किसान गणतंत्र परेड: ‘जब आन का सवाल बन जाए, तब आंदोलन के लिए निमंत्रण का इंतज़ार नहीं किया जाता’

किसान गणतंत्र परेड में कितने ट्रैक्टर आएंगे और क्या व्यवस्थाएं रहेंगी

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    • Author, ख़ुशहाल लाली
    • पदनाम, बीबीसी पंजाबी

पंजाब के जालंधर ज़िले के ग्राम पधियाना के एक किसान अमरजीत सिंह बैंस ने कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली में 26 जनवरी को होने वाली किसान ट्रैक्टर परेड के लिए अपने तीन ट्रैक्टर भेजे हैं.

बैंस के पास सात ट्रैक्टर और चार कारें और जीप हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली आंदोलन पर ख़र्च करने के लिए अपने चार ट्रैक्टर और दो अन्य वाहन बेच दिए हैं.

बीबीसी पंजाबी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ़ 20 हेक्टेयर की खेती करता हूं, लेकिन ट्रैक्टर रखना मेरा शौक़ है और मेरे पास एक ही कंपनी के हर मॉडल के ट्रैक्टर हैं. यह मेरा शौक़ है लेकिन अब संघर्ष मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है."

पंजाब के किसान अमरजीत सिंह बैंस की कहानी तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पंजाब के किसानों के संघर्ष की भावना और इस जँग के लिए उनकी लगन को दिखाती है.

गांव पधियाना की तरह, पंजाब के दूसरे गांवों से भी ऐसी कहानियाँ आ रहीं हैं कि किसान ट्रैक्टर परेड की तैयारी कैसे कर रहे हैं.

ये तैयारी एक व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि सामूहिक लड़ाई के रूप में की जा रही है.

किसान अमरजीत सिंह बैंस

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"भाई दिल्ली के लिए ट्रैक्टरों के क़ाफ़िले में चलने का आज आख़िरी दिन है. किसान और मज़दूर अपने हाथों में झंडे लेकर मंडी में इकट्ठा हों, जहां से सभी नारा लगाते हुए दिल्ली तक मार्च करेंगे. ये ज़मीन पर विवेक की लड़ाई है, भाई, जिसे हर क़ीमत पर जीतना होगा."

बठिंडा में कोटशमीर गांव के गुरुद्वारे से 24 जनवरी की सुबह की जा रही ये घोषणा दिल्ली की ओर एक ट्रैक्टर मार्च के अंतिम आह्वान की तरह थी.

बीबीसी पंजाबी के जालंधर से पत्रकार पाल सिंह नौली, मोगा के सुरिंदर मान और हरियाणा के सत सिंह के अनुसार, दोनों राज्यों के लगभग हर गांव और क़स्बे के हज़ारों किसान दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं.

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कितने ट्रैक्टर दिल्ली आ रहे हैं?

किसान नेता राजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने बीबीसी पंजाबी को बताया कि सटीक संख्या का अनुमान लगा पाना मुश्किल है, क्योंकि संगठनों के कैडर के अलावा, जो किसान संगठनों से जुड़े नहीं थे, वो भी बड़ी संख्या में दिल्ली आ रहे हैं.

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि उन्हें प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो लाइनों में आने वाले ट्रैक्टरों की लाइन अंबाला से लुधियाना तक थी.

भारतीय किसान यूनियन दोआबा के महासचिव सतनाम सिंह साहनी ने कहा कि 23 जनवरी को फगवाड़ा सब डिवीज़न की ओर से 2500 ट्रैक्टर रवाना किए गए थे. दो हज़ार ट्रैक्टर पहले ही चार ज़िलों - दोआबा जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर से निकल चुके हैं.

किसान बलजीत सिंह संघा ने कहा कि काला संघिया शहर से दो ट्रालियों पर 10 ट्रैक्टर लादे गए हैं जो दिल्ली किसान परेड में शामिल होंगे. उनके साथ, 15 अन्य ट्रैक्टर अकेले चले हैं.

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भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहां) के राज्य महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी ने कहा कि संघ ने उन्हें सुबह 11 बजे दिल्ली के लिए डबवाली और खनौरी इकट्ठा होने के लिए कहा था, लेकिन किसान सुबह आठ बजे ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

उन्होंने बताया कि भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहां) के 30,000 ट्रैक्टरों को आज दिल्ली भेज दिया गया है, जबकि 200 से 300 ट्रैक्टरों के छोटे क़ाफ़िले अभी भी पंजाब की सीमा को पार कर दिल्ली जा रहे हैं.

अखिल भारतीय किसान सभा के नेता सुखजिंदर महेसरी ने कहा कि मोगा, फ़रीदकोट, फ़िरोज़पुर, फ़ाज़िल्का, श्री मुक्तसर साहिब, मानसा और बठिंडा ज़िलों से 50-50 ट्रैक्टरों के क़ाफ़िले आज दिल्ली रवाना हो गए हैं.

