चीन की नौसेना हिंद महासागर में एक दशक से घुस रही हैः नौसेना प्रमुख - प्रेस रिव्यू

चीन की नौसेना

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भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने बुधवार को कहा है कि भारत ने बीते एक दशक के दौरान हिंद महासागर में चीन की नौसेना की नियमित उपस्थिति दर्ज की है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल सिंह ने कहा कि जहां तक हिंद महासागर में चीन की नौसेना का सवाल है, हमने एक दशक से अधिक समय से उनकी लगातार मौजूदगी देखी है.

उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा, बाज़ार और संसाधनों के लिए पश्चिम की तरफ़ देखता है. ऐसे में यदि वो जल्द ही हिंद महासागर क्षेत्र में दिखाई देते हैं तो ये हैरत की बात नहीं होगी क्योंकि जहां व्यापार होता है वहां नौसेना भी होती है.

चीन तीसरे युद्धपोत का विकास कर रहा है. इस पर एडमिरल सिंह का था कि भारत चीन की नौसेना के विकास की रफ़्तार से चकित नहीं है क्योंकि उनके पास इरादे और साधन हैं.

चीन की नौसेना की क्षमताओं पर एडमिरल सिंह ने कहा कि चीन के इरादे स्पष्ट हैं. वो ऐसी ही क्षमता हासिल करना चाहता है जैसी की अमेरिका के पास है.

अमेरिकी नौसेना के पास प्रथम विश्व युद्ध के समय से ही युद्धपोत हैं. भारत भी बीते साठ सालों से युद्धपोतों का संचालन कर रहा है. वहीं एडमिरल सिंह का कहना है कि चीन इस दिशा में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.

भारत का डबल म्यूटेंट वायरस हो सकता है चिंता का विषय

वायपस

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पाया जा रहा कथित डबल म्यूटेंट वायरस चिंता का विषय हो सकता है.

भारत के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन ने कहा है कि डबल म्यूटेंट कहा जा रहा वायरस का ये रूप चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर फैल गया है.

ये पहली बार है जब भारत में किसी शीर्ष अधिकारी ने वायरस के कोड बी1.617 रूप को चिंता का विषय कहा है.

वायरस का ये बदला हुआ रूप बड़ी तादाद में लोगों में मिला है. डॉ. विजयराघवन का कहना है कि ये वायरस सिर्फ़ बड़ी संख्या में ही नहीं मिल रहा है बल्कि इसका मनोवैज्ञानिक असर भी हो रहा है.

भारत में इस समय कोरोना संक्रमण के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है. रोज़ाना आने वाले संक्रमण के नए मामलों का आंकड़ा दो लाख के करीब पहुंच गया है.

दिल्ली के अस्पतालों में गंभीर लक्षणों के साथ भर्ती हो रहे हैं बच्चे

बीमार बच्चा

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के अस्पतालों का कहना है कि आठ महीने तक के बच्चे कोविड-19 के गंभीर लक्षणों के साथ भर्ती हो रहे हैं.

बच्चों को लगातार बुख़ार आ रहा है और निमोनिया भी हो रहा है जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है.

अब तक ये माना जाता रहा था कि बच्चों में कोविड-19 का ज्यादा असर नहीं होता है और गंभीर लक्षण होना दुर्लभ बात है.

लोक नायक अस्पताल के मेडिकल निदेशक डॉ, सुरेश कुमार ने अख़बार को बताया है कि इस समय अस्पताल में आठ बच्चे भर्ती हैं जिनमें से एक की उम्र सिर्फ़ आठ महीने है. बाकी की उम्र भी बारह साल से कम ही है.

इन बच्चों में तेज़ बुखार और निमोनिया के अलावा स्वाद न आने के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं.

वहीं गंगाराम अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया है कि उनके पास रोज़ाना बीस-तीस कॉल आ रहे हैं. कोरोना संक्रमित बच्चों के परिजन उनसे वीडियो के ज़रिए परामर्श ले रहे हैं.

संक्रमित बच्चों का इलाज करना डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण भी बना हुआ है.

भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया प्रशांत क्षेत्र पर सहमत हुए लेकिन म्यांमार पर नहीं

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवरोफ़ के क्वाड समूह को एशिया का नेटो बताने के कुछ दिन बाद ही भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों को रेखांकित किया है. हालांकि तीनों देश म्यांमार के मुद्दे पर सहमत नहीं हो सके हैं.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को एक बयान में कहा है कि जो देश एशियाई नेटो जैसे शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं वो दरअसल माइंडगेम खेल रहे हैं.

जयशंकर ने कहा कि कोई और देश ये तय नहीं करेगा कि भारत किस देश से किन मुद्दों पर चर्चा करेगा.

एस जयशंकर रायसीना डॉयलोग में फ्रांसीसी विदेश मंत्री और ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री के साथ चर्चा में हिस्सा ले रहे थे.

म्यांमार के मुद्दे पर फ्रांसीसी विदेश मंत्री जां वेस ले द्रियां ने कहा कि आंग सान सू ची के साथ बहुत से लोगों की संवेदनाएं हैं. उन्होंने कहा कि सू ची सही तरीके से चुनी गईं थीं. उन्होंने म्यांमार में तख़्तापलट के बाद वहां की जनता के सड़कों पर आने का उल्लेख भी किया.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूरोपीय यूनियन ने म्यांमार के सैन्य शासन पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हैं.

वहीं एस जयशंकर ने कहा कि सभी लोकतांत्रिक देशों का इस मुद्दे पर साझा स्टैंड है लेकिन भारत की बात अलग है क्योंकि वह म्यांमार का पड़ोसी देश है.

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