'ज़ोर-ज़बरदस्ती और बलात्कार': मेरे योग स्कूल की जांच-पड़ताल

इशलीन कौर
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    • Author, इशलीन कौर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन

चेतावनी: इस लेख में यौन शोषण का ग्राफ़िक विवरण है.

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मैं दुनिया के सबसे बड़े योग संस्थानों में से एक "शिवानंद" के साथ एक योग शिक्षिका के तौर पर उस समय तक जुड़ी रही जब तक कि मुझे एक सोशल मीडिया पोस्ट ने परेशान नहीं कर दिया. इस पोस्ट ने संस्थान में दशकों से जारी यौन शोषण के कई आरोपों को सबके सामने ला दिया.

जब मैं अपनी उम्र के दूसरे दशक के बीच में थी, मेरा परिचय योग से हुआ और ये मेरे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया. कई समर्पित योगियों की तरह, ये मेरे लिए सिर्फ़ एक व्यायाम नहीं था, बल्कि जीवन जीने का एक तरीक़ा था. मैंने अपने स्थानीय शिवानंद सेंटर में सिर्फ़ योग सिखाया ही नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से वहां खाना भी बनाया और यहाँ तक कि सफ़ाई भी की. शिवानंद की शिक्षाओं ने मेरे अस्तित्व के हर पहलू को प्रभावित किया.

इस रिपोर्ट के आख़िरी हिस्से में जाकर,आपइस सीरिज़ के सातों एपिसोड सुन सकते हैं.

लेकिन फिर 2019 के दिसंबर महीने में, मुझे अपने फ़ोन पर एक नोटिफ़िकेशन मिला. यह पोस्ट मेरे शिवानंद फ़ेसबुक ग्रुप में संस्थापक स्वर्गीय स्वामी विष्णुदेवानंद के बारे में थी.

जूली साल्टर नाम की एक महिला ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विष्णुदेवानंद ने कनाडा के शिवानंद मुख्यालय में उनका तीन साल तक यौन शोषण किया था.

उन्होंने लिखा कि दशकों बाद जब आख़िरकार उनमें हिम्मत आई तब उन्होंने इसे शिवानंद प्रबंधन बोर्ड को बताया. लेकिन उनकी "प्रतिक्रियाएँ मौन से शुरू होकर मौन करने के प्रयास तक रहीं."

मैंने अब तक उन 14 महिलाओं का साक्षात्कार किया है, जिन्होंने वरिष्ठ शिवानंद शिक्षकों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है. इनमें से कई महिलाओं ने इस बारे में अपने परिवार और यहाँ तक कि अपने दोस्तों को भी नहीं बताया है. सिर्फ़ एक ने इसे सार्वजनिक किया. मैंने एक पूर्व स्टाफ़ सदस्य से भी बात की, जिनका कहना है कि उसकी चिंताओं का शिवानंद बोर्ड ने संज्ञान नहीं लिया.

मेरी पड़ताल ने इस संगठन के भीतर सत्ता और अधिकार के दुरुपयोग के दावों को उजागर किया है जिसे मैं कभी अपने बेहद क़रीब मानती थी.

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शिवानंद योग क्या है?

  • शिवानंद शास्त्रीय योग का एक रूप है जो शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य दोनों पर ज़ोर देता है.
  • स्वामी विष्णुदेवानंद ने 1959 में कनाडा के मॉन्ट्रियल में इसे स्थापित किया और नामकरण अपने गुरु स्वामी शिवानंद के नाम पर किया.
  • दुनिया भर के 35 देशों में लगभग 60 शिवानंद आश्रम और केंद्र हैं और प्रशिक्षित शिवानंद शिक्षकों की संख्या लगभग 50,000 हैं.

मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है, भारत के केरल में स्थित शिवानंद आश्रम में अपना पहला दिन, जहां मैंने 2014 में एक योग शिक्षिका के रूप में प्रशिक्षण लिया था.

दीवार पर शिवानंद के संस्थापक स्वर्गीय स्वामी विष्णुदेवानंद की एक शानदार तस्वीर सजी थी.

  • गुरू - ये बीबीसी इनवेस्टीगेशन है, और इसे प्रोड्यूस किया है लुईस अदामो ने. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का पॉडकास्ट सुनने के लिए क्लिक करें.

ये वही व्यक्ति हैं जिनका पर्दाफाश जूली ने किया.

