इसराइल में युद्धविराम पर नेतन्याहू घिरे, सऊदी अरब-तुर्की यूएन में जमकर बरसे

पिछले 11 दिनों से इसराइल और हथियारंबद इस्लाममिक चरमपंथी संगठन हमास के बीच छिड़ा युद्ध थम गया है लेकिन इससे पूरे मध्य-पूर्व में तनाव रहा. हमास ने युद्धविराम को अपनी जीत बताया है तो नेतन्याहू दक्षिणपंथी सांसदों के निशाने पर आ गए हैं.

टाइम्स ऑफ इसराइल अख़बार के मुताबिक़ हमास से युद्धविराम के कारण दक्षिणपंथी सांसद और प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कुछ राजनीतिक सहयोगी ख़फ़ा हैं.

इन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को चेतावनी दी है. गुरुवार को नेतन्याहू ने हमास से युद्धविराम की घोषणा पर मुहर लगाई थी. इसके लिए कैबिनेट में वोटिंग हुई थी और मंत्रियों ने युद्धविराम के पक्ष में वोट किया था.

इसराइल में न्यू होप के नेता गिडीओन सआर ने सरकार की योजना की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि युद्ध विराम से इसराइली संकल्प पर बुरा असर पड़ेगा.

सआर का कहना है कि युद्धविराम को लागू करना हमास को मज़बूत करना होगा और इसराइली हितों को नुक़सान पहुँचेगा. उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रतिबंध के युद्धविराम को मानना राजनीति समझदारी वाला फ़ैसला नहीं है. सआर ने कहा कि भविष्य में इसराइल को इसकी क़ीमत चुकानी होगी.

एक और दक्षिणपंथी पार्टी यइसराइल बेतेनु के प्रमुख अविग्डोर लिबरमैन ने कहा कि यह नेतन्याहू की एक और नाकामी है. उन्होंने चैनल 12 न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा कि हमास इसराइल के लिए ख़तरा है क्योंकि अतीत में ग़लतियाँ हुई हैं और इस बार के युद्धविराम से हमास और मज़बूत होगा.

घोर धार्मिक यहूदी पार्टी के नेता बेज़ालेल स्मोर्टिच ने ट्वीट कर नेतन्याहू को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर युद्धविराम में यरुशलम को लेकर भी रियायत देने की बात है तो सरकार बनाने का ख्याल छोड़ दीजिए.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि मैं नेतन्याहू को सैन्य अभियान चलाने का श्रेय देता हूँ लेकिन आपने युद्धविराम के साथ यरुशलम को लेकर भी समझौता किया है तो सरकार बनाना भूल जाइए.

दूसरी तरफ़ ग़ज़ा में हमास के उपनेता ख़लील अल-हायया ने युद्धविराम को अपनी जीत बताया है. उन्होंने कहा है, ''आज हमारे प्रतिरोध की जीत हुई है. हम एक साथ दो ख़ुशी मनाएंगे. एक जीत की और दूसरी ईद की.''

यूएन में सऊदी अरब की दो टूक

इसराइल के ख़िलाफ़ पाकिस्तान और तुर्की ने इस्लामिक देशों से एकजुट होने की अपील की थी तो सऊदी अरब भी इसराइल को लेकर स्पष्ट रहा. खाड़ी के छह देशों में से सऊदी अरब इसराइल को लेकर सबसे ज़्यादा मुखर था.

सऊदी अरब की मुखरता गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा की आपातकालीन बैठक में भी दिखी. इसे संबोधित करते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान ने कहा कि फ़लस्तीनियों के हक़ों के ख़िलाफ़ इसराइली आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय नियमों का ख़तरनाक उल्लंघन है.

प्रिंस फ़ैसल ने कहा कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच तनाव संयुक्त राष्ट्र के उस चार्टर का उल्लंघन है जिसमें जबरन कब्ज़ा किए गए इलाक़े को अमान्य कहा गया है. उन्होंने कहा कि इसराइली आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के लिए ख़तरा है.

सऊदी के विदेश मंत्री ने कहा, ''इसराइली आक्रामकता से 'दो राष्ट्र समाधान' (इसराइल के साथ फ़लस्तीन भी एक मुल्क बने, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो) को भी धक्का लगेगा. हिंसा और अतिवाद के बढ़ावा से इस क्षेत्र में शांति लाने के लिए सारी अंतरराष्ट्रीय कोशिश नाकाम साबित होगी.''

प्रिंस फ़ैसल ने कहा, ''ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के सदस्यों ने फ़लस्तीनी ज़मीन, जिसमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है, पर इसराइली कब्ज़े को नकार दिया है. फ़लस्तीनियों की संपत्ति को नष्ट करना, विस्तारवाद की तरफ़ बढ़ना, फ़लस्तीनियों की ज़मीन को हड़पना और फ़लस्तीनी परिवारों को हटाने का अभियान हमें स्वीकार्य नहीं है.''

