'इसराइल के दिल्ली स्थित दूतावास के पास हुए धमाके में ईरान कनेक्शन'-प्रेस रिव्यू

इसराइली दूतावास

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अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ दिल्ली स्थित इसराइली दूतावास के पास जनवरी में हुए आइईडी ब्लास्ट पर भारत की केंद्रीय आतंकवाद निरोधक एजेंसियों ने संदिग्धों की एक सूची तैयार की है.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार जांच के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक़ अपनी जांच के निष्कर्ष में एंजेंसियों ने कहा है कि ईरानी क़ुद्स बल इस आतंकी साज़िश के पीछे था, लेकिन बम एक स्थानीय भारतीय शिया मॉड्यूल ने प्लांट किया.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''हमले को लेकर जानबूझकर साइबर दुनिया पर ऐसा माहौल बनाया गया जो इस्लामिक स्टेट की भूमिका की ओर इशारा करते हैं लेकिन आंतक-विरोधी एजेंसियों का साफ़ तौर मानना है कि यह ब्लास्ट इसराइली और ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड के बीच लंबे वक़्त से जारी युद्ध का हिस्सा है.''

अख़बार के मुताबिक़, ''आंतक-विरोधी एजेंसी के एक विशेषज्ञ ने बातचीत में कहा, ''यह विस्फोटक उच्च तीव्रता का नहीं था. इसका लक्ष्य जान-माल का नुकसान करना नहीं था क्योंकि शायद ईरान भारत जैसे मित्रवत देश को नुक़सान पहुंचाना नहीं चाहता था.'' उस विशेषज्ञ का कहना है कि ख़तरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

29 जनवरी को दिल्ली स्थित इसराइली दूतावास के पास एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर शाम 5.05 बजे एक कम क्षमता वाला IED ब्लास्ट हुआ था. इसमें कोई ज़ख़्मी नहीं हुआ था और ना ही किसी संपत्ति को कोई नुक़सान पहुंचाया गया था. इसमें सिर्फ़ नज़दीक खड़ी तीन कारों के शीशे टूटे थे.

ये एक रिमोट से कंट्रोल होने वाला डिवाइस था, जिसकी मदद से धमाके को थोड़ी दूर पर बैठे किसी शख़्स ने अंजाम दिया. इस विस्फोटक की प्रकृति कैसी थी इसे समझने के लिए फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है.

एजेंसियों का मानना है कि डिवाइस या तो एक इलेक्ट्रिक डेटोनेटर के साथ अमोनियम नाइट्रेट-फ्यूल ऑयल विस्फोटक था या तकनीकी रूप से एक एडवांस PETN (पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानिट्रेट) डिवाइस था. अभी एक बात जो पक्के तौर पर सामने आई है कि इस डिवाइस में अमोनियम पाउडर और बॉल बियररिंग था जिसके फटने से कारों के शीशे टूट गए.

भारतीय जांच एजेंसी को एक ख़त भी मिला था जो इसराइली एंबेसडर रॉन मल्का के नाम था. इस ख़त की भी जांच चल रही है जिसमें इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद भी शामिल है.

एजेंसी से जुड़ी एक्सपर्ट ने ये भी बताया कि ''लिखने की शैली और नाम की सटीक वर्तनी यह बताती है कि इसे एक ईरानी ने लिखा है और संभवत: डिप्लोमैटिक कवर के तहत एक एजेंट ने इसे उस जगह तक पहुंचाया.''

इसमें ईरान के टॉप मिलिट्री लीडर क़ासिम सुलेमानी और परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़रीज़ादेह की पिछले साल हुई मौत का भी ज़िक्र था.

वांग यी

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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत और चीन को एक-दूसरे पर संदेह करना छोड़ना चाहिए.

रविवार को पड़ोसी देश के विदेश मंत्री ने कहा कि चीन और भारत को अपने सीमा विवादों को सुलझाने के लिए एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाना छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाते हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना चाहिए.

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वांग यी ने कहा कि चीन और भारत के संबंध के लिए सीमा विवाद पूरी तरह से ज़िम्मेदार नहीं हैं. दोनों देश साझेदार हैं लेकिन उन्हें एक-दूसरे पर संदेह करना छोड़ देना चाहिए.

वांग यी ने ये बात अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कही.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, वांग यी ने कहा कि "सीमा विवाद, इतिहास की देन है. यह चीन-भारत संबंधों के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार नहीं है." अख़बार के मुताबिक़, वांग यी ने कहा कि कई मुद्दों पर भारत और चीन का रुख़ एक समान है या करीब है और समान राष्ट्रीय वास्तविकता के चलते ऐसा है इसलिए तीन और भारत एक-दूसरे के मित्र हैं ना कि ख़तरा या प्रतिद्वंद्वी.

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तिब्बत तक बुलेट ट्रेन चलाएगा चीन

चीन इस साल जुलाई से पूर्व अरुणाचल प्रदेश से लगने वाली भारतीय सीमा के नज़दीक तिब्बत तक बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू कर देगा.

दैनिक हिंदुस्तान ने इस ख़बर को प्रकाशित किया है.

यह हाई स्पीड ट्रेन चीन के लगभग हर राज्य से होकर गुज़रेगी. चीन के सरकारी रेलवे ग्रप कंपनी के बोर्ड अध्यक्ष लू डोंगफू ने चीन की न्यूज़ एजेंसी शिंहुआ को बताया कि 435 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर बिजली से चलने वाली हाई स्पीड ट्रेन चलाई जाएगी.

ल्हासा और पूर्वी तिब्बत के निंगची के बीच रेलवे लाइन का निर्माण 2014 में शुरू हुआ था. यह तिब्बत का पहला ऐसा रेलमार्ग है जहां बिजली से ट्रेन चलेगी.

ख़बर के अनुसार, रेल की पटरी बिछाने का काम साल 2020 में ही पूरी हो चुका है.

कोविड वैक्सीन

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कच्चे माल की कमी से टीका उत्पादन पर पड़ रहा है असर

रॉ-मटीरियल यानी कच्चे माल की कमी से कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने की योजना पर असर पड़ सकता है. कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए एस्ट्राजेनेका ऑक्सफ़ोर्ड ने कोविशील्ड टीका तैयार किया है और भारत का सीरम इंस्टीट्यूट इसका उत्पादन कर रहा है.

बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर के अनुसार, मौजूदा समय में सीरम इंस्टीट्यूट हर महीने 67 से 70 लाख खुराक़ तैयार कर रहा है. बीते सप्ताह सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा था कि कच्चे माल की आपूर्त में अमेरिकी क़ानून के कारण बाधा आ रही है और इससे टीका उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

महिला किसान

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महिला दिवस पर किसान आंदोलन की कमान संभालेंगी महिलाएं

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर किसान आंदोलन की कमान महिलाओं के हाथ में होगी. किसान नेताओं ने इससे एक दिन पहले दावा किया था कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर क़रीब चालीस हज़ार महिलाएं आंदोलन में शामिल होंगी. इनमें मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा की महिलाएं शामिल होंगी.

जनसत्ता अख़बार की ख़बर के अनुसार, किसान नेताओं का कहना है कि महिलाएं देश के कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इसी लिए उन्होंने इस दिन महिला किसानों को मंच सौंपने की योजना बनायी है.

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