उनकी शिक्षाएँ इतनी प्रभावशाली थीं कि कई योगियों ने अपने सभी सांसारिक बंधनों को त्याग दिया और अपना जीवन संगठन को समर्पित कर दिया.

मैं समझ सकती हूँ क्यों? उस वक़्त मैं जीवन के बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुज़र रही थी और शिवानंद से मुझे एक तरह की शांति मिली. आसन या कहें मुद्राओं ने मुझे शारीरिक शक्ति दी और शिवानंद के कर्म, सकारात्मक सोच और ध्यान के सिद्धांतों ने मेरी आत्मा को तृप्त किया.

केरल के शिवानंद आश्रम में इशलीन

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2015 में मैंने एक ऐसे व्यक्ति से शादी की जो कि लंदन में रहते हैं. मैं उनके साथ वहाँ रहने के विचार से तब तक घबराती रही जब तक मुझे इस बात का पता नहीं चला कि पुटने में एक शिवानंद सेंटर है. ये हमारे नए घर से ज़्यादा दूर नहीं था.

मेरे पति अक्सर मज़ाक़ किया करते, कि मेरा पहला प्यार शिवानंद सेंटर है ना कि वो ख़ुद.

केरल अश्रम में स्टेज पर इशलीन

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जूली साल्टर की फ़ेसबुक पोस्ट के दो महीने बाद, शिवानंद बोर्ड के दो सदस्य यूरोप से पुटने में काम करने वाले कर्मचारियों से बात करने के लिए आए. तब मुझे उम्मीद थी कि वो मेरे दिमाग़ में घूम रहे तमाम सवालों में से कम से कम कुछ सवालों का जवाब तो ज़रूर देंगे. लेकिन उनका जवाब अस्पष्ट था, और वो सवाल और जवाब के दौरान बचाव की मुद्रा में नज़र आए.

मैं जानती थी कि इसके लिए मुझे ख़ुद ही जूली से बात करनी पड़ेगी.

मूल रूप से न्यूज़ीलैंड की रहने वाली जूली उस वक्त सिर्फ़ 20 साल की थीं और इसराइल गई हुई थीं, जब उन्हें पहली बार शिवानंद की शिक्षाओं के बारे में पता चला. इसके बाद वह जल्द ही इस जीवन यात्रा में शामिल हो गईं और 1978 में कनाडा स्थित शिवानंद के मुख्यालय आ गईं.

विष्णुदेवानंद वहीं रहते थे और जूली को उनका निजी सहायक बनने के लिए कहा गया. शुरुआत में जूली ने इसे एक विशेषाधिकार माना.

जूली साल्टर

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लेकिन वो कहती हैं कि उनकी दिनचर्या बड़ी कठिन थी. जूली तड़के 5 बजे से लगभग आधी रात तक, हफ्ते के सातों दिन- बिना किसी वेतन के काम करती रहीं. जूली बताती हैं कि स्वामी विष्णुदेवानंद ऐसे हो गए थे जिनके स्वभाव के बारे में अनुमान नहीं लगाया जा सकता था. वो अक्सर उन पर चिल्लाया करते थे.

जूली ने मुझे बताया, "निश्चित रूप से, मेरी सीमाएँ टूटती जा रही थीं."

इसके बाद की घटनाओं ने निराशाजनक मोड़ ले लिया.

एक दिन जब जूली विष्णुदेवानंद के घर पर काम कर रही थीं, तो उसने देखा कि विष्णुदेवानंद लेटे हुए भक्ति संगीत वाले टेप सुन रहे थे. विष्णुदेवानंद ने जूली को अपने बगल में लेटने को कहा. जब जूली ने पूछा कि उन्हें समझ में नहीं आया कि वो चाहते क्या हैं, तो विष्णुदेवानंद ने कहा, ये "तंत्र योग" है, एक ऐसा योगाभ्यास जो आध्यात्मिक सेक्स से जुड़ा हुआ है. इसका सीधा अर्थ है गहन विश्राम के ज़रिए आध्यात्मिक ज्ञान की ओर बढ़ना.

जूली कहती हैं कि विष्णुदेवानंद ने प्रवचन के दौरान केवल सिद्धांत रूप में इसका ज़िक्र किया था.

