GHMC चुनाव: बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी, ओवैसी बोले- यह अस्थाई जीत

केसीआर, अमित शाह और मोदी

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ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव के शुक्रवार को आए परिणामों में तेलंगाना राष्ट्र समिति सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, उसने 55 सीटें जीती हैं.

इस चुनाव में बीजेपी ने हैरतअंगेज़ प्रदर्शन करते हुए 48 सीटों पर चुनाव जीता है जबकि उसने पिछले चुनाव में सिर्फ़ 4 सीटें जीती थीं.

वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम ने 44 सीटें जीती हैं जबकि पिछले चुनाव में भी एआईएमआईम ने 44 सीटें जीती थीं.

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इस चुनाव में टीआरएस को ख़ासा नुक़सान हुआ है जिसने पिछले चुनाव में 99 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार वो बहुमत से बहुत दूर है.

सबसे ज़्यादा निराशा कांग्रेस को हाथ लगी है जिसे दो सीटों से संतोष करना पड़ा है. वैसे कांग्रेस से किसी चमत्कारिक नतीजों की उम्मीद किसी ने नहीं की थी.

अभी केवल 150 सीटों में से 149 सीटों के चुनाव परिणाम जारी किए गए हैं. एक सीट पर चुनाव चिन्ह को लेकर कुछ विवाद रहा, जिसके चलते कोर्ट ने उसके परिणामों पर रोक लगा दी है. 1 दिसंबर को हुए मतदान में सिर्फ़ 46.55 फ़ीसदी ही मतदान हुआ था.

अमित शाह ने जनता का किया धन्यवाद

बीजेपी कार्यकर्ता

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तेलंगाना में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. रेड्डी साल 2014 से तेलंगाना कांग्रेस प्रमुख थे.

ये चुनाव तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था.

तेलंगाना राज्य जहाँ भारतीय जनता पार्टी के पास 119 में से केवल दो विधायक हैं और जहाँ 17 लोकसभा सीट में केवल 4 सांसद हैं, वहाँ एक नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी थी.

तेलंगाना राष्ट्र समिति ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनाने के लिए मतदाताओं का शुक्रिया अदा किया है.

पार्टी ने कहा है कि कुछ सीटों का नुक़सान हुआ है जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी तेलंगाना के लोगों का आभार जताया है. गृहमंत्री अमित शाह ने इन परिणामों पर एक ट्वीट भी किया है.

उन्होंने तेलंगाना की जनता का 'बीजेपी की विकास की राजनीति में' भरोसा जताने के लिए शुक्रिया अदा किया है.

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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि इससे तेलंगाना में साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे को समझा जा सकता है.

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम का सालाना बजट लगभग साढ़े पाँच हज़ार करोड़ का है और आबादी लगभग 82 लाख है.

क्या बोले ओवैसी?

चुनाव परिणामों के बाद एआईएमआईएम पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कहा कि उनकी पार्टी ने 51 सीटों पर चुनाव लड़के 44 सीटें जीती हैं.

उन्होंने बीजेपी के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने पर कहा कि इनके बढ़ते हुए क़दम को तेलंगाना की जनता आने वाले वक़्त में रोकेगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी की कामयाबी सिर्फ़ अस्थाई कामयाबी है, तेलंगाना में 2023 में जब विधानसभा चुनाव होंगे तब इस पर उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिलेगी.

ओवैसी

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ओवैसी ने कहा कि उनकी एआईएमआईएम पार्टी ने बहुत मेहनत की, हैदराबाद की जनता ने उनमें विश्वास दिखाया है और हैदराबाद की सीटों पर कोई नहीं जीत पाया है.

उन्होंने कहा कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के हैदराबाद संसदीय क्षेत्र में 44 वॉर्ड हैं जिसमें 34 सीटों पर उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा और 33 सीटों पर जीत दर्ज की.

मेयर और डिप्टी मेयर के लिए क्या वो टीआरएस को समर्थन देंगे या नहीं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वो पार्टी पदाधिकारियों और वार्ड काउंसलर से बातचीत करके इस पर फ़ैसला लेंगे.

इस चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार किया था. चुनाव परिणामों के बाद योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया कि 'भाग्यनगर का भाग्योदय प्रारंभ हो रहा है.'

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि बीजेपी के चुनाव जीतने पर हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर किया जाएगा.

भाग्यनगर के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि जहां पर योगी आदित्यनाथ ने प्रचार किया 'वहां पर उनकी टांय-टांय फ़िस हो गई.'

ओवैसी ने कहा, "मेरे हैदराबाद संसदीय क्षेत्र में बीजेपी का ध्रुवीकरण काम नहीं कर पाया. बीजेपी कब तक मेरा नाम लेकर चुनाव लड़ती रहेगी. 51 सीटों पर लड़कर मैंने 44 सीटें जीतीं हैं तो बीजेपी हर जगह मेरा नाम क्यों ले रही थी."

बीजेपी के लिए क्यों था ये चुनाव अहम?

बीजेपी इस चुनाव में अपना भाग्य आज़माकर एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश कर रही थी.

पहला तो ये कि पार्टी अध्यक्ष के तौर पर 2017 में अमित शाह ने लक्ष्य रखा था, बीजेपी को पंचायत से पार्लियामेंट तक ले जाना है. ये उसी लक्ष्य को हासिल करने की बीजेपी की कोशिश है.

दूसरा ये कि टीआरएस में अंदरूनी राजनीति की वजह से राज्य में उनकी पकड़ पहले से थोड़ी ढीली पड़ी है. बीजेपी को लगता है कि टीआरएस पर चोट के लिए ये सही मौक़ा है.

केसीआर की टीआरएस को काफ़ी नुक़सान हुआ है

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इस बार के मॉनसून में जब दो बार तेज़ बारिश हुई तो शहरी इलाक़ों में इसका बहुत बुरा असर पड़ा था. एक तरह से पूरा शहर दो बार डूब गया था. टीआरएस को इस वजह से स्थानीय जनता का रोष झेलना पड़ा.

बीजेपी राज्य में कांग्रेस की जगह ख़ुद को लाने का सही मौक़ा समझ रही है.

साथ ही एआईएमआईएम को दूसरे राज्यों के चुनाव में हमेशा बीजेपी की 'बी-टीम' क़रार दिया जाता है. बीजेपी इस चुनाव में उस भ्रम को तोड़ना चाहती है.

चौथा कारण है जीएचएमसी का बजट. इन नगर निगम का बजट लगभग साढ़े पाँच हज़ार करोड़ रुपये सालाना है. कई राजनीतिक विश्लेषक इस नगर निगम को राज्य की सत्ता की चाबी मानते हैं.

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