बासवराज बोम्मईः कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री, जो येदियुरप्पा के क़रीबी हैं

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
बासवराज बोम्मई कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं.
उन्हें बीएस येदियुरप्पा का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है.
जनता दल सेक्युलर छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए बोम्मई पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के बेटे हैं.

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राज्य में कार्यपालिका के किसी पद पर आने वाले वो किसी मुख्यमंत्री के दूसरे बेटे हैं.
एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक ऐसे पहले मुख्यमंत्री थे.
61 वर्षीय बम्माई उत्तर कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले लिंगायत नेता हैं.

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ऐसे सामने आया बासवराज का नाम
येदियुरप्पा ने विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए बासवराज का नाम सुझाया था.
उनके नाम के एलान से पहले धर्मेंद्र प्रधान और किशन रेड्डी ने कर्नाटक के बीजेपी प्रभारी अरुण सिंह के साथ कोर कमेटी की एक बैठक भी की थी.
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था, "बीएस येदियुरप्पा, आर. अशोक, केएस ईश्वरप्पा, बी. श्रीरामुलु, एसटी सोमशेखर और पूर्णिमा विश्वास ने नए नेता के नाम का प्रस्ताव रखा है. बासवराज बोम्मई विधायक दल के नए नेता और नए मुख्यमंत्री होंगे."

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इस एलान के तुरंत बाद बोम्मई ने येदियुरप्पा का आशीर्वाद लिया और पार्टी के दूसरे नेताओं ने उन्हें बधाई दी.
इसके अलावा बीजेपी के कर्नाटक प्रभारी अरुण सिंह, राज्य प्रमुख नलिन कुमार कटील और राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि समेत कई नेता उपस्थित थे.
अपनी साफ़-सुथरी और ग़ैर-विवादित छवि के लिए जाने जाने वाले बोम्मई को येदियुरप्पा का करीबी सहयोगी माना जाता है.

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सब्र और इंतज़ार की मिसाल है बोम्मई की कहानी
बोम्मई की कहानी एक मिसाल है जो बताती है कि किस्मत कैसे बदल सकती है.
जेडीएस में जब उनकी उम्मीदें ख़त्म हो गई थीं तब उन्होंने कांग्रेस से किसी वरिष्ठ नेता से पार्टी में शामिल होने का संदेश पाने के लिए लगभग एक हफ़्ते तक इंतज़ार किया था.
इसके बाद उन्होंने वेटिंग रूम में बैठकर येदियुरप्पा का इंतज़ार किया. उन्होंने येदियुरप्पा के आवास पर बैठकर भी इंतज़ार किया.
बोम्मई ने तब बीबीसी हिंदी से बताया था, "मैं कुछ कहता नहीं था. मैं बस वहाँ जाकर चुपचाप बैठता था. एक दिन येदियुप्पा को कोई शख़्स चुनाव के टिकट परेशान कर रहा था. तब उन्होंने मेरी ओर इशारा किया और कहा- उन्हें देखिए. वो कितने धैर्य के साथ इंतज़ार कर रहे हैं."
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भावुक येदियुरप्पा ने दिया था इस्तीफ़ा
पिछले आठ महीने से जारी अटकलों के बाद बीएस येदियुरप्पा ने आख़िरकार सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. इसी दिन उनके मुख्यमंत्री पद के दो साल भी पूरे हुए थे.
अपनी सरकार के दो साल पूरे होने पर हुए एक आधिकारिक कार्यक्रम में उन्होंने अपने इस्तीफ़े की घोषणा की थी.
भावुक अंदाज़ में उन्होंने कहा, "मैं दुखी होकर इस्तीफ़ा नहीं दे रहा हूँ, मैं ख़ुशी-ख़ुशी ऐसा कर रहा हूँ."
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 78 वर्षीय येदियुरप्पा का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया था और उनकी अगुआई वाली मंत्रि परिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था.
इसके बाद राजभवन से जारी सूचना में कहा गया था कि अगली व्यवस्था होने तक येदियुरप्पा मुख्यमंत्री की तरह काम करना जारी रखेंगे.

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येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से क्यों हटाया गया?
माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकार में बेटे की दखलंदाज़ी के आरोपों के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा है.
येदियुरप्पा की विदाई के पीछे केंद्र सरकार को दिए गए उनके उस 'इकरारनामे' को भी एक वजह बताया जा रहा है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे ये वादा लिया था कि सत्ता में दो साल पूरे होने के बाद वे पद छोड़ देंगे.
कर्नाटक के सियासी हलकों में ये कहा जा रहा है कि येदियुरप्पा ने उसी 'इकरारनामे' पर अमल पर करते हुए सोमवार को पद छोड़ने का एलान किया और वादा किया कि साल 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को सत्ता में लाने के लिए वे काम करते रहेंगे.
येदियुरप्पा के पद से हटने के कुछ और भी कारण हो सकते हैं लेकिन बड़ी वजह यही लग रही है कि पार्टी विधायक और नव नियुक्त मंत्रियों ने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से सरकार के कामकाज में मुख्यमंत्री के बेटे बीवाई विजेंद्र की दखलंदाज़ी को लेकर शिकायत की थी.
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