"मैंने कहा कि 'मैं समझी नहीं', लेकिन शरीर और दिमाग़ के 'मना' करने के बावजूद मैं लेट गई. और फिर यौन संपर्क हुआ. इसके बाद, मैं फिर से नीचे काम कर रही थी. मैं बेहद शर्मिंदा थी, साथ ही पीड़ा, आत्मग्लानि और अपराधबोध भी था. "

जूली का कहना है कि उनके साथ तीन साल से भी ज़्यादा समय तक कई तरह की सेक्स गतिविधियां की गईं, और इसमें बाक़ायदा सेक्स भी शामिल था.

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गुरू-शिष्य के बीच के संबंध को योग में गुरू-शिष्य परंपरा के रूप में जाना जाता है.

ये एक तरह का अनकहा समझौता है जिसका मतलब है अनुयायी गुरू की इच्छा के प्रति समर्पित रहेगा.

विष्णुदेवानंद ने जो कुछ जूली के साथ किया, उसे अब वो 'बलात्कार' मानती हैं, क्योंकि विष्णुदेवानंद की सत्ता और आभा के सामने उनकी सहमति और असहमति बेमानी थी.

"मैं काफ़ी अलग-थलग थी, मैं अपने परिवार से दूर दुनिया के दूसरे छोर पर रह रही थी. मैं आर्थिक रूप से संगठन पर निर्भर थी."

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दूसरी महिलाएं भी आईं सामने

इसके बाद मैंने उन दो महिलाओं से बात की, जिन्होंने जूली की फ़ेसबुक पोस्ट पर मिनटों में ही प्रतिक्रिया दी थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाए थे कि विष्णुदेवानंद ने उनका भी शोषण किया.

पामेला ने मुझे बताया कि विष्णुदेवानंद ने 1978 में लंदन के विंडसर कैसल में एक रिट्रीट के दौरान उनका रेप किया.

वो उस समय विश्राम की गहरी अवस्था में थीं, योग में इसे शव आसन के रूप में जाना जाता है.

ल्यूसील का कहना है कि विष्णुदेवानंद ने 70 के दशक के मध्य में कनाडा के आश्रम में उनका तीन बार बलात्कार किया. वह कहती हैं कि पहली दो बार तो तंत्र योग के नाम पर मैंने इसे माना, लेकिन तीसरी बार जब उसने पैसे दिए तब उन्हें "वेश्या की तरह" महसूस हुआ.

विष्णुदेवानंद की मौत 1993 में हुई, लेकिन जूली को संगठन छोड़ने की हिम्मत जुटाने में और 6 साल लग गए.

उनकी एक मात्र उम्मीद है कि सबके सामने अपनी आपबीती रखने से वो अन्य लोगों को उन पीड़ाओं से बचा सकेंगी, जो उन्होंने ख़ुद सही हैं. क्योंकि जैसा कि मुझे पता चला कि भले ही विष्णुदेवानंद की मौत हो चुकी हो, लेकिन शिवानंद भक्तों के साथ हो रहा शोषण उनकी मौत के साथ ही ख़त्म नहीं हुआ. जूली की फ़ेसबुक पोस्ट ने समस्याओं का पिटारा खोल दिया.

विष्णुदेवानंद के साथ जूली

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11 महिलाओं ने सुनाई आपबीती

मैंने 11 महिलाओं से बात की है जिन्होंने दो अन्य शिवानंद के शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बीबीसी का मानना है कि इनमें से एक व्यक्ति अभी भी संगठन में सक्रिय है.

इनमें से एक चौंकाने वाला आरोप 'मैरी' (बदला हुआ नाम) ने लगाया. मैरी का कहना है कि एक टीचर ने उन्हें कई सालों तक ग्रूम किया. इस व्यक्ति का नाम हम क़ानूनी वजहों से नहीं ले सकते. मैरी कहती हैं कि जब उनका रिश्ता यौन संबंध वाला बन गया तो वह वास्तव में उलझन में थीं, लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं था.

साल भर से अधिक समय तक उन दोनों के बीच किसी तरह का यौन संबंध नहीं था, लेकिन मैरी को याद है कि उस साल के बाद एक बार ये व्यक्ति बिना बुलाए चुपचाप उनके कमरे में आया, ऊपर चढ़ा, सेक्स किया और बिना एक शब्द बोले चला गया.

