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पीएम मोदी के फ़ोन के बाद भी क्या मुकुल राय टीएमसी में लौट जाएंगे?
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
क्या चुनाव से पहले टीएमसी से बीजेपी में गए ज़्यादातर नेता अब घर वापसी करने वाले हैं? अब तक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सोनाली गुहा समेत कम से चार नेता तो सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी से माफ़ी मांगते हुए दोबारा पार्टी की सेवा का मौका देने की अपील कर चुके हैं.
लेकिन टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया है कि बीजेपी के दस विधायक और तीन सांसद टीएमसी के संपर्क में हैं. ख़ासकर मुकुल राय की कथित नाराज़गी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उनको फ़ोन किए जाने के बाद बंगाल की राजनीति में कयासों का दौर अचानक तेज़ हो गया है.
इतिहास के खुद को दोहराने वाली कहावत तो पुरानी है. लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह इतिहास इतनी ज़ल्दी ख़ुद को दोहराएगा, इसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी. विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी से बीजेपी में जाने की होड़ मची थी. लगभग हर दिन कोई न कोई नेता बीजेपी में शामिल हो रहा था.
अमित शाह की रैली से लेकर चार्टर्ड विमान से दिल्ली जाकर बीजेपी मुख्यालय में लोग पार्टी की सदस्यता ले रहे थे. अब चुनावी नतीजों के बाद से ही ऐसे नेता वापसी की कोशिशों में हैं.
बाक़ी नेताओं तक तो ठीक था. लेकिन अब मुकुल राय का नाम भी इस सूची में शामिल होने की अटकलों के बाद पार्टी के केंद्रीय नेता अपना कुनबा बचाने में जुट गए हैं.
वैसे, मुकुल राय की घर वापसी का मुद्दा चुनाव नतीजों के तुरंत बाद भी उछला था. तब मुकुल को एक ट्वीट के ज़रिए सफ़ाई देनी पड़ी थी कि वे बीजेपी में थे, हैं और रहेंगे. बीजेपी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा ने भी उनके ट्वीट को रीट्वीट करते हुए मुकुल की सराहना की थी.
लेकिन उनकी घर वापसी के कयास को अचानक बुधवार को उस समय बल मिला जब ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी मुकुल राय की कोरोना संक्रमित पत्नी को देखने अस्पताल पहुँचे.
क्या है मुकुल की शिकायत?
मुकुल और उनकी पत्नी दोनों कोरोना संक्रमित हो गए थे. मुकुल तो ठीक हो गए लेकिन उनकी पत्नी कृष्णा राय बीते महीने से ही कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती है. लेकिन प्रदेश या केंद्र के किसी बीजेपी नेता ने उनकी खैर-ख़बर नहीं ली थी. इससे मुकुल काफ़ी नाराज़ बताए जाते हैं. उन्होंने अपने क़रीबियों से इस बात का ज़िक्र भी किया था.
उसके बाद अभिषेक के अचानक अस्पताल पहुँचने और वहाँ मुकुल के पुत्र शुभ्रांशु राय से मुलाक़ात के बाद बीजेपी में सक्रियता बढ़ी. प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष उसी दिन पहले से एलान कर अस्पताल पहुँचे और अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुकुल को फ़ोन कर पत्नी की ख़ैरियत पूछी.
शुभ्रांशु ने पत्रकारों से कहा, "पार्टी के नेताओं का अस्पताल आना या फ़ोन करना तो सामान्य है. लेकिन विपक्ष में रहते हुए अभिषेक ने यहाँ आकर एक मिसाल कायम की है. वे बचपन से मेरी माँ को जानते हैं और उनको काकी माँ यानी चाची कहते हैं." क्या आप टीएमसी में वापसी की सोच रहे हैं? इस सवाल पर उनका कहना था, "पहले माँ स्वस्थ हो जाए. उसके बाद इन मुद्दों पर विचार किया जाएगा. राजनीति तो चलती रहती है."
राजनीति पर्यवेक्षकों का कहना है कि मुकुल राय जिन उम्मीदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे वह पूरी नहीं हुईं. पहले तो प्रदेश नेतृत्व ने उनको ख़ास तवज्जो नहीं दी. उसके बाद विपक्ष के नेता के चयन का मामला आया तो उनकी जगह हाल में पार्टी में शामिल शुभेंदु अधिकारी को इस पद पर बिठा दिया गया. मुकुल जैसे अनुभवी नेता के लिए यह एक तरह से अपमान था.
यही वजह है कि चुनावों के बाद उन्होंने ख़ुद को राजनीति से लगभग काट लिया है. विधायक के तौर पर शपथ लेने के बाद उनको सार्वजनिक तौर पर किसी कार्यक्रम में नहीं देखा गया है. हालांकि बीजेपी के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "मुकुल दा कोरोना संक्रमित हो गए थे. अपनी और पत्नी की बीमारी की वजह से ही वे इन दिनों सक्रिय राजनीति से अलग-थलग हैं."