फ़लस्तीनी प्रशासन की ओर से विदेश मंत्री के तौर पर आए रियाद अल-माल्की ने कहा कि इसराइल फ़लस्तीनियों का जनसंहार कर रहा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फ़लस्तीनियों की रक्षा की अपील की. अल-माल्की ने कहा कि दुनिया के सभी देशों की ज़िम्मेदारी है कि वे शांति, न्याय और आज़ादी सुनिश्चित कराने के लिए काम करें.

कुवैत के विदेश मंत्री शेख अहमद नासीर अल-मोहम्मद ने कहा कि इसराइल ने फ़लस्तीनियों के मज़हब की आज़ादी को स्थगित किया है. उन्होंने कहा कि कुवैत इसराइली आक्रामकता की निंदा करता है.

वहीं लेबनान के विदेश मंत्री ने कहा कि इसराली हमलों से पूरे अरब वर्ल्ड में भावनाओं का उफान है. लेबनान ने कहा कि जब तक फ़लस्तीनियों की समस्या का समाधान नहीं हो जाता है तब तक इलाक़े में शांति नहीं आएगी.

इंडोनेशिया के विदेश मंत्री ने भी कहा कि इसराइल ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है और उसे रोका जाना चाहिए.

तुर्की भी जमकर बरसा

तुर्की के विदेश मंत्री मेवुट चउसलवा ने भी यूएन की आपातकालीन आमसभा में इसराइल की जमकर आलोचना की.

तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा, ''तुर्की फ़लस्तीनियों को समर्थन देना जारी रखेगा. फ़लस्तीनियों के साथ अन्याय सालों से हो रहा है. तुर्की क्रूरता के सामने ख़ामोश नहीं रह सकता है. जो चुप हैं वो अन्याय का साथ दे रहे हैं. ग़ज़ा में न केवल ऊंची इमारतों को इसराइल ने निशाने पर लिया है बल्कि स्कूलों और अस्पतालों को भी नहीं छोड़ा है. इस तरह की आक्रामकता युद्ध अपराध के अंतर्गत आती है. यरुशलम, ग़ज़ा और वेस्ट बैंक में जो कुछ भी हुआ है, उसके लिए केवल और केवल इसराइल ज़िम्मेदार है.''

तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि इसराइल के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होना होगा. तुर्की ने कहा, ''यह दुर्भाग्य है कि एक बार फिर से सुरक्षा परिषद की नाकामी इसराइल के मामले में सामने आई है. इसलिए हमारे राष्ट्रपति अर्दोआन कहते हैं कि दुनिया पाँच देशों के दायरे से बड़ा है.''

अर्दोआन सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य देश अमेरिका, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और रूस की आलोचन में ये बात कहते हैं.

तुर्की ने कहा कि जो मुल्क इसराइली आक्रामता की आलोचना कर रहा है उन्हें यहूदी विरोधी होने का इल्ज़ाम लगाकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है. तुर्की ने कहा, ''हम इस्लामोफ़ोबिया की तरह यहूदी विरोधी को भी मानवता के ख़िलाफ़ मानते हैं. फ़लस्तीनियों को भी आज़ादी और मर्यादा के साथ रहने का हक़ है.''

इसराइल और फ़लस्तीनियों के संघर्ष को लेकर पाकिस्तान में ईरान के राजदूत सईद मोहम्मद हुसैनी ने कहा है कि इसराइल में यहूदी शासन का अंत ज़रूर होगा. ईरानी राजदूत ने ट्विटर पर लिखा है, ''बेशक इसराइल में आतंकवादी और नस्ली शासन का अंत निश्चित है. फ़लस्तीन की पवित्र भूमि समुद्र से लेकर नदी तक मुक्त होगी.''

इसराइल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इसराइल ने बिना किसी शर्त मिस्र के पारस्परिक युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.

वहीं गुरुवार को इसराइल ने कहा था कि यह लड़ाई इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच की नहीं है बल्कि आतंकवादी संगठन हमास और इसराइल की है. इसराइली विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा था कि वो बीमारी का इलाज चाहता है न कि मरहम पट्टी.

गुरुवार को अमेरिका में इसराइल के राजदूत गिलैड अर्दान ने संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में फ़लस्तीनी विदेश मंत्री के भाषण के वक़्त का वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया था.

इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा था, ''मैं इसराइल को लेकर शर्मनाक झूठ फैलाने वाला भाषण बैठकर नहीं सुन सकता. फ़लस्तीन के विदेश मंत्री जो आज यूएनजीए में बोल रहे हैं, उन्हें भी हमास की हक़ीक़त पता है. हमास हत्यारा आतंकवादी समूह है जो निर्दोष नागरिकों की हत्या करता है.''

इस वीडियो में दिख रहा है कि गिलैड फ़लस्तीनी विदेश मंत्री के भाषण के वक़्त हॉल से बाहर निकल रहे हैं.

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