जालंधर के दोआबा किसान संघर्ष समिति के ज़िला अध्यक्ष हर्षिलंदर सिंह ने कहा कि संगठन की ओर से किसानों की परेड के लिए लगभग 700 ट्रैक्टर भेजे जा रहे हैं. 23 जनवरी को 300 ट्रैक्टर भेजे गए थे और बाक़ी को दो दिन में भेज दिया जाएगा.

हरियाणा पंजाब एकता मंच के अध्यक्ष सतीश राणा ने बीबीसी को बताया कि हरियाणा के दो लाख ट्रैक्टर किसान परेड में शामिल होंगे.

राणा भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रवक्ता भी हैं. राणा ने कहा कि उनका ये दावा ग्रामीण स्तर पर परेड के लिए पंजीकरण पर आधारित है.

राणा के अनुसार, मुख्य रूप से सिरसा, फ़तेहाबाद, कुरुक्षेत्र और अन्य ज़िलों से टीकरी और सिंघु सीमा तक पहुँच चुके हैं. ट्रैक्टर अनुशासन में रहकर दिल्ली पहुँचे और उनके खाने पीने और अन्य ख़र्चों का प्रबंधन संबंधित खाप पंचायतें कर रही हैं.

वास्तव में, प्रत्येक संगठन के अपने-अपने आंकड़े हैं और संगठनों के बाहर के बहुत से लोग इस ट्रैक्टर मार्च में शामिल हो रहे हैं, इसलिए सटीक आंकड़ा पता नहीं लगाया जा सकता है.

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ट्रैक्टरों की तैयार कैसी है?

किसानों ने अपने ट्रैक्टरों को परेड के लिए उसी तरह तैयार किया है जैसे वो किसी मेले के लिए या युद्ध लड़ने के लिए करते हैं. जालंधर के दोआबा किसान संघर्ष समिति के ज़िलाध्यक्ष हर्षिलेंदर सिंह ने कहा कि उनके क्षेत्र से जो ट्रैक्टर दिल्ली गए हैं, उसमें वो ट्रैक्टर भी शामिल हैं जिसमें ट्रक का इंजन रखा गया है. इस ट्रैक्टर की क़ीमत आछ लाख रुपये है और उस पर और आठ लाख रुपये ख़र्च हुए है.

ज़ीरा के एक मैकेनिक ने रिमोट कंट्रोल के साथ एक ट्रैक्टर डिज़ाइन किया है. इसे बिना ड्राइवर के कम दूरी से चलाया जा सकता है.

ज़्यादातर ट्रैक्टरों पर लोहे के बक्से लगाए गए हैं, ताकि पानी की तेज़ बौछारों, आंसू गैस के गोलों या लाठीचार्ज से बचा जा सके. सोशल मीडिया पर बहुत सारे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां लोग ट्रैक्टर को सजाते हुए नज़र आ रहे हैं.

उनकी क्षमता बढ़ाई जा रही है. बड़े और भारी अवरोध हटाने के लिए उन्हें क्रेन की तरह बना दिया गया है. बंपरों के सामने लोहे के गाडर आदि लगा दिए गए हैं ताकि बाधाओं को तोड़ना मुश्किल न हो.

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"दुनिया की नज़रें हम पर हैं"

यह बात अलग है कि किसान नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि ये आंदोलन शांतिपूर्ण और अहिंसक है.

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवल ने सिंघु सीमा पर 24 जनवरी को कहा है, "दुनिया की नज़रें हम पर हैं. इस परेड के शांतिपूर्ण आयोजन में ही हमारी जीत है. ये दुनिया के लिए एक अजीब दृश्य होगा जब वास्तविक गण, अपने गणतंत्र का जश्न मनायेंगे."

उन्होंने किसानों को किसी भी उकसावे में न आने और शरारती तत्वों पर कड़ी नज़र रखने की चेतावनी दी.

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किसानी के झंडे और झाकियां

किसान नेताओं ने कहा है कि किसानों की परेड में झाकियों को उसी तरह से शामिल किया जाएगा, जैसे सरकारी कार्यों में विभिन्न राज्यों की झाकियों को शामिल किया जाता है. हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के किसान अपनी झाकियों में दिखाएंगे कि पहाड़ी इलाक़ों में फल कैसे उगाए जाते हैं.

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की झाकियां इन राज्यों की धार्मिक और सामाजिक संस्कृति के साथ-साथ किसान जीवन को भी प्रदर्शित करेंगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने संयुक्त किसान मोर्चा के हवाले से दावा किया है कि अगर एक लाख ट्रैक्टर परेड में शामिल होते हैं, तो उनमें से 30 प्रतिशत में किसान जीवन से जुड़ी झाकियां होंगी.

किसानों के संगठनों के झंडों के साथ-साथ तिरंगा, ख़ालसा प्रतीक और लाल झंडों सहित अन्य संगठनों के झंडे ट्रैक्टरों पर भी देखे जा सकेगें. किसान नेता राजिंदर सिंह का कहना है कि हर संगठन को किसानी झंडे और अपनी विचारधारा के अनुसार झंडा लगाने की आज़ादी है.

