कोरोना की दूसरी लहर में भारतीयों के लिए दुआएं कर रहे थे पाकिस्तानी: स्टडी

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, गीता पांडे
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों की झलक सोशल मीडिया पर दिखना कोई आश्चर्य की बात नहीं.

लेकिन अप्रैल महीने के अंत में जब भारत कोरोना महामारी की दूसरी लहर में घिरा था, तब सीमा पार के लोग भी #IndiaNeedsOxygen और #PakistanStandsWithIndia के साथ सोशल मीडिया पर भारत के लिए दुआएं माँग रहे थे.

हालांकि जानकारों का कहना है कि समर्थन में दिखने वाले हैशटैग के साथ ज़रूरी नहीं कि सकारात्मक ट्वीट ही किया गया हो.

कई यूज़र इन्हें 'हाईजैक' कर इनका इस्तेमाल ट्रोलिंग से लेकर किसी क्रिकेटर या बॉलीवुड स्टार को जन्मदिन की बधाई देने के लिए भी करते हैं.

लेकिन आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस की मदद से की कई एक स्टडी में पता चला है कि 21 अप्रैल से लेकर 4 मई तक किये गए ऐसे ज़्यादातर ट्वीट्स में सकारात्मक बातें थीं.

कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के आशिकर ख़ुदाबख्श के नेतृत्व में मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर - दया, सहानुभूति और एकजुटता दर्शाने वाले ट्वीट पहचानने के लिए एक शोध किया गया.

शोधकर्ताओं ने इनके टेक्स्ट को 'होप सर्च क्लासिफ़ायर' में डाला जो भाषा में सकारात्मकता को समझने में मदद करता है.

ये टूल 'शत्रुता कम करने वालीं सकारात्मक बातें' या प्रार्थना, सहानुभूति, संकट और एकजुटता जैसे शब्दों की पहचान करता है.

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

सकारात्मक ट्वीट की संख्या अधिक

उनकी स्टडी में सामने आया कि इस दौरान पाकिस्तान से शुरू होने वाले समर्थन वाले ट्विट्स की संख्या समर्थन नहीं करने वाले ट्विट्स की संख्या से बहुत अधिक थी. साथ ही ऐसे ट्विट को ज़्यादा लाइक और रिट्विट भी मिले.

उनके टूल की मदद से पॉज़ीटिव ट्वीट को फैलाने में भी मदद मिलती है.

वीडियो कैप्शन, कोरोना होने के बाद नींद कम क्यों आ रही?

खुदाबख्श कहते हैं, "हमारी रिसर्च से पता चला कि लोग अपनी भावनाओं को कैसे प्रकट करते हैं. इनमें एक समानता है. अगर आप खोजना शुरू करें तो 44 प्रतिशत से अधिक आपको पॉज़िटिव ट्वीट मिलेंगे."

अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में, जब भारतीय अस्पतालों में बिस्तर ख़त्म होने लगे, लोग ऑक्सीजन की तलाश में मरने लगे और चौबीसों घंटे अंतिम संस्कार की चिताएं जल रही थीं, तब सीमा पार के लोग समर्थन और एकजुटता की बातें कर रहे थे.

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

'सीमा पार घटनाओं का होता है असर'

लाहौर में इतिहास पढ़ाने वालीं प्रोफ़ेसर आरिफ़ा ज़ेहरा कहती हैं कि एक कारण ये भी हो सकता है कि पाकिस्तान में भी कोरोना का प्रकोप गंभीर होता जा रहा था.

"यहाँ भी स्थिति बहुत ख़राब थी, हमारी उम्मीदें धूमिल होती जा रही थी. हमारा दुश्मन एक था, हमारी सीमाएं इतनी क़रीब हैं कि उस पार जो कुछ भी होता है उससे हम प्रभावित होते हैं."

प्रोफ़ेसर ज़ेहरा कहती हैं कि उन सभी सकारात्मक संदेशों को देखकर मुझे एक गर्मजोशी का एहसास हुआ. यह सबसे बड़ा आश्वासन था कि हम अभी भी इंसान हैं.

"महामारी सीमाओं को नहीं पहचानती, चाहे वे भौगोलिक हों या वैचारिक. और जब काले बादल मंडरा रहे हों, तो साथ प्रार्थना करने में कोई बुराई नहीं है."

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

ऐसा ही पाकिस्तानी ट्विटर यूजर्स ने किया

एक यूज़र ने लिखा, "हमारी प्रार्थनाएं और हमारी संवेदनाएं आपके साथ हैं. हम दुश्मन नहीं पड़ोसी हैं."

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

एक और यूज़र ने लिखा, "हम पड़ोसी हैं, दुश्मन नहीं. हम प्रतिद्वंद्वी हैं, विरोधी नहीं. हमारी सीमाएँ हैं, लेकिन वो हमारे दिल में नहीं हैं."

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

तीसरे ने ट्वीट किया, "हमारे पड़ोस में ऐसी स्थिति देखकर बुरा लग रहा है. पाकिस्तान से प्यार और प्रार्थना भेजें. अल्लाह इस महामारी से निपटने में मानवता की मदद करें."

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

खुदाबख्श कहते हैं कि सकारात्मक संदेशों को पहचानने और बढ़ाने का उनका तरीका लोगों के मनोबल को बढ़ाने और समुदायों और देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.

"जब कोई देश किसी महामारी के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट से गुज़र रहा है, तो उम्मीद जगाने वाले शब्द दवा से कम नहीं और इस दौरान आखिरी चीज़ जो आप देखना चाहते हैं, वो है नकारात्मकता."

"ऐसे कई अध्ययन हैं जो बताते हैं कि यदि आप बहुत अधिक अभद्र भाषा या नकारात्मक सामग्री के संपर्क में हैं, तो आप इससे प्रभावित होते हैं."

हेट स्पीच से निपट सकती है तकनीक

उनका कहना है कि इस तरीक़े का इस्तेमाल हेट स्पीच का मुक़ाबला करने के लिए किया जा सकता है.

"एक नकारात्मक माहौल में, जैसे कि जंग के समय या किसी स्वास्थ्य संकट के दौरान, कंटेंट को रोकने से बेहतर है कि आप उनके सकारात्मक पहलुओं को बढ़ावा दें. ये आपको विश्वास दिलाएगा कि दूसरी तरफ़ के लोगों में भी संवेदनाएं हैं."

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: क्यों हो रहे हैं डॉक्टरों पर हमले?

लेकिन अगर टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल इसके बिल्कुल उलट काम के लिए किया जाने लगे, यानी अच्छी बातों को सेंसर करने के लिए तो क्या होगा?

खुदाबख्श कहते हैं कि इंटरनेट पर किसी भी तरह की स्पीच फ़िल्टरिंग की जा सकती है.

"अच्छे कंटेट को सेंसर करने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए ऐसी किसी तकनीक के उपयोग से पहले सावधानी बरतने की ज़रूरत है. हालांकि, हमारा काम एक बेहतरीन सिस्टम बनाना है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)