'महाराणा प्रताप नहीं अकबर की सेना पीछे हटी थी' अब होगा ये बदलाव- प्रेस रिव्यू

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आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (एएसआई) ने राजस्थान के राजसमंद ज़िले के रक्ततलाई से वो विवादित पट्टी हटा दी है, जिसपर लिखा था कि 1576 में हल्दीघाटी की लड़ाई में महाराणा प्रताप की सेना को पीछे हटना पड़ा था.
इसके अलावा हल्दीघाटी-खमनेर के मार्ग पर स्थित बादशाह बाग़ को मुग़ल शासक अकबर से जोड़ने पर भी आपत्ति जताई गई है.
दो दिन पहले ही संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विवादित शिलापट को हटाने का आदेश दिया था.
इस ख़बर को तमाम बड़े अख़बारों ने प्रमुखता से जगह दी है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह शिलापट गुरुवार को शाम में तीन बजे हटाया गया. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, बाद में चेतक समाधि और हल्दीघाटी से दो और शिलापट हटाये गए.
कहा गया है कि इनपर लिखी बात और फ़ॉन्ट का आकार, एएसआई के प्रारूप के हिसाब से नहीं थे.

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इन शिलापटों को लेकर राजसमंद से बीजेपी सांसद दिव्या कुमारी ने भी आपत्ति जताई थी.
जोधपुर क्षेत्र के एएसआई अधिकारी बिपिन चंद्र नेगी ने अख़बार से कहा है कि गुरुवार को इन शिलापटों को हटाया गया. उन्होंने कहा, ''1975 में जब इंदिरा गाँधी इन इलाक़ों में आई थीं तब चेतक समाधि, बादशाह बाग़, रक्ततलाई और हल्दीघाटी में ये पट्टियाँ लगाई गई थीं. उस वक़्त ये स्मारक केंद्र की देखरेख में नहीं आते थे. इन ठिकानों को 2003 में राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित किया गया था, लेकिन इन शिलापटों पर ये सूचनाएँ नहीं थीं. लंबे समय के कारण ये पुराने पड़ गए थे. इसके साथ ही तारीख़ और तथ्य को लेकर विवाद भी थे.''
नेगी ने कहा, ''इतिहास के जानकारों और जनता के प्रतिनिधियों से इन शिलापटों को हटाने के लिए कई अनुरोध आये थे. इन्हीं को देखते हुए, मैंने स्वतः संज्ञान लिया. पुराने शिलापटों पर एएसआई का नाम तक नहीं था. हमारे मुख्यालय से संस्कृति मंत्रालय ने भी इस मुद्दे को उठाया था. अब नये शिलापट पुष्ट ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर होंगे.''

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रक्ततलाई का जो शिलापट हटाया गया है, उस पर लिखा था, ''रक्त तलाई जिसे बोलचाल की भाषा में ख़ून की तलाई भी कहते हैं, बनास के दूसरे किनारे की ओर एक चौड़ा मैदान है. यहाँ शाही और प्रताप की सेना के बीच घमासान युद्ध हुआ था. इस युद्ध का नेतृत्व महाराणा प्रताप एवं मानसिंह घोड़े और हाथी पर सवार होकर क्रमशः कर रहे थे. युद्ध इतना भयंकर था कि संपूर्ण मैदान लाशों से भर गया था. ऐसी स्थिति में प्रताप की सेना को पीछे हटना पड़ा और युद्ध 21 जून, 1576 को समाप्त हो गया.''
उदयपुर में मीरा गर्ल्स कॉलेज के असोसिएट प्रोफ़ेसर चंद्र शेखर शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि पुराने शिलापटों को लेकर उन्होंने एएसआई से शिकायत की थी.
शर्मा ने कहा, ''जयंती पर मैंने इस मुद्दे को उठाया था. शिलापट पर युद्ध की तारीख़ के साथ राजपूत पीछे हट गए थे, वाली बात तथ्यात्मक रूप से ग़लत है. यह ऐतिहासिक रूप से ग़लत है क्योंकि मुग़लों की सेना पीछे हटी थी. मैं हल्दीघाटी गया था और इसे लेकर युवाओं के साथ सेमीनार भी किया था. इससे पहले मैंने एएसआई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था और उन शिलापटों को हटाने की माँग की थी.''