ट्रॉलियों पर बाबा बंदा सिंह बहादुर के चित्रों के साथ बड़ी संख्या में बैनर भी थे. बाबा बंदा सिंह बहादुर ने 1709 में समाना शहर की घेराबंदी करके ही खेती करने वाले किसानों को ज़मीन का मालिक बनाने का करतब दिखाया था. उस समय कोई ज़मीनदार नहीं था.

इसी तरह, भाई बघेल सिंह और जस्सा सिंह रामगढ़िया के चित्रों वाले बैनर भी प्रदर्शित किए गए थे. बघेल सिंह के पास एक ऐसा व्यक्तित्व था जिसने दिल्ली को अपने दम पर जीत लिया था.

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बैनर पर लिखे नारे कुछ इस तरह से हैं

• हम आतंकवादी नहीं, बल्कि हक़वादी हैं

• मुड़ ला दियांगे मांजने नु कप दिल्लीए

• लै के मुडांगे पंजाब नु हक़ दिल्लीए

• किसान मज़दूर मुलाज़म एकता ज़िंदाबाद

• किसानों को बचाओ - संविधान बचाओ - देश बचाओ

• हम किसान हैं, आतंकवादी नहीं

• गल्लां सिर्फ़ दो, येस या नो

• पूरे भारत के श्रमिकों एकजुट हो जाओ

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दिल्ली जाने वालों के लिए व्यवस्था

किसान संगठनों के नेता भी हैरान हैं कि उम्मीद से कहीं अधिक किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली जा रहे हैं. ये भी पता चला है कि वो किसान जो किसी भी किसान संगठन से जुड़े नहीं हैं, वो भी अपने दम पर दिल्ली जा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश से ख़बरें आ रही हैं कि किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पेट्रोल पंप मालिकों को ईंधन ना भरने के लिए कहा गया है. दूसरी तरफ़, पंजाब और हरियाणा के ग्रामीण मिलकर दिल्ली जाने वाले ट्रैक्टरों के लिए ईंधन और खाने पीने का सामान मुहैया करा रहे हैं.

कंडी किसान संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष जरनैल सिंह गढ़दीवाला ने कहा कि एक ट्रैक्टर में 15 हज़ार का डीज़ल डलता है. पूरी व्यवस्था लोग ख़ुद कर रहे है. हमारा मानना है कि "जब आत्म सम्मान की बात आती है, तो आंदोलन के लिए किसी के बुलावे का इंतज़ार नहीं किया जाता है."

उनका कहना है कि दिल्ली की ओर जाने वाले ट्रैक्टर दिन-रात चल रहे हैं. पंजाब में जिस तरह शहीदी जोड़ मेलों पर सड़कों पर लंगर लगते हैं उसी तरह अब भी सड़कों पर लंगर लगे हुए हैं. कई पेट्रोल पंपों पर किसानों के ट्रैक्टरों में मुफ़्त पेट्रोल डाला जा रहा है.

वीडियो कैप्शन, किसानों का आरोप- सरकार के इशारे पर आंदोलन हिंसक बनाने की साजिश

दिल्ली की सीमा पर किस तरह की तैयारी?

40 से अधिक किसान संगठनों के संयुक्त संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, दिल्ली के सिंघु, टिकरी, ग़ाज़ीपुर, पलवल और शाहजहांपुर सीमाओं से ट्रैक्टर परेड होगी.

दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों के बीच तय कार्यक्रम के अनुसार, 26 जनवरी को राजपथ पर आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड की समाप्ति के तुरंत बाद, किसानों की परेड शुरू होगी. लगभग 100 किमी की दूरी तय करने के बाद, ये शाम छह बजे तक समाप्त हो जाएगी.

इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारी की गई है और प्रत्येक धरना स्थल पर वॉररूम बनाए गए हैं, जो ट्रैक्टर परेड के लिए आवश्यक व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं.

किसान नेताओं के अनुसार, इन प्रत्येक वॉररूम में एक 40 सदस्यीय टीम बनाई गई है, जिसमें डॉक्टर, सुरक्षाकर्मी और सोशल मीडिया मैनेजर शामिल हैं. जहां से ट्रैक्टर परेड गुज़रेगी, वहां 40 एंबुलेंसों को सड़कों पर खड़ा किया जाएगा.

ये परेड शांतिपूर्वक आयोजित हो पाए इसलिए 2500 स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है. उन्हें नियमित तौर से बैज और आईडी कार्ड भी जारी किए गए हैं.

आंदोलन का हिस्सा बने पूर्व सैनिकों को स्थिति पर नज़र रखने के लिए विशेष ड्यूटी दी गई है.

दिल्ली पुलिस सिंघु और टिकरी सीमा पर बैरिकेड हटाने के लिए तैयार हो गई है और किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से परेड निकालने और विरोध स्थल पर लौटने का वादा किया है.

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