कृषि क़ानून: सरकार के प्रस्ताव के पक्ष में कुछ किसान संगठन, आज फिर बातचीत- प्रेस रिव्यू

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केंद्र सरकार के 18 महीनों तक के लिए कृषि क़ानूनों को स्थगित करने और किसानों की समस्याएं सुनने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने के प्रस्ताव को किसान संगठनों ने गुरुवार को ठुकरा दिया है.
हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि पंजाब के 32 कृषि संगठनों में से एक दर्जन से भी ज़्यादा इस प्रस्ताव के पक्ष में थे लेकिन बहुसंख्यक वोट प्रस्ताव को रद्द करने के पक्ष में डाले गए थे.
केंद्र सरकार ने बुधवार को यह प्रस्ताव किसानों के प्रतिनिधियों के समक्ष रखा था और आज शुक्रवार को एक बार फिर किसानों और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि बातचीत करने जा रहे हैं. दोनों पक्षों के बीच ये 11वें दौर की बातचीत होगी.
संयुक्त किसान मोर्चा ने गुरुवार को बयान जारी किया था समें कहा गया था कि किसान तीनों कृषि क़ानूनों को पूरी तरह रद्द करने की मांग करते हैं और इसे रद्द कराए बिना वे वापस नहीं जाएंगे.
इस बयान में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ ट्रैक्टर रैली को लेकर हुई बातचीत का ज़िक्र भी था. किसान 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली निकालना चाह रहे हैं जिसको लेकर बयान में कहा गया कि किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे और यह सिर्फ़ दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर होगी.
दिल्ली पुलिस का प्रस्ताव है कि किसान सिंघु या टिकरी बॉर्डर या फिर ईस्टर्न एंड वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर रैली निकाल सकते हैं. हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि वे राजपथ पर अपनी रैली को लेकर नहीं जाएंगे और ख़ुद को सिर्फ़ आउटर रिंग रोड तक ही सीमित रखेंगे.
किसानों की योजना आउटर रिंग रोड पर 16-17 किलोमीटर की दूरी तक ट्रैक्टर रैली निकालने की है.

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एलएसी पर 10,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती की योजना
पूर्वोत्तर भारत में चीन के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय सेना इस साल के आख़िर तक अतिरिक्त 10,000 जवानों को तैनात करने की योजना बना रही है.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि उत्तर-पूर्व के राज्यों में योजनाबद्ध तरीक़े से सैनिकों की तैनाती कम की जा रही है लेकिन अब पूर्वी सेक्टर में चीनी ख़तरे से निपटने के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जाएगी.
अख़बार लिखता है कि ये जवान रिज़र्व डिविज़न का हिस्सा होंगे जो एलएसी पर किसी भी अनिश्चित घटना की स्थिति में वहां पर फ़्रंटलाइन में तैनात जवानों की सहायता के लिए मौजूद रहेंगे.
उत्तर-पूर्व के राज्यों में काउंटर इंसर्जेंसी और इंटरनल सिक्योरिटी जैसी ड्यूटी में लगे 3,000 जवानों को हटा दिया गया है और इस साल के आख़िर तक 7,000 जवानों को हटा दिया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि सेना को यह सीमा पर ध्यान केंद्रित करने में और पारंपरिक संचालन में मदद करेगा.
कई संसदीय पैनल अपनी रिपोर्ट में यह सिफ़ारिश कर चुके हैं कि सेना को अब काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज़्म जैसी ड्यूटी से हटाकर उसको उसके मुख्य काम पर लगाया जाना चाहिए जो कि देश को बाहर आक्रमण से सुरक्षित करना है.

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अमित शाह के अकाउंट ब्लॉक मामले पर ट्विटर से सवाल-जवाब
नवंबर में गृह मंत्री अमित शाह के ट्विटर अकाउंट को अस्थाई रूप से ब्लॉक करने पर गुरुवार को ट्विटर इंडिया के अधिकारी सूचना प्रौद्योगिकी की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार के मुताबिक़, उस समय ट्विटर का कहना था कि यह 'अनजाने में हुई एक ख़ामी' के कारण हुआ था.
हालांकि, गुरुवार को शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति के आगे बताया गया कि एक पोस्ट में इस्तेमाल हुई तस्वीर के साथ 'कॉपीराइट समस्या' के कारण अकाउंट ब्लॉक किया गया था.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ट्विटर से पूछा कि वह कैसे अपने आपको एक 'स्वस्थ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म' कह सकता है जब उसके 'फ़ैक्ट चेकर' गृह मंत्री के अकाउंट को पहचानने में असफल हैं और उसे ब्लॉक कर दे रहे हैं.
'मिर्ज़ापुर' वेब सीरीज़ के ख़िलाफ़ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'मिर्ज़ापुर' वेब सिरीज़ को लेकर अमेज़ॉन प्राइम वीडियो और सिरीज़ के निर्माता एक्सेल इंटरटेनमेंट को नोटिस जारी किया.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार, वेब सिरीज़ के दूसरे सीज़न को बैन करने की याचिका पर यह नोटिस जारी किया गया है. याचिका में कहा गया है कि यह सिरीज़ 'शहर/ज़िले की ऐतिहासिक और सांस्कृति छवि को पूरी तरह कलंकित कर रही है.'
साथ ही इस याचिका में ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर लॉन्च हो रहे हैं कार्यक्रमों के लिए एक प्री-स्क्रीनिंग कमिटी बनाने की भी मांग की गई है.
उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के एक गांव के निवासी 38 साल के सुजीत कुमार सिंह की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस.ए. बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से भी जवाब तलब किया है.
याचिकाकर्ता के वकील और छोटे भाई रुद्र विक्रम सिंह का कहना है कि उन्होंने मिर्ज़ापुर के पहले सीज़न के ख़िलाफ़ इसलिए याचिका नहीं दायर की क्योंकि वह पहले रिलीज़ हो चुकी थी.
यह याचिका पिछले साल 22 सितंबर को दायर की गई थी जिसमें अक्तूबर में रिलीज़ होने वाली सिरीज़ पर बैन की मांग की गई थी. इस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई.
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