पांच अन्य महिलाओं ने मुझे बताया कि इसी व्यक्ति ने उनका भी यौन शोषण किया. ये महिलाएं एक-दूसरे को नहीं जानती हैं, लेकिन इनकी कहानियां एक जैसी हैं. इनका तरीक़ा भी एक जैसा है, पहले ग्रूम करना यानी बढ़ावा देना और फिर शोषण.

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17 साल की आयु में यौन शोषण

'कैथरीन' (बदला हुआ नाम) 80 के दशक में कनाडा में शिवानंद के बच्चों के शिविर में हिस्सा ले रहीं थीं, उस वक्त वो सिर्फ़ 12 साल की थीं जब एक शिक्षक ने उनमें यौन रुचि लेनी शुरू की. कैथरीन बताती हैं कि वो व्यक्ति उनकी मालिश करता और उनके हिप्स को भी छूता.

जब वह 15 साल की हुईं तो उसने उन्हें और ज़्यादा छूना शुरू कर दिया. वो पैरों के बीच हाथ डाल देता और ब्रेस्ट को पकड़ लेता.

वो बताती हैं कि आख़िरी बार उसने उनका तब यौन शोषण किया जब वह 17 साल की थीं. वो उस समय झपकी ले रही थीं और जब जगीं तो उसे अपने ऊपर पाया. इस घटना के बाद कैथरीन ने आश्रम छोड़ दिया.

शिकायत करने वाली एक अन्य महिला का कहना है कि हाल ही में 2019 में उसी व्यक्ति ने उनका भी यौन शोषण किया था.

हमने इस व्यक्ति से संपर्क किया और जवाब देने का मौका दिया, लेकिन उसने हमारे आरोपों का जवाब नहीं दिया. बीबीसी का मानना है कि यह व्यक्ति अभी भी भारत में शिवानंद में सक्रिय है, हालांकि संगठन इस बात से इनकार करता है.

एक और शिक्षक हैं जिन पर शोषण के आरोप लगे हैं, उनका असली नाम मौरिज़ियो फिनोची हैं, इन्हें स्वामी महादेवानंद के नाम से भी जाना जाता है. मैंने आठ महिलाओं से बात की है जिन्होंने उन पर आरोप लगाए हैं.

इनमें से एक हैं वेंडी. 2006 में वेंडी कनाडा के मुख्यालय में महादेवानंद की निजी सहायिका थीं.

उसका एक काम ईमेल का प्रिंट आउट लेकर उनके केबिन में ले जाना था. एक दिन, महादेवानंद ने ईमेल और नाश्ता लाने के लिए वेंडी को अपने बेडरूम में बुलाया. यहाँ वह बिस्तर पर थे.

वेंडी बताती हैं कि जैसे ही उसने ट्रे दी, महादेवानंद ने उनकी बांह पकड़ ली. इसके बाद उन्होंने उस चादर को हटा दिया, जिसके नीचे वो हस्तमैथुन कर रहे थे. वह कहती हैं कि महादेवानंद फिर उनकी बांह पर स्खलित हो गए.

"और मैंने बस ये महसूस किया ... कि मैं उनके लिए इंसान थी ही नहीं. और ये घटना शिवानंद से मेरे नाते के अंत की शुरुआत थी."

वेंडी कहती हैं कि अगर महिलाएं अपनी चिंताएं जैसे कि कुछ मामलों में आपराधिक व्यवहार जैसी रिपोर्ट सीनियर स्टाफ़ को बतातीं तो स्टाफ़ इन्हें आध्यात्मिक शिक्षा के नाम पर इसे "गुरु की कृपा" कह कर समझा देता.

"अगर कोई समस्या है या कोई भ्रम की स्थिति है, और यहाँ मैं प्रशासनिक चीज़ों के बारे में भी बात कर रही हूँ....लेकिन निश्चित तौर पर यौन संबंधों और संदिग्ध संबंधों के बारे में.. तो आपको समझाया जाएगा कि नहीं, सच्चाई ये है कि आपकी ये समस्या वास्तविकता में 'गुरू की कृपा' है."

"और आपको एक मूल्यवान सबक़ सिखाया जा रहा है"

हमने महादेवानंद से संपर्क किया ताकि उन्हें अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने का मौक़ा मिल सके, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला.

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हालाँकि, बीबीसी ने एक वकील को भेजे गए एक ईमेल की कॉपी देखी है, जिसमें उन्होंने अपने "कुकर्मों" के लिए माफ़ी मांगी है और वादा किया है कि वो इसे "फिर से ना दोहराने का प्रयास" करेंगे.

