महामारी के बीच क्या पोस्टर पर गिरफ़्तारी दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता है?

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- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
देश में हर रोज़ लगभग तीन लाख नए केस सामने आ रहे हों, चार हज़ार से ज़्यादा मौत हो रही है और कुल सक्रिय कोरोना के मामले 35 लाख से ज़्यादा हो चुके हैं.
लेकिन भयावह होती दूसरी लहर के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस ने 12 मई से रविवार 16 मई तक 25 लोगों को एक पोस्टर चिपकाने के आरोप में गिरफ़्तार किया है.
इस पोस्टर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक सवाल पूछा गया था, ''मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दिया.''
इन 25 लोगों को दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 188 (किसी लोक सेवा अधिकारी की ओर से लागू किए गए आदेश की अवहेलना), 269 (उपेक्षापूर्ण ऐसा काम करना जिससे संक्रमण फैलने की संभावना हो) , दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ़ डिफ़ेसमेंट ऑफ़ प्रॉपर्टी सेक्शन 3 (सार्वनजनिक स्थान पर पेंटिंग, ग्रैफिटी या पोस्टर लगाकर उसे नुक़सान पहुँचाना) और एपिडेमिक एक्ट सेक्शन 3 (188 सेरक्शन के तहत सार्वजनिक अधिकारी के आदेश का उल्लंघन करना) के तहत गिरफ़्तार किया था.
जिन 25 लोगों पर एफ़आईआर दर्ज हैं, उनमें से कई मज़दूर, रिक्शे वाले और प्रिंटिंग का काम करने वाले लोग हैं, जिन्हें दिहाड़ी पर पोस्टर चिपकाने का काम दिया गया था.
इनमें से कई लोगों को अब ज़मानत दे दी गई है लेकिन बीबीसी ने इन लोगों से संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि उनके मोबाइल फ़ोन थानों में जमा कर लिए गए हैं.
इस पोस्टर को छपवाने से लेकर जगह-जगह चिपकाने का काम आम आदमी पार्टी ने किया है. ख़ुद पार्टी ने ये बात मानी है.
लॉकडाउन में घरों से बाहर निकल कर पोस्टर लगाने पर गिरफ़्तारी: दिल्ली पुलिस
दिल्ली में पोस्टरों को लेकर हुई गिरफ़्तारी पर दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी से कहा, "क्या लोगों को लॉकडाउन में राजनीतिक कार्यों के लिए बाहर निकलने की इजाज़त है? डिफ़ेसमेंट एक्ट कई बार लगाया जाता है, चुनावों के दौरान भी लगाया जाता है. हमने जाँच की और जो लोग हमें पोस्टर लगाते हुए मिले उन्हें गिरफ़्तार किया इसके बाद पूछताछ में आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं के नाम सामने आए, जिन्होंने यह पैसे ख़र्च कर संगठित करवाया था."

