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आज़मगढ़ में फ़लस्तीनी झंडा लहराने की अपील करने पर युवक की गिरफ़्तारी
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में फ़लस्तीनियों के समर्थन में गाड़ियों और घरों पर फ़लस्तीनी झंडा लगाने की अपील करने वाले एक युवक को पुलिस ने शनिवार को गिरफ़्तार किया.
यासिर अख़्तर नाम के इस युवक पर आईपीसी की धारा 505 (2) के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया. उन पर दो वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने के आरोप लगाए गए हैं.
हालांकि ये रिपोर्ट लिखे जाने तक उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है.
इस पूरे प्रकरण के बाद यासिर ने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया, उनके परिजनों का कहना है कि गिरफ़्तारी के बाद से यासिर दहशत में हैं और बात नहीं करना चाहते.
आज़मगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बीबीसी से इस प्रकरण की पुष्टि तो की लेकिन किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया.
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में पुलिस अधीक्षक की तरफ से कहा गया है, "घरों और गाड़ी पर फलस्तीनी झंडा लहराने की अपील करने वाले युवक को सोशल मीडिया सेल की सतर्कता से गिरफ़्तार किया गया."
बयान में कहा गया, "सरायमीर एक्सप्रेस नाम से फ़ेसबुक पेज चलाने वाले युवक ने जुमे की नमाज़ के बाद फ़लस्तीनी झंडा लहराने की अपील की थी. सोशल मीडिया सेल ने इस पोस्ट के बारे में तत्काल पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया था. पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार ने सर्विलांस टीम और थाना प्रभारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. इसी क्रम में फ़ेसबुक पेज संचालक यासिर अख़्तर को गिरफ़्तार कर चालान किया गया."
आज़मगढ़ के एसपी के फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए इस बयान पर टिप्पणियों में लिखा गया है. 'बहुत ही सराहनीय कार्य है.' 'नकेल कसना बहुत जरूरी है.' 'ये देश के गद्दार हैं.' वहीं कुछ लोगों ने पूछा है कि इसमें गिरफ्तार करने वाली कौन-सी बात है.
यासिर अख़्तर आज़मगढ़ के सरायमीर के रहने वाले हैं और चप्पल बेचने का काम करते हैं. लॉकडाउन की वजह से वो काम नहीं कर रहे हैं. वो सरायमीर एक्सप्रेस नाम का एक फ़ेसबुक पेज भी चलाते हैं जिस पर पचास हजार से अधिक फॉलोअर हैं.
यासिर अख़्तर के दोस्त और सामाजिक कार्यकर्ता आसिफ़ आरएन ने बीबीसी से कहा, "यासिर ने फ़लस्तीनी झंडा घर-घर और गाड़ियों पर लगाने की अपील की थी. हालांकि उन्होंने बाद में एडिट करके लिख दिया था कि गज़ा में फ़लस्तीनी झंडा गाड़ियों और घर-घर पर लगाने की अपील, लेकिन सवाल ये है कि फ़लस्तीनी झंडा लगाना अपराध कैसे हो गया? अमेरिका में भी फ़लस्तीनियों के समर्थन में हुए प्रदर्शनों में फ़लस्तीनी झंडा लहराया गया, वहां तो कोई गिरफ़्तार नहीं हुआ. दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में ये अपील कैसे अपराध हो गई?"
आसिफ़ कहते हैं, "हम फ़लस्तीनियों के समर्थन में हैं, भारत सरकार ने भी कहीं न कहीं फ़लस्तीनियों के समर्थन में ही अपना बयान दिया है. इस नज़रिए से ये पूरी कार्रवाई पूरी तरह से ग़लत है."
वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता नदीम ख़ान कहते हैं, "फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए किसी को गिरफ़्तार करना बेहद निंदनीय है. हम एक लोकतंत्र हैं और सभी नागरिकों को शांतिपूर्वक विरोध करने और दुनिया में कहीं भी उत्पीड़ित लोगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने का अधिकार है. दुनिया जानती है कि भारत लंबे समय से फ़लस्तीनियों का समर्थक और दोस्त है. भारत में फ़लस्तीनियों का समर्थन करना कभी अपराध नहीं रहा."
नदीम ख़ान कहते हैं, "संयुक्त राष्ट्र और तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत फ़लस्तीनियों के पक्ष और उसके साथ खड़ा होता है और उसका समर्थन करता है. अब या तो उत्तर प्रदेश सरकार की अपनी अलग अंतरराष्ट्रीय नीति है या मुस्लिम देश या मुस्लिम नाम देख कर उत्तर प्रदेश पुलिस सारी नीतियां भूलकर मुस्लिम विरोधी नीति का कार्यक्रम शुरू कर देती है."
हालांकि उत्तर प्रदेश में सक्रिय मानवाधिकार संगठन रिहाई मंच से जुड़े राजीव यादव यासिर की गिरफ़्तारी को एक सुनियोजित कार्रवाई के रूप में देखते हैं.
राजीव कहते हैं, "उत्तर प्रदेश पुलिस ने सिर्फ़ फ़लस्तीनी झंडा लगाने की अपील करने पर एक मुस्लिम युवक को गिरफ़्तार किया है. ये पुलिस के सांप्रदायिक एजेंडे को दिखाता है."
राजीव कहते हैं, "हाल ही में उत्तर प्रदेश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जो संकेत देती हैं कि भले ही ये महामारी का समय है लेकिन सत्ता और प्रशासन अपने सांप्रदायिक एजेंडे पर ही चल रही है. बाराबंकी में मस्जिद तोड़ दी गई, उन्नाव में एक मुसलमान सब्ज़ी विक्रेता युवक को थाने में पीट-पीट कर मार दिया गया और अब आज़मगढ़ में एक मुसलमान युवक को फ़लस्तीनी झंडा फहराने की अपील करने पर गिरफ्तार कर लिया गया. इससे स्पष्ट है कि यूपी सरकार अपने सांप्रदायिक एजेंडे पर चल रही है."
राजीव कहते हैं, "भले ही यासिर को ज़मानत मिल गई. लेकिन संदेश तो यही गया कि यूपी में एक मुसलमान देश फ़लस्तीनियों का समर्थन करने पर एक मुसलमान को गिरफ्तार कर लिया गया. ऐसे बहुत से लोग हैं जो इस तरह की ख़बरों से ख़ुश होते हैं."
इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच हाल ही में 11 दिन चले संघर्ष में 230 से अधिक फ़लस्तीनी और 12 इसराइली नागरिक मारे गए हैं. इस दौरान इसराइल ने गज़ा पर ज़बरदस्त बमबारी की जबकि हमास ने ग़ज़ा से इसराइल पर चार हज़ार से अधिक रॉकेट दागे हैं. शुक्रवार को ही इसराइल और हमास के बीच संघर्षविराम हुआ था.
इसराइल के सैन्य अभियान के बाद दुनिया भर के देशों में फ़लस्तीनियों के समर्थन में प्रदर्शन हुए थे. भारत में जहां मुसलमान समुदाय ने फ़लस्तीनियों के समर्थन में अपनी बात रखी है वहीं सोशल मीडिया पर इसराइल के समर्थन में भी ज़बरदस्त अभियान चला है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र में दिए बयान में भारत ने बेहद संतुलित रुख अख्तियार किया है. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य देश है. परिषद में भारत ने इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष के दो राष्ट्र समाधान के ज़रिए हल करने की बात दोहराई है.
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