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बिहार एग्जिट पोल: कौन किसको दे रहा है कितनी सीटें
बिहार की 243 सीटों पर चुनाव शनिवार को संपन्न हो गए. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.
परिणामों से पहले कई न्यूज़ चैनल और रिसर्च एजेंसियां अपने-अपने एग्ज़िट पोल लेकर आईं हैं.
ज़्यादातर एग्ज़िट पोल किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत देते नज़र नहीं आ रहे हैं. एग्ज़िट पोल के आंकड़े कड़े संघर्ष की ओर इशारा कर रहे हैं. बीबीसी किसी तरह का एग्ज़िट पोल नहीं करता है. नीचे अलग-अलग चैनलों के एग्ज़िट पोल से जुड़े आंकड़े दिए गए हैं.
चुनावी नतीजे इन आंकड़ों से अलग हो सकते हैं.
बहुमत का आंकड़ा 122
एबीपी न्यूज़-सी वोटर के अनुसार एनडीए को 104-128 सीटें और महागठबंधन को 108-131 सीटें आ सकती हैं. इस एग्ज़िट पोल के अनुसार एलजेपी 1-3 सीटों पर सिमटती दिख रही है.
टाइम्स नाउ-सी वोटर ने एनडीए को 116 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है. इस एग्ज़िट पोल में महागठबंधन को 120 सीटें और एलजेपी को 1 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है.
रिपब्लिक-जन की बात के एग्ज़िट पोल के मुताबिक़, एनडीए को 91-117, महागठबंधन को 118-138 और एलजेपी को 5-8 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है.
टीवी-9 भारतवर्ष ने अनुमान लगाया है कि एनडीए को 110-120, महागठबंधन को 115-125 और एलजेपी को 3-5 सीटें मिल सकती हैं.
हालांकि आजतक-एक्सिस माई इंडिया और टूडेज़ चाणक्य के एग्ज़िट पोल के मुताबिक महागठबंधन आसानी से बहुमत हासिल कर सकता है.
आजतक-एक्सिस माई इंडिया के मुताबिक महागठबंधन को 139-161 सीटें मिल सकती हैं और एनडीए के खाते में सिर्फ 69-91 सीटें आने का अनुमान है.
टूडेज़ चाणक्य के मुताबिक महागठबंधन को 180 सीटें मिलने का अनुमान है और जेडीयू को सिर्फ़ 55. पोल में 11 सीटों का मार्जिन रखा गया है यानी कि दोनों की 11 सीटें कम ज़्यादा हो सकती हैं.
तीसरे चरण में 55 फ़ीसदी से अधिक मतदान
चुनाव आयोग का कहना है कि तीसरे चरण में ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 55.22 प्रतिशत वोटिंग हुई. चुनाव आयोग के मुताबिक़, अंतिम आंकड़े इससे अधिक होंगे.
28 नवंबर को हुए पहले चरण के चुनाव में 55.68 प्रतिशत और 3 नवंबर को हुए दूसरे चरण में 55.70 प्रतिशत वोटिंग हुई थी.
बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान सात सितंबर से शुरू हुआ था और क़रीब दो महीने बाद पाँच नवंबर तक चला.
भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार दिनों में अलग-अलग स्थानों पर 12 जनसभाएँ कीं.
महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ही सबसे बड़ा चेहरा साबित हुए. उन्होंने अकेले 251 से भी ज़्यादा चुनावी सभाओं को संबोधित किया.
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