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मनदीप पुनिया: किसान आंदोलन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार को न्यायिक हिरासत में भेजा गया
- Author, सत सिंह
- पदनाम, सिंघु बॉर्डर से, बीबीसी हिंदी के लिए
शनिवार शाम सिंघु बॉर्डर से स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया को गिरफ़्तार किए जाने के बाद रविवार को उन्हें तिहाड़ जेल में ही मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
मनदीप के वकील ने कहा कि उनकी तरफ़ से बचाव पक्ष का वकील भी पेश नहीं हुआ था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
मनदीप पुनिया के वकील सरीन नावेद ने बताया, "हमें बताया गया था कि उन्हें रोहिणी कोर्ट में 2 बजे पेश किया जाएगा लेकिन बाद में कहा गया कि तिहाड़ कोर्ट कॉम्प्लेक्स में साढ़े 12 बजे पेश कर रहे हैं. डिफ़ेस लॉयर को कुछ समय पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था. उसका हक़ है कि उसके साथ बचाव पक्ष का वकील हो."
उनकी ज़मानत याचिका को भी स्वीकार कर लिया गया है जिसकी सुनवाई सोमवार को रोहिणी कोर्ट में होगी.
शनिवार को मनदीप की गिरफ़्तारी की ख़बरें सबसे पहले सोशल मीडिया पर आनी शुरू हुई थीं, उनकी गिरफ़्तारी की आधिकारिक पुष्टि पुलिस ने कई घंटों तक नहीं की थी.
शनिवार शाम सात बजे के क़रीब एक वीडियो वायरल होना शुरू हुआ जिसमें पुलिस एक व्यक्ति को खींचकर ले जाने की कोशिश करती हुई दिख रही है.
इसके बाद देर रात मनदीप पुनिया के बारे में पत्रकारों ने ट्वीट करना शुरू किया कि पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है लेकिन उन्हें कहाँ ले जाया गया है इसकी जानकारी सुबह तक लोगों को नहीं मिल सकी थी.
मनदीप पुनिया 'द कैरेवान' सहित कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए किसानों के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं.
मनदीप के अलावा सिंघु बॉर्डर से एक अन्य पत्रकार धर्मेंदर सिंह को भी हिरासत में लिया गया था. धर्मेंदर अपना यूट्यूब चैनल चलाते हैं. इन दोनों पत्रकारों का संबंध हरियाणा के झज्जर ज़िले से है.
सिंघु बॉर्डर पर क्या हुआ था?
धर्मेंदर सिंह को पुलिस ने मनदीप पुनिया के साथ पकड़ा था लेकिन उन्हें रविवार सुबह पाँच बजे छोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने उनको एक लिखित अंडरटेकिंग लेकर छोड़ा कि वो आगे से कोई पुलिस एक्शन का वीडियो शूट नहीं करेंगे और ना ही मीडिया से बात करेंगे.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब सिंघु बॉर्डर पर धर्मेंदर को पुलिस ने पकड़ा तो मनदीप उनके साथ ही खड़े थे. उन्होंने पुलिस को आवाज़ लगाई कि पत्रकार को क्यों पकड़ा जा रहा है, तो पुलिस वालों ने उनको भी पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया.
पंजाब के एक न्यूज़ पोर्टल के लिए काम करने वाले मनदीप सिंह ने बताया, "किसान मोर्चा की प्रेस वार्ता होनी थी, स्टेज के पास कुछ हल्ला-गुल्ला हुआ तो पता चला कि मनदीप पुनिया और धर्मेंदर सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. उस समय वे पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण लोगों को होने वाली दिक्कतों पर एक वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे."
रात भर नहीं मिली ख़बर
न्यूज़लॉन्ड्री के लिए काम करने वाले पत्रकार बसंत कुमार ने बताया कि जैसे ही पत्रकारों को पता लगा कि पुलिस ने उनके दो साथियों को सिंघु बॉर्डर से गिरफ़्तार किया है तो वे अलीपुर थाने पहुँचे. जब पुलिस से पूछा गया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया कि उन्होंने मनदीप पुनिया या धर्मेंदर सिंह नाम के किसी व्यक्ति को सिंघु बॉर्डर से हिरासत में लिया है.
कई पत्रकार अलीपुर थाने के बाहर सुबह तीन बजे तक बैठे रहे लेकिन पुलिस से उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल सकी. वहीं सोशल मीडिया पर मनदीप पुनिया से जुड़े दो-तीन हैशटैग ट्रेंड करने लगे.
आज दोपहर पत्रकारों के एक समूह ने दिल्ली पुलिस के हेडक्ववार्टर के बाहर जमा होकर पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ अपना विरोध प्रकट किया है.
क्या कहती है एफ़आईआर?
करीब 12 घंटे पुलिस हिरासत में रखने के बाद, दिल्ली पुलिस ने मनदीप पुनिया के ख़िलाफ़ एक एफ़आईआर दर्ज की है जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 186 (सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला करना), 332 (जान-बूझकर व्यवधान डालना) और 341 (गै़र-कानूनी हस्तक्षेप) के तहत मुक़दमा दर्ज किया है.
एफ़आईआर के मुताबिक़, "दिल्ली पुलिस शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर अपनी ड्यूटी कर रही थी जहाँ कुछ किसान बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. क़रीब साढ़े छह बजे कुछ किसान बैरिकेड तोड़ने की नीयत से आये और पुलिस के जवानों के साथ हाथापाई करने लगे. उस दौरान पुलिस ने मनदीप पुनिया को पकड़ लिया जो एक पुलिसकर्मी से हाथापाई कर रहे थे".
रविवार सुबह दिल्ली पुलिस मनदीप को समयपुर बादली थाने से तिहाड़ जेल, कोर्ट कॉम्प्लेक्स ले गई जहाँ उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया.
पुलिस की एफ़आईआर में धर्मेंदर सिंह को हिरासत में लिए जाने या छोड़े जाने का कोई ज़िक्र नहीं है.
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