अब तक जिन बीजेपी नेताओं ने टीएमसी में वापसी की इच्छा जताई है उनमें सोनाली गुहा के अलावा सरला मुर्मू और दीपेंदु विश्वास के अलावा कई नाम हैं. उत्तर दिनाजपुर के विधायक रहे अमोल आचार्य ने तो सीबीआई के हाथों टीएमसी नेताओं की गिरफ़्तारी के विरोध में बीजेपी से नाता तोड़ लिया है. वह भी टीएमसी में लौटना चाहते हैं.
टीएमसी प्रवक्ता का दावा
हावड़ा ज़िले के डोमजूर में बीजेपी के टिकट पर लड़ कर हारने वाले पूर्व मंत्री राजीव बनर्जी भी चुनाव के बाद राजनीतिक परिदृश्य से गायब हैं. उनको बीजेपी की किसी बैठक या कार्यक्रम में नहीं देखा गया है. टीएमसी के एक नेता बताते हैं, "राजीव ने भी वापसी की गुहार लगाई है."
टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, "बीजेपी में जाने वाले कई नेताओं ने घर वापसी की इच्छा जताई है. बीजेपी के कम से कम 10 विधायक और तीन-चार सांसद भी टीएमसी में शामिल होना चाहते हैं. लेकिन फ़िलहाल इस पर कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है."
दरअसल, टीएमसी का एक गुट ऐसे नेताओं को दोबारा पार्टी में शामिल करने के ख़िलाफ़ है. उनका सवाल है कि अगर बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा होता तो क्या ऐसे नेता टीएमसी में लौटते?
टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, "चुनाव से पहले धोखा देकर बीजेपी का दामन थामने वालों को दोबारा पार्टी में नहीं लिया जाना चाहिए."
लेकिन जानकारों का कहना है कि टीएमसी की शनिवार को होने वाली अहम बैठक में इस मुद्दे पर पर विचार किया जा सकता है. तत्काल नहीं तो कुछ महीनों बाद ऐसे नेताओं की वापसी हो सकती है.
बीजेपी क्या कह रही है?
बीजेपी के किसी नेता ने मुकुल राय के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. बीजेपी बंगाल मामलों के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने न तो फ़ोन उठाया और न ही कोई जवाब दिया है. उनकी टिप्पणी मिलने के बाद इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
लेकिन प्रदेश बीजेपी नेता शमीक भट्टाचार्य ने इसी सप्ताह एनडीटीवी से कहा था, "यह धारणा बनी थी कि टीएमसी सत्ता से बाहर हो जाएगी और बीजेपी सरकार बनाएगी. चुनाव से पहले कई लोग बीजेपी में शामिल हुए और अब वे लौटने की बात कर रहे हैं. लोग यह सब देख रहे हैं. लोगों को मालूम है कि ऐसे नेता पार्टी में क्यों आए थे और अब क्यों जा रहे हैं."
बीजेपी के राज्य प्रवक्ता रीतेश तिवारी कहते हैं, "मुकुल राय पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. फ़िलहाल उनकी पत्नी बीमार हैं. इसलिए प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष समेत दूसरे नेता उनके स्वास्थ्य का हाल जानने अस्पताल गए थे. प्रधानमंत्री ने भी फ़ोन पर उनसे बातचीत की है. बीजेपी एक परिवार है. जहाँ तक अभिषेक के अस्पताल जाने के बाद कयास तेज़ होने का सवाल है, यह तो राजनीति है."
लेकिन सोनाली गुहा समेत बीजेपी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से टीएमसी में लौटने की बात कही है?
इस सवाल पर बीजेपी के राज्य प्रवक्ता रीतेश तिवारी कहते हैं, "इसका जवाब तो उन नेताओं को ही देना चाहिए कि वे आख़िर आए क्यों थे और अब जाने की बात क्यों कर रहे हैं. सोनाली ने ममता के ख़िलाफ़ प्रचार भी किया था."
बीजेपी के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "पूरी चुनावी रणनीति केंद्रीय नेताओं के हाथों में थी. दलबदलुओं को पार्टी में शामिल करने और टिकट देने का फ़ैसला भी उनका ही था. तमाम फ़ैसले दिल्ली से लिए गए. चुनाव के बाद भी जो कुछ हुआ उसमें केंद्रीय नेताओं की भूमिका प्रमुख थी. नतीजों के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने जिस तरह प्रदेश संगठन पर ध्यान देना बंद कर दिया है उससे कई नेताओं का मोहभंग हो रहा है. ऐसे लोग अगर टीएमसी में लौट जाएं तो कोई हैरत नहीं होनी चाहिए."
राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रोफ़ेसर समीरन पाल कहते हैं, "राजनीति में न तो दोस्ती स्थायी होती है और न ही दुश्मनी. ऐसे में मुकुल राय समेत कुछ नेता टीएमसी में लौट ही सकते हैं. टीएमसी में मुकुल की जगह अब भी खाली है. उनको बंगाल की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है."
पाल के मुताबिक, अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति के तहत टीएमसी अगर मुकुल को दोबारा पार्टी में शामिल करती है तो बीजेपी को झटका लगना तय है.
लेकिन लाख टके का सवाल है कि मुकुल क्या करेंगे?
फ़िलहाल तो उन्होंने अपने होठ सिल रखे हैं. लेकिन उनकी चुप्पी और उनके पुत्र के बयानों से पिता-पुत्र की घर वापसी की अटकलें लगातार तेज़ हो रही हैं.
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