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बिहार चुनाव: नतीजों से पहले कांग्रेस में हलचल शुरू, पटना पहुंचे सुरजेवाला - प्रेस रिव्यू
बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाने हैं. इससे पहले आए एग्ज़िट पोल्स में आरजेडी, कांग्रेस और अन्य पार्टियों के महागठबंधन को बढ़त दिखाई मिलती दिख रही है जिसके कारण बिहार कांग्रेस के खेमे में हलचल शुरू हो गई है.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार रविवार शाम रणदीप सुरजेवाला समेत कांग्रेस के आला नेता प्रदेश के नेताओं से मुलाक़ात करने बिहार पहुंचे.
अख़बार लिखता है कि चुनाव जीतने की सूरत में प्रदेश में सरकार बनाने को लेकर गोवा, कर्नाटक या मणिपुर जैसे स्थिति फिर से न हो इसके लिए कांग्रेस अतिरिक्त सतर्क है. इसके लिए पार्टी, चुनावों की घोषणा होते ही अपने विजयी उम्मीदवारों को बिहार से बाहर ले जाने की तैयारी कर रही है.
अख़बार के अनुसार बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा है कि वोटों की गिनती के दिन वरिष्ठ नेता पार्टी के लिए पर्यवेक्षक की भूमिका में होंगे इसलिए उन्हें पटना आना पड़ा है
लेकिन कांग्रेस ने एक अन्य वरिष्ठ नेता ने अख़बार को बताया कि पार्टी का पहले से ही इस तरह के कदम उठाना अच्छी बात हैं क्योंकि बीते वक्त में बिहार के कुछ विधायकों ने अपना पाला बदला है.
एक अन्य नेता का मानना है कि महागठबंधन को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी कोई भी कदम उठा सकती है.
अख़बार का कहना है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद इस तरह की किसी कवायद से निपटने और एनडीए की कोशिश को नाकाम के लिए सुरजेवाला को बिहार भेजा गया है. हाल में सचिन पायलट के विद्रोह के बाद जब राजस्थान में कांग्रेस सरकार पर संकट गहरा गया था उस वक्त सुरजेवाला ने मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी.
भारत-चीन सीमा विवाद: बातचीत रही बेनतीजा
छह नवंबर को पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के मद्देनज़र भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही है. बैठक के बाद दोनों पक्षों ने कहा है कि "अगले बैठक के लिए दोनों पक्षों में सहमति बन गई है."
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार बातचीत के ख़त्म होने के बाद दोनों देशों की तरफ से साझा बयान जारी कर कहा गया है कि "दोनों पक्ष पहले के मुद्दों पर चर्चा करेंगे और साथ ही सीमा के इलाक़ों में शांति और स्थिरता बनाए रखेंगे."
आठवें दौर की इस बैठक में सैन्य कमांडर के साथ साथ दोनों देशों के राजनयिकों ने भी शिरकत की थी.
अख़बार के अनुसार बयान में कहा गया है कि "दोनों पक्षों के बीच एलएसी के आसपास डिसइंगेजमेंट पर सकारात्मक बात हुई. दोनों पक्षों में सहमति बनी है कि वो दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति का पालन करें और ये सुनिश्चित करें कि सीमा पर मौजूद सैनिक संयम बरतें और गलतफहमियों से बचें.
"दोनों देश सैन्य कमांडरों और राजनयिकों के ज़रिए आपस में बातचीत जारी रखने पर सहमत हैं और इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करें."
बाइडन बढ़ा सकते हैं एच-1बी वीज़ा की सीमा
अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन एच-1बी वीज़ा समेत उच्च कौशल वीज़ा की सीमा बढ़ा सकते हैं. ये ख़बर छापी है अख़बार जनसत्ता ने.
अख़बार लिखता है कि वे विभिन्न देशों के लिए रोज़गार आधारित वीज़ा के कोटा को ख़त्म कर सकते हैं. माना जा रहा है कि उनके इस कदम से हज़ारों ऐसे भारतीय पेशेवरों को फायदा होगा जो काम करने के लिए अमेरिका जाना चाहते हैं.
अख़बार लिखता है कि बाइडन ट्रंप प्रशासन के उस फ़ैसले को भी रद्द कर सकते हैं जिसके तहत एच-1बी वीज़ाधारकों के पति या पत्नी के लिए वर्क वीज़ा परमिट को रद्द कर दिया गया था.
अख़बार के अनुसार बाइडन अभियान द्वारा जारी दस्तावेज़ के अनुसार बाइडन पांच लाख से अधिक भारतीयों और एक करोड़ दस लाख ऐसे आप्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता देने का रोडमैप तैयार करेंगे, जिनके पास ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं हैं.
दस्तावेज़ के अनुसार वो अमेरिकी में सालाना 1,25,000 शरणार्थियों को प्रवेश देने का लक्ष्य निर्धारित करेंगे और इसके अलावा सालाना कम से कम 95,000 शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश दिलाने के लिए कांग्रेस के साथ काम करेंगे.
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