DDC Elections: जीता कौन, बीजेपी या गुपकर गठबंधन

बीजेपी

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए

जम्मू-कश्मीर में ज़िला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के परिणाम मंगलवार रात को जारी हो गए. इस चुनाव में पीपल्स अलायंस फ़ॉर गुपकर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) गठबंधन ने कश्मीर में अधिकतर सीटें जीती हैं जबकि बीजेपी ने जम्मू में क़ब्ज़ा जमाया है.

वहीं, बीजेपी ने पहली बार कश्मीर में कोई सीट जीती है.

हालांकि, अभी तक 276 सीटों के परिणाम जारी हुए हैं इसमें से पीएजीडी ने 110 सीटों पर जीत दर्ज की है.

बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में 75 सीटों पर जीत दर्ज की है. जम्मू में 72 सीटें और कश्मीर में तीन सीटें जीती हैं.

50 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.

कांग्रेस पार्टी ने पिछले साल गुपकर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन उसने गठबंधन की विचारधारा से दूरी बना ली थी लेकिन बाद में पार्टी ने कहा था कि वो चुनाव में गठबंधन के साथ है. कांग्रेस ने 26 सीटें जीती हैं.

किसकी जीत है यह?

बीजेपी और पीएजीडी दोनों ने चुनाव परिणामों को अपनी जीत बताया है.

उमर अब्दुल्लाह

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पीएजीडी पर हस्ताक्षर करने वाले मुज़फ़्फ़र शाह ने बीबीसी से कहा, "मैं सिर्फ़ इतना कह सकता हूं कि भारत सरकार की दबाव की रणनीति और धमकी के बावजूद फ़ारूक़ अब्दुल्लाह बीजेपी को हराने में कामयाब हुए हैं. हमने जम्मू-कश्मीर में 50 फ़ीसद से भी ज़्यादा सीटें जीती हैं. जम्मू-कश्मीर के लोगों ने ख़ासकर के कश्मीर घाटी ने बीजेपी के पिछले साल के 5 अगस्त के फ़ैसले को ख़ारिज किया है."

वहीं बीजेपी ने कहा है कि यह साफ़ है कि यह उनकी पार्टी की जीत है.

बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर ने कहा, "आप देखिए इस बार कश्मीर में हमारा वोट प्रतिशत बढ़ा है. इसका मतलब है कि बीजेपी कश्मीर में कुछ कर रही है. मेरा चुनाव टक्कर का था. मैं अपने विरोधी उम्मीदवार से सिर्फ़ नौ वोटों से हारा हूं."

ठाकुर दक्षिणी कश्मीर के त्राल इलाक़े से चुनाव लड़ रहे थे जिसको चरमपंथ का गढ़ समझा जाता है.

उन्होंने कहा, "बीजेपी का ग्राफ़ कश्मीर में काफ़ी बढ़ा है. जिस तरह से दूसरी पार्टियां लोगों से कह रही हैं कि यह अनुच्छेद 370 और दूसरी चीज़ों को लेकर एक संदेश है वैसा बिलकुल नहीं है."

बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व के कई बड़े नेताओं ने कश्मीर घाटी में रुककर पार्टी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार किया था.

पीएजीडी कई बार आरोप लगाती रही कि सरकार उसके उम्मीदवारों को चुनावी क्षेत्रों में प्रचार की अनुमति नहीं दे रही है. सरकार ने कई बार इन आरोपों को ख़ारिज किया.

पीएजीडी जम्मू में हारी?

उम्मीदवार

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पीएजीडी पर हस्ताक्षर करने वालों का मानना है कि वे जम्मू में प्रचार के लिए अधिक समय नहीं दे पाए जिसके कारण जम्मू क्षेत्र में अधिक सीटें नहीं आ सकीं.

पूर्व विधायक और पीएजीडी के संयोजक मोहम्मद यूसुफ़ तारीगामी ने बीबीसी से कहा, "जहां तक जम्मू की बात है तो जम्मू में गठबंधन को जितनी सीटें मिली हैं उसके अलावा अगर आप वोट प्रतिशत देखें तो आप इसको नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं."

"हमारा राष्ट्रीय मीडिया छाती पीट रही है कि बीजेपी ने कश्मीर में तीन सीटें जीती हैं और इस बात पर कोई चर्चा नहीं है कि जम्मू में पीएजीडी ने कितनी सीटें जीती हैं. परिणाम की सही तस्वीर पेश की जाने की ज़रूरत है. मैं स्वीकार करता हूं कि संयुक्त गठबंधन बेहतर कर सकता है लेकिन शायद जम्मू के लोगों तक पहुँचने में कुछ कमियां ज़रूर रही होंगी."