प्रोजेक्ट 'सत्य' को शिवानंद समुदाय के फ़ेसबुक समूह द्वारा क्राउडफंड किया गया है, जिसकी मैं भी सदस्य हूँ.

एक और बात जो मैं समझना चाहती थी कि शिवानंद के प्रबंधन को पहले से ही इस बारे में कितनी जानकारी थी?

जूली ने मुझे बताया कि आख़िरकार 2003 में उनमें हिम्मत आई और उन्होंने अपने साथ हुए शोषण को रिपोर्ट किया. उन्होंने संस्थान के कार्यकारी सदस्यों के बोर्ड (ईबीएम) के एक सदस्य के साथ मुलाकात की.

ईबीएम का गठन विष्णुदेवानंद ने किया था ताकि उनकी मृत्यु के बाद शिवानंद के कामकाज को संभाला जा सके. जूली बताती हैं कि बोर्ड के जिस सदस्य से उन्होंने मुलाक़ात की वो स्वामी महादेवानंद थे.

"हम कुछ ही देर के लिए मिले, लेकिन मूल रूप से उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इसके बारे में वर्षों से मालूम था."

स्वामी महादेवानंद उन दूसरे शिक्षकों में से एक हैं जिन पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं, लेकिन उस वक्त जूली को इसकी जानकारी नहीं थी.

जूली बताती हैं कि अगले कुछ हफ्तों के दौरान उन्होंने बोर्ड के चार अन्य सदस्यों को अपने आरोपों के बारे में बताया था.

हालांकि ट्रस्टी इस बात से इनकार करते हैं कि उन्होंने 2003 में जूली के साथ आरोपों पर चर्चा की थी. लेकिन बीबीसी ने महादेवानंद का एक ईमेल देखा है जिसमें उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि वह उस वक्त जूली से मिले थे. महादेवानंद ने इसे अनौपचारिक मुलाकात बताया, लेकिन कहा कि इसके बाद आरोप "सबके सामने" आ गए.

2006 में जूली ने एक मध्यस्थ की मदद से ईबीएम के साथ एक बैठक की. इस बैठक में जूली के लिए किसी तरह की आर्थिक मदद मुहैया कराने को लेकर चर्चा हुई. बैठक में शोषण के आरोप भी उठाए गए.

बोर्ड के ट्रस्टियों ने बीबीसी को जानकारी दी कि दोनों पक्ष उस समय चर्चा के नतीजों से खुश थे, लेकिन जूली का कहना है कि कुछ भी तय नहीं हुआ था. इसलिए अगले साल जूली के वकील ने बोर्ड को पत्र लिखकर मुआवज़े की मांग की और हर्जाने के लिए दावा करने की धमकी दी.

जवाब में, उन्हें ईबीएम के वकील की एक चिट्ठी मिली जिसमें उनसे सवाल किया गया कि जूली कथित शोषण के मामले को इतने लंबे समय बाद क्यों उठा रही हैं.

शिवानंद का कहना है कि जूली के साथ हुई बैठक के बाद उन्होंने सदस्यों और मेहमानों के लिए प्रोटोकॉल लागू करना शुरू कर दिया ताकि हर किसी को इस तरह के आरोपों के बारे में खुल कर कहने के लिए सुरक्षित माहौल मिल सके.

हमने उनसे सवाल किया कि वो उस व्यक्ति का सम्मान करना कैसे जारी रख सकते हैं जिसने उसका यौन शोषण किया. इस पर उनका जवाब था, "शिवानंद संस्थान अपनी विरासत और शिक्षाओं का सम्मान करता है."

जहां तक महादेवानंद का सवाल है, अपनी पड़ताल में हमें इस बात के सबूत मिले हैं कि बोर्ड को उनके कथित यौन आचरण के बारे में 1999 से ही मालूम था. क्योंकि उन्होंने खुद इसे स्वीकार किया था.

उस समय ईबीएम में शामिल एक अमेरिकी महिला स्वामी शारदानंद ने बीबीसी को बताया कि 1998/99 में उन्हें दिल्ली आश्रम की निदेशक ने रोते-रोते फोन किया. निदेशक ने शारदानंद को बताया कि महादेवानंद बिना धोती के घूम रहे थे. शारदानंद ने इसका मतलब समझा कि वो अंडरवियर में थे.

