जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा- प्रेस रिव्यू

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों को तय प्रक्रियाओं का पालन किए बगैर म्यांमार प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रह्मण्यम की एक पीठ ने उस याचिका पर यह आदेश पारित किया जिसमें जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों को फौरन रिहा करने और उन्हें म्यांमार प्रत्यर्पित करने से रोकने के लिए केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने इन शरणार्थियों को तत्काल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.
केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 2018 में ऐसी ही याचिका असम में ख़ारिज हो चुकी है. वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि रोहिंग्या बच्चों की हत्या कर दी जाती है और उन्हें यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.
बीते महीने जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने फॉरेन ऐक्ट के तहत कठुआ के हीरानगर जेल में होल्डिंग सेंटर बनाकर जम्मू में रह रहे 168 रोहिंग्या शरणार्थियों को रखा है. इन लोगों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं.

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भारत और चीन के बीच 11वें दौर की बातचीत
भारत और चीन के बीच शुक्रवार सुबह 11.30 बजे पूर्वी लद्दाख के चुशुल-मोलदो में 11वें दौर की बातचीत हो रही है. गोगरा और देपसांग हॉट स्प्रिंग से दोनों सेनाओं के पीछे हटने का मुद्दा इस बातचीत का अहम हिस्सा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक पैंगोंग लेक सेक्टर में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हो कर 10 दिनों में ख़त्म हो चुकी है.
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "हम बाकी के इलाकों में सैनिकों को पीछे हटते देखना चाहते हैं ताकि पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल हो सके. इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का माहौल बन सकता है."

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इफ़्को ने खाद की कीमतों में किया 58 फ़ीसदी इज़ाफ़ा
कोरोना महामारी की समस्या से जूझ रहे किसानों की एक और परेशानी बढ़ गई है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक सहकारी क्षेत्र के इंडियन फारमर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव (इफ़्को) ने डीएपी खाद की कीमतों में 58.33 फ़ीसदी की वृद्धि कर दी है. नई कीमतों में डीएपी खाद का 50 किलो का बैग अब 1,200 रुपये की जगह 1,900 रुपये में मिलेगा जबकि नाइट्रोजन फॉस्फोरस पोटैशियम (एनपीके) के 50 किलो के बैग की कीमत 1,350 रुपये से बढ़कर 1,800 रुपये कर दी गई है.
निजी क्षेत्र की कंपनियों ने बीते महीने ही 50 किलो के बैग की कीमत 300 रुपये बढ़ाई थी. ख़बर में इफ़्को के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में डीएपी में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फेट की कीमते बढ़ने की वजह से यह इज़ाफ़ा किया गया है. उनका यह भी कहना है कि भारत में इनकी उपलब्धता कम है और इन दोनों उत्पादों का आयात करना पड़ता है.
बढ़ी हुई कीमतें पहली अप्रैल से प्रभावी कर दी गई हैं.
काँग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने खाद की कीमतों के बढ़ने पर ट्वीट किया, "73 साल में सबसे महंगी और ज़ालिम सरकार, हर रोज़ किसान पर करती नया वार. जो कभी नहीं हुआ, वो जुल्म कर दिखाया, मोदी सरकार ने 700 रुपये डीएपी खाद बढ़ाया. 1,200 रुपये (50 किलो) का डीएपी 1,900 रुपये के पार. मोदी जी पहले ही खेती की लागत 15 हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ा चुके हैं. सब याद रखा जाएगा."

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क्या कृत्रिम वर्षा से जंगल की आग बुझाई जा सकती हैः उत्तराखंड हाई कोर्ट
द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से यह पता करने के लिए कहा है कि क्या प्रदेश के जंगलों में लगी जंगल की आग को बुझाने के लिए कृत्रिम वर्षा का सहारा लिया जा सकता है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के हवाले से छपी इस ख़बर के मुताबिक एक जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस आरएस चौहान और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने यह भी पता करने के लिए कहा है कि इससे राज्य की भौगोलिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा.
साथ ही, कोर्ट ने सरकार जंगल की आग से निपटने के लिए राज्य सरकार को स्थाई व्यवस्था करने का निर्देश दिया है.
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