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#FarmersProtest: सरकार ने किसानों से कहा- बुज़ुर्गों और बच्चों को घर वापस भेज दें
दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान नेताओं के बीच शनिवार की बातचीत में ये तय हुआ है कि दोनों पक्ष अगले दौर की बातचीत अब 9 दिसंबर को करेंगे.
समाचार एजेंसियों के मुताबिक, सरकार ने 9 दिसंबर को फिर बैठक की पेशकश करते हुए किसान यूनियनों से समय मांगा ताकि आगे की बातचीत के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार किया जा सके.
बैठक के बाद विज्ञान भवन से बाहर निकले किसान नेताओं के मुताबिक, केंद्र सरकार का कहना है कि वो उन्हें 9 दिसंबर को एक प्रस्ताव भेजेगी. किसान नेता उस प्रस्ताव पर किसानों के बीच चर्चा के बाद उसी दिन बैठक में हिस्सा लेकर अपनी बात रखेंगे.
किसान नेताओं से बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संवाददाताओं से कहा, "हमने किसानों से कहा है कि सरकार उनके सभी पक्षों पर विचार करेगी. यदि हमें किसान नेताओं से सुझाव मिलें तो समाधान खोजना आसान होता. हमने किसान यूनियंस से कहा है कि ठंड और कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए बुजुर्गों और बच्चों को घर वापस भेज दें."
साइलेंट प्रोटेस्ट
इस नतीजे पर पहुंचने से पहले विज्ञान भवन के भीतर सरकार से बातचीत के दौरान किसान नेताओं ने कठोर रुख़ दिखाया और सरकार से जानना चाहा कि किसानों की मांग पर 'हाँ' या 'ना' में से उनका क्या कहना है.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के मुताबिक, बैठक में मौजूद किसान नेता ने बताया कि सरकार ने पुरानी बातें दोहराई, जिसके बाद किसान नेताओं ने चुप रहकर "साइलेंट प्रोटेस्ट' किया."
इससे पहले, किसान नेताओं ने केंद्र सरकार से कहा कि वो पिछली बैठक के बारे में बिंदुवार जवाब दे. सरकार ने इस पर सहमति जताई. बातचीत के दौरान किसान नेताओं ने केंद्र सरकार से कहा कि उन्हें समाधान चाहिए, सरकार की प्रतिबद्धता चाहिए.
किसान नेताओं ने बैठक के दौरान कहा कि वो इस बारे में और चर्चा नहीं करना चाहते और ये जानना चाहते हैं कि सरकार ने किसानों की मांग के बारे में क्या फ़ैसला किया है. बैठक में सरकार ने कहा कि वो पंजाब के किसानों की भावनाएं समझती है और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है.
विज्ञान भवन में दोनों पक्ष शनिवार को दूसरी बार बैठक कर रहे थे. इससे पहले गुरुवार को दोनों पक्षों में बातचीत हुई थी जो किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी. प्रदर्शनकारी 'किसान विरोधी काले क़ानून' वापस लेने की बात कर रहे हैं जबकि सरकार उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश कर रही है.
सरकार की ये कोशिश शनिवार को नाकाम हुई और अब दोनों पक्ष नौ दिसंबर को एक बार फिर बैठक करेंगे.
दूसरी ओर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की पड़ोसी राज्यों से लगने वाली सीमाओं पर आज भी किसान डटे रहे. हरियाणा-दिल्ली के बीच सिंघु बॉर्डर पर जानेमाने सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ ने प्रदर्शनकारी किसानों को संबोधित करते हुए कहा है कि किसानों ने नया इतिहास रच दिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दिलजीत दोसांझ ने कहा, "केंद्र से हमारा एक ही आग्रह है... प्लीज़ हमारे किसानों की मांगें पूरी करो. यहां हर कोई शांतिपूर्ण तरीक से बैठा है और पूरा देश किसानों के साथ है."
विज्ञान भवन में बातचीत के पिछले दौर की तरह इस बार भी किसान नेताओं ने अपना लाया खाना खाया.
इस दौरान दिल्ली की सीमाओं पर जुटे किसान अपने नेताओं के रूख़ को लेकर काफ़ी उत्साहित नज़र आए.
टिकरी बॉर्डर पर बीबीसी संवाददाता पीयूष नागपाल ने प्रदर्शनकारी किसानों से बात की जो पूरी तैयारी के साथ आए हुए हैं.
बीबीसी संवाददाता ने बताया कि बैठक के दौरान किसान साफ़-सफ़ाई और खाना बनाने में जुटे हुए थे, साथ ही बैठक के नतीजों का इंतज़ार कर रहे थे.
दिल्ली की सीमाओं पर जुटे किसानों का कहना है कि वो अपने साथ कई दिनों के लिए खाना-पानी लेकर आए हैं और मांगें पूरी होने तक इसी तरह डटे रहेंगे.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा को मिली जानकारी के मुताबिक अब किसान यूनियनों के नेताओं ने रविवार की सुबह 10 बजे बैठक करने का फ़ैसला किया है.
दिल्ली की सीमाओं पर जुटे किसानों के विरोध प्रदर्शन का शनिवार को दसवां दिन था. इतने दिनों से हरियाणा, पंजाब और अन्य प्रदेशों के किसान दिल्ली के बॉर्डर इलाक़ों पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.
किसान संगठनों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का एलान किया है और कहा है कि उस दिन वे दिल्ली के सभी टोल प्लाज़ा को घेरेंगे.
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