महिलाएं

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तारीगामी से जब पूछा गया कि क्या यह वोटों का राजनीतिक ध्रुवीकरण नहीं है तो उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह कहना बहुत जल्दबाज़ी होगा कि दोनों क्षेत्रों में वोटों के बंटवारे के लिए राजनीतिक ध्रुवीकरण ने बड़ी भूमिका निभाई है. जम्मू के वोट प्रतिशत को अगर देखें तो ऐसा ही कश्मीर में भी हुआ है. यह तथ्य है कि जम्मू में कश्मीर के मुक़ाबले एक अलग नज़रिया है लेकिन इसके बावजूद यह ध्रुवीकरण नहीं है. लेकिन हम इसमें सुलह की प्रक्रिया का एक तत्व देखते हैं."

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ़ जम्मू और कश्मीर के बीच ही विभाजन नहीं हुआ है बल्कि जम्मू में भी यह विभाजन हुआ है.

कश्मीर विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष नूर अहमद बाबा कहते हैं, "यह केंद्र शासित प्रदेश की एक अंतर्निहित संरचना है. बहुत बड़ा विभाजन नहीं हुआ है. जम्मू में हमने देखा कि विभाजन हुआ है. कुछ ऐसे इलाक़े चिन्हित थे जहां पर जम्मू और कश्मीर में सीटें उन्हीं पार्टियों के खाते में गईं."

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट करके कहा है कि पीएजीडी सिर्फ़ कश्मीर केंद्रित नहीं है और जम्मू में 35 सीटें जीतने को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए और कश्मीर में बीजेपी के तीन सीटें जीतने को बढ़ा चढ़ाकर नहीं दिखाना चाहिए.

उमर अब्दुल्लाह

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बीजेपी ने बाक़ी पार्टियों को मात दी?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी और दूसरी पार्टियों के बीच साफ़ विभाजन देखने को मिला है.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार हारून रेशी का कहना है कि बीजेपी ने जम्मू क्षेत्र में हमेशा जीत दर्ज की है.

वो कहते हैं, "आप 2014 का विधानसभा चुनाव और 2019 का संसदीय चुनाव देखें तो बीजेपी ने जम्मू क्षेत्र मे जीत दर्ज की है. कश्मीर में बीजेपी हमेशा हारी है और यह साफ़ विभाजन है. हक़ीक़त यह है कि कश्मीर मुस्लिम बहुल है और बीजेपी कश्मीर में कुछ बड़ा नहीं कर सकती. इस तथ्य के बावजूद बीजेपी ने बीते तीन-चार सालों में कुछ काम किया है और अच्छा काम कर सकती है लेकिन अनुच्छेद 370 का हटाया जाना अभी भी कश्मीरियों को परेशान कर रहा है."

"बीजेपी को दिल्ली की आवाज़ समझा जाता है इसीलिए बीजेपी को कश्मीर में पसंद नहीं किया जाता. कश्मीर में लोग नहीं चाहते कि बीजेपी को उनके मामलों में शामिल होना चाहिए इसलिए कश्मीर में लोग ने अपने फ़ैसले का ऐलान कर दिया है."

पीएजीडी क्या है?

फ़ारूक़ अब्दुल्लाह

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पीएजीडी सात क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनैतिक दलों का गठबंधन है जो तीन महीने पहले बना था.

'गुपकर घोषणापत्र' पर नेशनल कॉन्फ़्रेंस, पीडीपी, पीपल्स कॉन्फ़्रेंस, सीपीएम, कांग्रेस और अवामी नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने हस्ताक्षर किए थे.

पिछले साल अनुच्छेद 370 के समाप्त किए जाने के एक दिन पहले मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के नेतृत्व ने 'गुपकर घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर किए थे.

इस दौरान सबने एकमत से दोहराया था कि 'सभी पार्टियां अपनी जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता और अपनी पहचान को बचाने और सुरक्षित रखने को लेकर एकजुट हैं.'

पिछले साल अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने के बाद डीडीसी चुनाव पहली बड़ी राजनीतिक क़वायद है.

इस दौरान 280 सीटों पर चुनाव हुआ है जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों के 20 ज़िलों की 14-14 सीटों पर आठ चरणों में मतदान हुआ था.

डीडीसी चुनाव पहली बार जम्मू-कश्मीर में हुए हैं.

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