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उन्होंने आगे कहा, "पुलिस किसी के प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कुछ बोल देने के आधार पर काम नहीं करती, हमने जो मुक़दमे दर्ज किए हैं उनके जाँच के दौरान जिन आप नेता या कर्मियों का नाम सामने आया उनसे पूछताछ किया गया है. कुछ अभी भी जाँच में शामिल होने से बच रहे हैं."
क्या महामारी के दौर में दिल्ली पुलिस के लिए पोस्टर पर गिरफ़्तारी करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस ने कोरोना के दौरान सबसे ज़्यादा लोगों की मदद की है, ऑक्सीजन के इंतज़ाम से लेकर उन लोगों का अंतिम संस्कार तक किया है जिनके शव सड़क और अस्पतालों पर पड़े मिले या परिजनों ने छोड़ दिया या संस्कार करने में असमर्थ रहे. दिल्ली पुलिस ने अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर कई लोगों की मदद की है. ऐसे में प्राथमिकता का सवाल पैदा नहीं होता. अपराध या क़ानून के उल्लंघन को रोकना, जो पुलिस का काम है क्या वो करना बंद कर दिया जाए?"
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन लगाया है. आम आदमी पार्टी के लोग ही सरकार के लगाए क़ानून का उल्लंघन कर मज़दूरों का इस्तेमाल कर इस क़ानून को तोड़ रहे हैं, यह जाँच में सामने आया है.
'IPC की ये धाराएं इस मामले में फ़िट नहीं बैठतीं'
क्या पोस्टर लगाने पर पुलिस आईपीसी का सेक्शन 188 , 269 और पैनडेमिक एक्ट लगा सकती है? और इन धाराओं का इस्तेमाल करना कितना तर्क संगत है?
ये समझने के लिए बीबीसी ने यूपी के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर से बात की.
उन्होंने कहा, ''जो भी धाराएँ लगाई गईं हैं, 188- जिसका मतलब हुआ कि किसी सरकारी अधिकारी की ओर से लागू सरकारी नियम का उल्लंधन करना और पैनडेमिक एक्ट का सेक्शन 3 लगाया गया है, जिसका अर्थ है कि किसी पब्लिक अथॉरिटी के नियम की अवहेलना करना लेकिन ऐसा कोई भी सरकारी नियम नहीं है कि आप सत्ता में बैठे लोगों से अधिकारियों-नेताओं से सवाल नहीं पूछ सकते या उनकी आलोचना नहीं कर सकते. कोई भी नियम इससे रोकता नहीं है. दोनों ही सेक्शन प्रथम दृष्टया में ही इस मामले में लागू नहीं होते.''
''साथ ही आईपीसी की धारा 269 भी इसमें लागू नहीं होती क्योंकि पोस्टर चिपकाने से महामारी फैलने कोई ताल्लुक़ नहीं है, ये हो ही नहीं सकता तो संक्रमण फैलाने की धारा कैसे लगाई जा सकती है."
''हां, दिल्ली डिफ़ेसमेंट ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट इस मामले में लग सकता है वो भी अगर इसे पब्लिक प्रॉपर्टी पर लगाया जाए.''
पोस्टर और आम आदमी पार्टी की राजनीति
16 मई को आम आदमी पार्टी ने इसकी ज़िम्मेदारी ली. आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि हमने पोस्टर छपवाए थे.
बीबीसी ने दुर्गेश पाठक से बात की और ये समझना चाहा कि इस तरह के पोस्टर के पीछे आख़िर क्या मंशा थी?
दुर्गेश कहते हैं, ''पूरा देश ऑक्सीजन और बेड की कमी से मर रहा है मेरे क़रीबी दोस्त मर गए अगर आज वैक्सीन मिली होती तो ज़िंदा होते. सवाल पूछने से क्यों डर रहे हैं लोग. सवाल भी अगर लोकतंत्र में ना पूछा जाए तो बताइए क्या करें हम?''
12 मई से चल रही गिरफ़्तारियों में चार दिन बाद 16 मई को आम आदमी पार्टी ने सामने आकर कहा कि पोस्टर उसने छपवाए हैं. ज़िम्मेदारी लेने में चार दिन का वक़्त क्यों लगा? इस सवाल पर दुर्गेश झल्ला कर कहते हैं कि अगर हमने देरी से प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो क्या हमारी ग़लती है.
लेकिन सवाल आम आदमी पार्टी पर भी उठते हैं कि आख़िर उनकी ओर से 25 गिरफ्तारियाँ होने के बाद क्यों ज़िम्मेदारी ली गई?
हालांकि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बावजूद दिल्ली पुलिस ने दुर्गेश पर कोई कार्रवाई तो नहीं की है लेकिन पुलिस ने कई दिहाड़ी मज़दूरों- आटो ड्राइवरों को ज़रूर गिरफ्तार किया, जो 100-400 रुपये प्रतिदिन पर यह पोस्टर चिपकाने का काम कर रहे थे. हालाँकि इनमें से ज़्यादातर लोगों को अब ज़मानत मिल गई है.

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आपत्ति क्यों?
मार्च महीने तक वैक्सीन को विदेशों को देने का भारत सरकार की ओर से जमकर प्रचार प्रसार किया जा रहा था.
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट बताती है कि 'वैक्सीन मैत्री' के तहत भारत सरकार ने छह करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन 95 देशों में भेजी है.
सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए कहा था कि इस कठिन समय में भी भारत ने 150 देशों से ज़्यादा देशों को ज़रूरी दवाएँ भेजी हैं. और सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक के तौर पर हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि हम वैश्विक समुदाय की मदद करते रहेंगे.
इतना ही नहीं इस साल मार्च में भारत के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत के. नागाराज नायडू ने कहा था कि भारत ने अपने लोगों जितना वैक्सीन दी है उससे ज़्यादा वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की सप्लाई की है.
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हालात ये हैं कि वर्तमान समय में भारत में केवल तीन फ़ीसद लोग ही हैं जिन्हें पूरी तरह वैक्सीन की दोनों डोज़ मिल सकी है. 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को जो वैक्सीन 1 मई से लगनी थी वह देश के ज़्यादातर हिस्सों में वैक्सीन की कमी के कारण नहीं लग पा रही है.
एक महीने पहले तक मोदी सरकार ख़ुद दूसरे देशों को वैक्सीन भेजने का जगह-जगह ज़िक्र करती रही है.
राजनीतिक सरगर्मी और ट्विटर पर छाया पोस्टर
गिरफ़्तारियों की ख़बर के साथ ही दिल्ली की गलियों में चिपका ये पोस्टर सोशल मीडिया पर छा गया. लोग इस पोस्टर को शेयर कर गिरफ़्तारी की माँग करने लगे.
राहुल गांधी ने पोस्टर को ट्वीट करते हुए लिखा, ''मुझे भी गिरफ़्तार करो''
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वहीं यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक लेख के साथ ट्विटर पर लिखा, ''पीएम की आलोचना करता हुआ पोस्टर लगाना अब अपराध है?
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''क्या देश मोदी पीनल कोड से चल रहा है? क्या दिल्ली पुलिस के पास इस महामारी के बीच में कोई और काम नहीं बचा है? मैं अपने कंपाउंड की दीवार पर ये पोस्टर लगाऊंगा, पुलिस आए और मुझे गिरफ़्तार करे.''
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टीएमसी से सांसद महुआ मोइत्रा कहती हैं, ''मोदी जी आपने मेरे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी- ये बेहद उचित सवाल है.''
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