जब शारदानंद ने महादेवानंद को फ़ोन किया, तो उन्होंने बताया कि नहीं, ये सच नहीं था. वह अपने अंडरवियर में भी नहीं बल्कि नंगे थे. और यह उनका एकमात्र रहस्योद्घाटन नहीं था.

"उसने मुझे बताया कि उसने कमर के नीचे कुछ भी नहीं पहना था और वो... उस ऑफिस में गया जहाँ (दिल्ली की निदेशक) काम कर रही थीं और... उनके सामने हस्तमैथुन किया."

स्वामी शारदानंद इससे बेहद परेशान थीं. उन्होंने इस मुद्दे को अगली ईबीएम बैठक में उठाया.

उन्होंने बताया कि बैठक में सभी रिकॉर्डिंग उपकरण बंद कर दिए गए और सचिव को कमरे से बाहर भेज दिया गया.

महादेवानंद वहाँ मौजूद थे और उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि उनका बयान सही था.

"इसके बाद महादेवानंद ने कहा: 'लेकिन अगर वो नहीं चाहती कि मैं ऐसा करूं, तो ठीक है, अब मैं इसे नहीं दोहराऊंगा."

जब शारदानंद ने बोर्ड की बैठक में टोकते हुए सवाल किया कि अब जबकि महादेवानंद ने स्वीकार कर लिया है तो इससे कैसे निपटेंगे तो बोर्ड के एक सदस्य ने जवाब दिया: "ठीक है, उन्होंने मान लिया है कि वह इसे नहीं दोहराएंगे. तो तुम्हें क्या चाहिए? उसका खून?"

कुछ ही महीनों के भीतर ही शारदानंद को एक फैक्स मिला जिसमें लिखा था कि उन्हें बोर्ड से बाहर कर दिया गया है. हमने यह आरोप ईबीएम पर लगाया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

शारदानंद ने जो राज़ खोला, वो शायद उतना हैरान करने वाला मामला न लगे जितना वेंडी ने 2006 में देखा था. तब उन्होंने कनाडा के मुख्यालय में मौजूद एक वरिष्ठ कर्मचारी को बताया था कि महादेवानंद उनके ऊपर स्खलित हो गए थे.

विष्णुदेवानंद अभिनेता पीटर सेलर्स के साथ, वे अक्सर संघर्ष वाली जगहों पर 'शांति की उड़ान' ले जाते थे.

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तो उनकी प्रतिक्रिया थी, "ओह, फिर से नहीं."

स्टाफ़ के एक सदस्य ने उनसे कहा कि चिंता मत करो. संस्थान ने स्वामी महादेवनंद के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था की है.

वेंडी ने मुझे बताया, "मुझे नहीं पता था कि कनाडा में इसे यौन शोषण के दायरे में रखा जाएगा. मुझे उस वक्त इस बात की जानकारी नहीं थी कि इसे पुलिस के पास ले जाया जा सकता है."

तेरह साल बाद, ईबीएम ने आखिरकार महादेवानंद की जांच की और फिर अपनी मासिक पत्रिका में उनके रिटायरमेंट की घोषणा की. एक ऐसा रिटायरमेंट जिसके बारे में उन्होंने स्वीकार किया कि वो महादेवनंद को फंड कर रहे हैं. नोटिस में कहा गया कि कार्यकारी बोर्ड ने उन्हें उनकी "समर्पित और प्रेरणा देने वाली सेवा" के लिए धन्यवाद दिया.

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प्रोजेक्ट सत्य के लिए काम करने वाली वकील कैरल मर्चसिन का कहना है कि उन्होंने 25 से 30 महिलाओं से बात की है जिन्होंने शिवानंद कर्मचारियों के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए हैं.

वो कहती है कि उन्होंने उनमें से हर एक विश्वसनीय है.

कैथरीन के मामले में, वह सवाल करती हैं कि बोर्ड के ट्रस्टियों को जब आरोपों के बारे में पता चल गया तो उन्होंने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी. सालों बाद जब कैथरीन के माता-पिता को इस बारे में पता चला तो उन्होंने बोर्ड का सामना किया. कैरल का कहना है कि उन्हें बताया गया कि सबूत के बिना कुछ भी नहीं किया जा सकता है.

