़र आए.

वंदना कटारिया के सबसे बड़े भाई चंद्रशेखर कटारिया

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, वंदना कटारिया के सबसे बड़े भाई चंद्रशेखर कटारिया

जातिवादी गालियाँ?

इस मामले में विजयपाल की एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ़्तारी हो चुकी है. विजयपाल पर आरोप है कि उन्होंने जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया था.

जातिसूचक शब्द कहे जाने के बारे में वंदना के भाई लाखन कहते हैं, "इसमें एससी/एसटी एक्ट का कोई मतलब नहीं है और यहाँ जातिसूचक शब्द की भी कोई बात नहीं. कुछ लोगों ने इसे मुद्दा बनाया है. मामला सिर्फ़ पटाखे फोड़े जाने को लेकर है."

लेकिन इस पूरे मामले में वंदना कटारिया के सबसे बड़े भाई चंद्रशेखर कटारिया ने लिखित शिकायत दी है कि जातिसूचक शब्द कहे गए थे. ख़ुद हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है.

हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अवुडई कृष्ण राज एस

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अवुडई कृष्ण राज एस

पुलिस का पक्ष

हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अवुडई कृष्ण राज एस ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "वंदना कटारिया के भाई चंद्रशेखर कटारिया की लिखित शिकायत मिली. उसी के तहत कार्रवाई करते हुए हमने सेक्शन 504 (उकसावे की कार्रवाई) और एससी-एसटी एक्ट के तहत एफ़आईआर दर्ज की है. इस मामले में एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी हो चुकी है. आगे की जाँच जारी है."

पूरे दिन भर वंदना कटारिया के सबसे बड़े भाई चंद्रशेखर कटारिया घर पर मौजूद नहीं थे. जब शाम को वे घर आए तब हमने उनसे इस मामले में जानकारी लेने की कोशिश की कि आख़िर जातिसूचक शब्द कहे जाने का मामला कहाँ से आया?

इसका जवाब देते हुए चंद्रशेखर कटारिया कहते हैं, ''हम लोग दलित जाति से आते हैं, ये तो सभी को पता है. हम अपनी जाति नहीं बदल सकते, जाति सूचक शब्द कहना या गाली देना ऐसा केवल हम ही नहीं कह रहे और भी लोग कह रहे हैं. आप उनसे पूछ लो जाकर. 'वंदना कटारिया मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए जा रहे हैं. यह क्यों किया जा रहा है, किस बात की रंजिश है?"

कई लोग पोस्टर बैनर लेकर वंदना कटारिया के घर उनके समर्थन में नारेबाज़ी करते हुए नज़र आए.

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, कई लोगों ने पोस्टर बैनर लेकर वंदना कटारिया के घर उनके समर्थन में नारेबाज़ी की.

पुरानी रंजिश और दोतरफ़ा नारेबाज़ी

विजयपाल की बहनों ने लड़ाई-झगड़े के जो वीडियो दिखाए थे उनके बारे में पूछे जाने पर चंद्रशेखर कहते हैं, "यह लोग बाहर से आए हुए हैं, दबंग लोग हैं. ये कहते हैं कि हम किसी से डरते नहीं हैं. हम लोग मुज़फ़्फ़रनगर के रहने वाले हैं, जैसा हमने वहां किया है, यहां भी ऐसा ही कर देंगे. मुझे जान से मारने की धमकियाँ भी दी हैं इन लोगों ने."

दूसरी ओर, विजयपाल की माँ कविता का कहना है कि उनकी तरफ़ से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल नहीं हुआ था, वे आरोप लगाती हैं कि वंदना कटारिया के भाइयों ने उनके घर के बाहर जाति का नाम लेकर मुर्दाबाद के नारे लगाए.

हमने इस बारे में जानकारी हासिल करने के लिए वंदना के रिश्ते के एक भाई से बात की तो उन्होंने माना कि 'हमने भी अभियुक्त के घर के बाहर नारे लगाए थे.'

यही नहीं, उन्होंने एक वीडियो भी दिखाया जिसमें विजयपाल के घर के सामने कुछ लोग नारे लगाते हुए दिख रहे हैं.

हरिद्वार के झबरेड़ा से बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल भी वंदना कटारिया के घर पहुंचे.

इमेज स्रोत, Dhruv Mishra

इमेज कैप्शन, हरिद्वार के झबरेड़ा से बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल भी वंदना कटारिया के घर पहुंचे.

दलित संगठन भी सक्रिय

इसी बीच दलित संगठनों से जुड़े कई लोगों का वंदना कटारिया के घर आने-जाने का सिलसिला जारी है. कई लोग पोस्टर बैनर लेकर वंदना कटारिया के घर उनके समर्थन में नारेबाज़ी करते हुए नज़र आए.

ये लोग नारे लगाते हुए पटाखे फोड़ने वाले लोगों पर देशद्रोह और एनएसए के तहत कार्रवाई की माँग कर रहे थे.

हरिद्वार के झबरेड़ा से बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल भी वंदना कटारिया के घर आए और उन्होंने भी इस मामले पर एससी-एसटी एक्ट के साथ ही देशद्रोह के मामले में भी कार्रवाई किए जाने की बात कही.

बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "उन्होंने इतना घिनौना कार्य किया है, हालांकि यह जाँच का विषय है. कोई बेगुनाह फँसे नहीं, किसी बेगुनाह को जेल नहीं जाना चाहिए, लेकिन जो गुनहगार है वो बचना भी नहीं चाहिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)