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सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की तारीख़ों का ऐलान, 15 जुलाई तक रिज़ल्ट
भारत के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने गुरुवार, 31 दिसंबर को दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं की तारीख़ों का एलान किया.
तारीख़ों की घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 4 मई से 10 जून के बीच होंगी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 15 जुलाई तक नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी.
मंत्री की घोषणा के बाद सीबीएसई के एग्ज़ैमिनेशन कंट्रोलर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि स्कूलों को इस बात की इजाज़त होगी कि वो 10वीं और 12वीं के प्रैक्टिकल एग्ज़ाम को एक मार्च से शुरू कर सकते हैं.
दसवीं और बारहवीं की परीक्षा की डेट शीट भी जल्द ही जारी कर दी जाएगी.
26 दिसंबर को रमेश पोखरियाल ने बताया था कि 'वर्ष 2021 में सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं कब शुरू होंगी, इसकी घोषणा वे 31 दिसंबर को करेंगे.'
इससे पहले शिक्षा मंत्री ने कोविड-19 महामारी की वजह से बनी परिस्थितियों के मद्देनज़र 10वीं और 12वीं की बोर्ड की परीक्षाएं फ़रवरी तक आयोजित किये जाने से इनकार किया था.
आमतौर पर सीबीएसई बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं जनवरी में शुरू हो जाती हैं और लिखित परीक्षाएं हर वर्ष फ़रवरी के अंतिम हफ़्तों में होती आयी हैं.
डिजिटल माध्यम से शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए शिक्षा मंत्री ने हाल ही में कहा था कि जनवरी-फ़रवरी में परीक्षा कराना संभव नहीं होगा. पर परीक्षाएं कब करायी जायेंगी, इस पर विभिन्न पक्षकार विचार-विमर्श करने के बाद सूचना देंगे.
शिक्षा मंत्री ने आज यह भी बताया कि बोर्ड की परीक्षाएं किन परिस्थितियों में आयोजित होंगी. इस संबंध में ज़रूरी दिशा-निर्देश भी जारी किये गए.
सीबीएसई के कुछ वरिष्ठ अधिकारी पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि बोर्ड की परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं होंगी. पहले कयास लगाये जा रहे थे कि ऑनलाइन कक्षाओं की तर्ज़ पर क्या परीक्षाएं भी ऑनलाइन होने वाली हैं. मगर शिक्षा मंत्रालय का मत है कि परीक्षाएं ऑफ़लाइन ही होनी चाहिए ताकि सभी छात्रों का इसमें शामिल होना सुनिश्चित किया जा सके.
ऑनलाइन एग्ज़ाम के लिए कम्प्यूटर और इंटरनेट की सुविधा ज़रूरी होती है. लेकिन भारत में ऑनलाइन शिक्षा को लेकर यह चिंता लगातार जताई जाती रही है कि सभी छात्रों के पास समान संसाधन नहीं हैं, सभी छात्रों की कम्प्यूटर और इंटरनेट तक पहुँच नहीं है, इसलिए यहाँ ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित करने का मतलब बहुत से छात्रों को इस सिस्टम से बाहर करना होगा.
कुछ निजी टीवी चैनलों से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने हाल ही में कहा कि 'परीक्षाओं के दौरान छात्रों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा. परिस्थितियाँ विषम हैं. पर ऐसा नहीं है कि भारत में बड़ी परीक्षाएं आयोजित नहीं की गईं. नीट जैसी बड़ी परीक्षा भी हमने महामारी के दौर में ही आयोजित की. बोर्ड की परीक्षाएं भी उसी सफल ढंग से आयोजित की जायेंगी.'
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नीट परीक्षा से पहले विपक्षी दलों ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया था. लेकिन काफ़ी हंगामे के बावजूद केंद्र सरकार ने राष्ट्र स्तर की यह परीक्षा कराने का निर्णय लिया था.
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