ईबीएम ने हमें बताया है कि जिस शिक्षक पर कैथरीन और अन्य के साथ शोषण करने के आरोप है, उन्हें जांच के दौरान ड्यूटी से निलंबित कर दिया गया है. लेकिन बीबीसी को कई स्रोतों से पता चला है कि यह व्यक्ति अभी भी शिवानंद के भारतीय आश्रमों में काम कर रहा है. जब मैंने खुद केरल आश्रम में फोन किया, तो मुझे पता चला कि इस व्यक्ति ने इसी साल की शुरुआत में वहां एक पूरा पाठ्यक्रम पढ़ाया था.

आश्रम ने जारी किया बयान

ईबीएम ने हमें इंटरव्यू देने से मना कर दिया, लेकिन हमें अपना एक बयान भेजा है जिसे पूरा हम यहां रख रहे हैं.

"बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ उन लोगों से पूरी पूरी सहानुभूति रखता है, जो लोग आगे आए. अगर किसी को लगता है कि उनके ऊपर भी उस आचरण का असर पड़ा है, जिस आचरण की बात कार्यक्रम में की गई है, तो उसे भरोसा दिलाया जाता कि ना तो शोषण को बर्दाश्त किया जाएगा और ना ही अनुचित व्यवहार को नज़रअंदाज़ किया जाएगा. कार्यक्रम में जिन आरोपों की जानकारी दी गई है, उन्हें लेकर भूतकाल में की गई किसी भी तरह की ग़लतियों के लिए बोर्ड स्पष्ट तौर पर खेद जताता है. "

"इन आरोपों के परिणामस्वरुप शिवानंद ऑर्गनाइज़ेशन ने स्वतंत्र जांच बैठा दी है और क़ानूनी विशेषज्ञों को नियुक्त किया है जिन्होंने सुरक्षा संबंधी नीतियों की समीक्षा की, उन्हें लागू करने में मदद की और उपयुक्त ट्रेनिंग दी. जिस किसी को शोषण से जुड़ी कोई दिक्कत हो, उसके लिए शिवानंद ऑर्गनाइज़ेशन ने गोपनीय ढंग से शिकायत करने की व्यवस्था बनाई है. शिवानंद ऑर्गनाइज़ेशन की पूरी प्राथमिकता है कि जो कोई किसी भी कारण इसके संपर्क में आता है, शोषण या कष्ट से उसकी सुरक्षा की जाए. शिवानंद ऑर्गनाइज़ेशन ऐसा मठ है जो भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए समर्पित है और अपने सभी सदस्यों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. "

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वो शिक्षक जिनका हम नाम नहीं ले सकते, उसके बारे में मैंने चार जाँच रिपोर्टें देखी हैं, जिनमें से सभी का निष्कर्ष है कि संभावनाओं को संतुलित करके देखें तो सभी पीड़ित विश्वसनीय हैं और उनके बयान सच्चे हैं और उनमें से दो ने ईबीएम को अपने साथ हुए शोषण के बारे में बताया था.

अप्रैल में मैं उस पुटने आश्रम गई जहां मैंने पिछले पांच साल बतौर एक शिक्षक और भक्त के रूप में बिताए थे, लेकिन इस बार मैं अंदर नहीं गई.

शिवानंद की सभी को आत्मसात करने वाली प्रवृत्ति ने मुझे भी आकर्षित किया था, पर ये इसे इतना ख़तरनाक बना भी बना सकती है मैने नहीं सोचा. जिन महिलाओं से मैंने बात की, उन सभी ने मुझसे कहा कि सच्चाई की भावना को खोना आसान है, जिससे यह सवाल करना मुश्किल हो गया है कि हो क्या रहा है.

और मुझे मालूम है कि हमारी पड़ताल के दौरान जो भी महिलाएं सामने आईं, वो सभी पश्चिमी देशों की हैं लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय महिलाएं भी पीड़ित हैं. मैंने महिलाओं के ईमेल देखे हैं जिसमें उन्होंने बताया है कि उनके साथ क्या घटा, लेकिन वो मुझसे बात करने को लेकर बेहद डरी हुई थीं.

और जहाँ तक मेरी बात है, यह मेरे और शिवानंद के रिश्ते का अंत है.

बीबीसी की इस विशेष प्रस्तुती की प्रोड्यूसर लूईस अदामो हैं.

इस लेख में पीड़ितों द्वारा व्यक्त सभी विचार उनके निजी अनुभव हैं.

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