पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: 'मोदी को देखने आए हैं, बीजेपी की वजह से नहीं'

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव

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    • Author, भूमिका राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कूच बिहार से

उत्तर बंगाल, बंगाल का वो हिस्सा है, जहाँ वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया था.

राज्य में कुल 18 सीटें हासिल करने वाली पार्टी ने सात सीटें इसी हिस्से से जीती थीं और अब विधान सभा चुनावों में भी पार्टी उम्मीद कर रही है कि उसे वही सफलता मिलेगी.

कूच बिहार, उत्तर बंगाल का एक महत्वपूर्ण ज़िला है. जहाँ मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली की और लोगों को संबोधित किया.

दोपहर क़रीब 12 बजे पीएम रास मेला मैदान पहुँचे, लेकिन लोगों के रास मेला मैदान पहुँचने का सिलसिला सुबह छह बजे से ही शुरू हो गया था.

जिस समय पीएम मंच पर थे, उस वक़्त एक घर की छत से देखने पर सिर्फ़ और सिर्फ़ लोगों की भीड़ नज़र आ रही थी. बीजेपी के झंडे से पूरा मैदान पटा पड़ा था.

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मोदी की रैली के एक दिन पहले

यूँ तो इस मैदान की क्षमता 80 हज़ार लोगों की ही है, लेकिन कूच बिहार में पार्टी के प्रवक्ता दीप्तिमान ने अनुमान लगाते हुए बीबीसी से पहले ही कहा था कि क़रीब दो से ढाई लाख लोग इस जनसभा में सुनने आएँगे.

हालाँकि रास मेला मैदान में प्रधानमंत्री मोदी पहले भी रैली कर चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले भी यहाँ लोगों को संबोधित किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के एक दिन पहले से ही पूरा कूच बिहार छावनी में बदल गया था. बाज़ारों में भी जगह-जगह पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात थे.

देर रात तक रास मेला मैदान को बीजेपी के झंडे से सजाया जाता रहा. अगले दिन सुबह होने वाली जनसभा के लिए देर रात से ही लोग जमा होने लगे थे.

मैदान के चारों ओर बड़े-बड़े स्क्रीन लगे हुए थे, ताकि जो लोग मंच पर मोदी को सीधे नहीं देख पा रहे हैं वो स्क्रीन पर देख सकें.

कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बात-बात में कहा कि उन्हें ख़ुद यक़ीन नहीं हो रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग आएँगे.

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'वजह बीजेपी नहीं'

पीएम की जनसभा में आए हितेश अग्रवाल ने बताया कि वो बीजेपी की वजह से जनसभा में नहीं आए है. वो सिर्फ़ पीएम मोदी को देखने आए थे और लाइव सुनने आए थे. देख लिया-सुन लिया इसलिए वापस जा रहे हैं.

पीयूष नाम के एक युवा ने कहा कि वो 'जादू' देखने आए थे. उन्होंने कहा, "हर कोई कहता है कि मोदी जादूगर हैं और यही देखने के लिए आए थे. एक आदमी को देखने इतनी भीड़ आ जाए तो वो जादूगर ही है."

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि इतनी भीड़ होगी. पार्टी की ही एक कार्यकर्ता ने बताया कि कुछ लोग बहुत जल्दी चले गए हैं, क्योंकि उनको अंदाज़ा नहीं था कि इतनी भीड़ होगी.

उन्होंने बताया, "मेरे बाड़ी के पास से कई लोग आए थे लेकिन भीड़ में कोरोना के डर से मोदी जी को देखकर वापस चले गए."

कुछ लोग तो गर्मी की वजह से भी बीच कार्यक्रम ही चले गए. कोच बिहार में रातें भले ही ठंडी होती हों, लेकिन दिन में यहाँ अच्छी ख़ासी गर्मी पड़ती है. मंगलवार को भी यहाँ तापमान 33 डिग्री सेल्सियस था.

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कितनी महत्वपूर्ण है प्रधानमंत्री की ये जनसभा

बीजेपी की ओर से दधिराम रे, सुसील बर्मन, सुकुमार रॉय, निखिल रंजन डे, बारेन चंद्र बर्मन, दीपक कुमार रॉय, निशिथ प्रामाणिक, मिहिर गोस्वामी और मालती रावा रॉय इस क्षेत्र की अलग-अलग विधानसभा सीटों से उम्मीदवार हैं.

इन उम्मीदवारों में से निशिथ प्रामाणिक कूच बिहार से बीजेपी के सांसद भी हैं.

वरिष्ठ पत्रकर आशीष घोष कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोच बिहार की ये जनसभा बेहद महत्वपूर्ण है.

वो कहते हैं, "अगर लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर कहें, तो उत्तर बंगाल में बीजेपी मज़बूत हुई है और इस लिहाज़ से तृणमूल के लिए यहाँ चुनौती बड़ी है कि वो बेहतर प्रदर्शन करे."

वो कहते हैं, "एक बात यह भी है कि तृणमूल के अंदर इतना गतिरोध पनप चुका है कि यह भी एक फ़ैक्टर है कि वो चुनावों में कैसा प्रदर्शन करती है. हो सकता है कि बीजेपी को इसका फ़ायदा मिल जाए."

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आशीष घोष मानते हैं कि पीएम और अमित शाह की सभाओं का असर तो होगा ही, लेकिन इसके साथ ही यह समझना भी ज़रूरी है कि पीएम को चुनावों में इतनी बार रैली करने के लिए आना, बीजेपी की कमज़ोरी को भी दिखाता है कि उनके पास कोई चेहरा नहीं है.

वो कहते हैं, "लगातार मोदी का रैली करना, सभाओं को संबोधित करना प्रभाव तो डालेगा, लेकिन उनका बार-बार उनका आना ये भी बताता है कि यहाँ बीजेपी का कोई चेहरा नहीं है."

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को इस ज़िले में भारी समर्थन मिला था.

राजे-रजवाड़ों की ज़मीन रहे कोच बिहार में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं. मेखलीगंज, माथाभंगा, कोच बिहार उत्तर, कोच बिहार दक्षिण, सीतलकूची, सितई, दीनहाटा, नाटाबाड़ी और तूफ़ानगंज.

2016 में इन नौ सीटों में से आठ सीटों पर तृणमूल विजयी रही थी. फॉरवर्ड ब्लॉक को एक सीट मिली थी.

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