नेपाल के सियासी संकट को चीन कितना हल कर पाया: प्रेस रिव्यू

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चीन की कथित मध्यस्थता के बावजूद नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बीच राजनीतिक तनाव कम होता नहीं दिख रहा है.

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर बिना सलाह के पार्टी चलाने का आरोप लगाया है.

द हिंदू अख़बार से बातचीत में पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल ने कहा कि ओली अब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता नहीं हैं. हालांकि पार्टी ने उन्हें अभी तक निष्कासित नहीं किया है.

द हिंदू को दिये साक्षात्कार में माधव नेपाल ने कहा, "नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने ओली को पार्टी के सह-अध्यक्ष के पद से निष्कासित कर दिया है. पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और मैं फ़िलहाल पार्टी के नये सह-अध्यक्ष हैं. हम एक साथ ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हैं. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पार्टी में लोकतांत्रिक और पारदर्शी नेतृत्व बना रहे. हालांकि हमने प्रधानमंत्री ओली को पार्टी से निष्कासित नहीं किया है."

पार्टी के सह-अध्यक्ष 'प्रचंड' और माधव कुमार नेपाल ओली पर पार्टी और सरकार को एकतरफ़ा चलाने का आरोप लगाते रहे हैं.

माधव नेपाल ने अपने साक्षात्कार में कहा कि "ओली ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा किये बिना प्रमुख राजनीतिक नियुक्तियाँ कीं. उन्होंने बार-बार पार्टी के मूल समझौतों का उल्लंघन किया. हमने नौकरशाही से जुड़ी नियुक्तियों में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की, लेकिन हमें बुनियादी नीतिगत मामलों में और प्रमुख राजनीतिक नियुक्तियाँ करने से पहले भी शामिल नहीं किया गया."

इस बीच केपी शर्मा ओली का एक वीडियो सामने आया है जिसे उनके प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने शेयर किया है. इस वीडियो में ओली को कहते सुना जा सकता है कि 'वे अब प्रचंड से थक चुके हैं.'

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पिछले रविवार को अचानक से संसद को भंग कर दिया था.

उनके इस फ़ैसले से सत्ताधारी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी दो खेमों में बँट गई है. एक धड़े का नेतृत्व प्रधानमंत्री ओली कर रहे हैं और दूसरे धड़े का पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड'.

चीन को नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का इस तरह बँटना ठीक नहीं लगा. रविवार को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विंग के उप-मंत्री गुओ येज़ोऊ एक उच्चस्तरीय टीम के साथ नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुँचे थे. इस टीम ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों धड़ों से बात भी की.

उम्मीद की जा रही थी कि चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात के बाद नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में चीज़ें सामान्य हो जायेंगी.

राघव चढ्ढा

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सिंघु बॉर्डर पर लगाये गए पाँच वाई-फ़ाई हॉटस्पॉट

दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं और बीते 26 नवंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे किसानों को इंटरनेट की सुविधा हो इसके लिए दिल्ली की आप सरकार ने सिंघु बॉर्डर पर पाँच वाई-फ़ाई हॉटस्पॉट लगवाए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और वाई-फ़ाई हॉटस्पॉट लगाये जाएंगे ताकि सीमा पर मौजूद किसानों को ज़्यादा बेहतर नेटवर्क और कवरेज मिल सके.

दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे कई किसानों ने धीमी और ख़राब कनेक्टिविटी की शिकायत की थी, जिसके बाद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने सिंघु बॉर्डर पर वाई-फ़ाई हॉटस्पॉट लगाने का फ़ैसला किया.

शादी

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'सास-ससुर के ताने शादीशुदा जीवन का हिस्सा'

'सास-ससुर का ताने देकर बात करना या फिर तंज़ कसना शादीशुदा ज़िंदगी का हिस्सा है. लगभग हर परिवार में ऐसा होता है.'

मुंबई के एक सत्र न्यायालय ने 80 और 75 साल के एक जोड़े को अंतरिम ज़मानत देते हुए यह बात कही. इस बुज़ुर्ग दंपति पर उनकी बहू ने ग़लत व्यवहार करने का आरोप लगाया है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, कोर्ट ने महिला की दलीलों को ख़ारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इस बुज़ुर्ग दंपति की याचिका को ख़ारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि इस दंपति के पास समुद्र किनारे एक संपति है.

इस महिला के सास-ससुर का नाम एक साथ इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स की सूची में था. ये उन लोगों के नाम की सूची थी जिनके पास समुद्र किनारे संपति है. इस पर कोर्ट ने कहा कि यह एक बिल्कुल अलग मामला है.

30 वर्षीय महिला का दावा है कि शादी के सिर्फ़ कुछ दिन पहले ही उसके परिवार को यह एहसास हुआ कि उसके पति दरअसल उनके घर काम करने वाली महिला की बायोलॉजिकल संतान है. महिला का आरोप है कि उसे फ्रिज छूने की इजाज़त नहीं थी. उसे लिविंग रूम में सोने को कहा जाता और बासी खाना दिया जाता था.

संसद

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केंद्र सरकार का संसद सत्र बुलाने से इनक़ार, पर राज्यों का रुख़ अलग

केंद्र सरकार ने इस साल शीतकालीन-सत्र नहीं बुलाने का निर्णय लिया है. कोरोना महामारी का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है.

लेकिन दूसरी ओर, कई राज्यों में जिनमें बीजेपी शासित राज्य भी शामिल हैं, वहाँ शीतकालीन-सत्र रद्द नहीं किया गया है.

राज्यों ने इस बार के सत्र के लिए कम समय ज़रूर तय किया है, लेकिन इसे पूरी तरह रद्द नहीं किया गया.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के इस निर्णय से केंद्र के शीतकालीन-सत्र को रद्द किये जाने के फ़ैसले पर सवाल उठने लगे हैं.

इससे पहले विपक्ष भी इस तरह के आरोप लगाता रहा है कि मोदी सरकार सवालों के जवाब देने से बचना चाहती है और इसीलिए सत्र को रद्द कर रही है.

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