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पाकिस्तान बस विस्फोट: जाँच के लिए चीनी टीम रवाना
बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कहा है कि वो पाकिस्तान में बस में हुए विस्फोट की जाँच के लिए अपनी एक विशेष टीम भेज रहा है. इस घटना में नौ चीनी इंजीनियरों सहित 13 लोगों की मौत हो गयी थी.
इस घटना में हताहत हुए चीनी नागरिकों की संख्या ने चीन को परेशान कर दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि "चीन संबंधित कार्यों के समन्वय के लिए आज एक संयुक्त कार्यदल पाकिस्तान भेजेगा. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) और चीनी सरकार ने इस घटना पर ग़ौर किया है और नेताओं ने घायलों को बचाने और बाद की समस्याओं के हल के लिए तुरंत महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं."
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी कर्मियों की सुरक्षा के संबंध में जोखिम का गहन मूल्यांकन किया गया है.
इस घटना को लेकर दोनों क़रीबी सहयोगियों की अलग-अलग धारणा है. पाकिस्तान का कहना है कि गैस का रिसाव होने से विस्फोट हुआ, वहीं चीन ने इसे हमला बताया.
घटना के संबंध में दोनों देशों के अलग-अलग विचारों तथा चीनी नागरिकों को पाकिस्तान द्वारा दी जा रही सुरक्षा के बारे में पूछे जाने पर झाओ ने कहा, "हमने पाकिस्तान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की टिप्पणी पर ग़ौर किया है. घटना की जाँच अभी चल रही है और चीन पाकिस्तान के साथ सहयोग करेगा और संयुक्त रूप से घटना की जांच करेगा."
यह घटना ख़ैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अपर कोहिस्तान ज़िले के डासू इलाके में हुई, जहाँ चीनी इंजीनियर और निर्माण श्रमिक एक बांध बनाने में पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं. यह बांध 60 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा है.
चीनी इंजीनियरों और श्रमिकों को ले जा रही बस में विस्फोट होने से नौ चीनी नागरिकों और फ्रंटियर कोर के दो सैनिकों सहित कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं 39 अन्य लोग घायल हो गए थे. ख़बरों के अनुसार, धमाके के बाद बस गहरी खाई में गिर गई थी.

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बच्ची को बचाने के दौरान कुएं में गिरे 30 से ज़्यादा लोग, 4 की मौत
हिन्दी अख़बार अमर उजाला ने मध्य प्रदेश में हुए एक दर्दनाक हादसे को प्रमुखता से जगह दी है जिसमें एक बच्ची को बचाने के दौरान 30 से ज़्यादा लोग कुएं में गिर गये और इनमें से चार की मौत हो गई.
अख़बार ने लिखा है कि मध्यप्रदेश के विदिशा ज़िले के गंजबासौदा में गुरुवार रात को कुएं में फिसलकर गिरी एक बच्ची को बचाने के लिए कुएं की मेड़ पर खड़े 30 से अधिक लोग अचानक मिट्टी धंसने से कुएं में गिर गए और मलबे में दब गए.
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, मगर चार लोगों की इस हादसे में मौत हो गई और क़रीब 10 लोग अब भी लापता हैं.
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना की उच्चस्तरीय जाँच कराने के निर्देश दिये हैं.
उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजन को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि घायलों का मुफ़्त इलाज भी किया जाएगा.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात क़रीब 11 बजे बचाव कार्य में लगा एक ट्रैक्टर भी इस कुएं में गिर गया, जिससे चार पुलिसकर्मियों सहित कुछ लोग भी इस कुएं में गिर गए थे. इनमें से तीन पुलिसकर्मियों एवं कुछ अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

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व्हॉट्सऐप ने भारत में बैन किये 20 लाख अकाउंट
हिन्दुस्तान अख़बार लिखता है कि व्हॉट्सऐप ने भारत में अपनी मासिक रिपोर्ट के पहले संस्करण में बताया है कि उसने भारत के लोगों के 20 लाख से ज़्यादा व्हॉट्सऐप अकाउंट्स को बैन कर दिया है.
ये रिपोर्ट नये आईटी नियमों के लागू होने के बाद जारी की गई है. नये नियमों के तहत सोशल मीडिया
कंपनियों को हर महीने कम्प्लयांस रिपोर्ट जारी करनी होगी. अपनी रिपोर्ट में, फ़ेसबुक के स्वामित्व वाले इस मैसेजिंग ऐप ने बताया कि उसने 15 मई 2021 से 15 जून 2021 के बीच भारत में कुल 2 मिलियन यानी 20 लाख व्हाट्सऐप अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया है.
कंपनी ने कहा है कि इनमें 95 प्रतिशत से अधिक प्रतिबंध ऑटोमेटेड मेसेज, बल्क मैसेजिंग या स्पैम मेसेज का ग़लत उपयोग करने वाले लोगों पर लगाया गया है.
बताया गया है कि दुनियाभर में व्हाट्सऐप ने इस महीने क़रीब 80 लाख अकाउंट्स को बैन किया है.
कंपनी ने ये भी कहा है कि 2019 के बाद से हर महीने बैन होने वाले खातों की संख्या में काफ़ी वृद्धि हुई है, क्योंकि कंपनी ने अपने सिस्टम को अपग्रेड किया है जिसकी वजह से ऑटोमेटड मेसेज, बल्क मैसेजिंग भेजने वालों को आसानी से पकड़ा जा रहा है.
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