बिहार: मुंगेर की एसपी लिपि सिंह को पद से क्यों हटाया गया?

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
बिहार के मुंगेर ज़िले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान गोली चलने और उसमें एक व्यक्ति की मौत के बाद चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से एसपी लिपि सिंह और डीएम राजेश मीणा को हटा दिया है. साथ ही डिविज़नल कमिश्नर असंगबा चुबा आओ को सात दिन में इस मामले की जाँच करने के आदेश दिए हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगलवार को पंडित दीन दयाल चौक के पास पुलिस ने लोगों की भीड़ को तुरंत प्रतिमा विसर्जन करने को कहा था जिसे लेकर बाद में पुलिस और स्थानीय लोगों में कहासुनी हुई और गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और मृतक के परिवार ने पुलिस पर गोली चलाने का आरोप लगाया था.
इस घटना के बाद तब के डीएम राजेश मीणा ने बीबीसी को बताया था कि पुलिस की तरफ से गोलियाँ नहीं चलाई गईं बल्कि असामाजिक तत्वों ने गोली चलाईं जिसमें छह लोग घायल हुए हैं और इसकी जाँच चल रही है.

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दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के मौक़े पर गोली चलने से वहाँ लोगों में नाराज़गी है. लोग पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं तो विपक्ष इस घटना की तुलना 'जनरल डायर' के आदेश से कर रहा है.
निर्दलीय विधायक अनंत सिंह पर की गई कार्रवाई और अपने सख़्त रवैये के लिए सराहना बटोरने वाली लिपि सिंह अब दूसरे कारणों से सुर्खियों में हैं.
इस घटना के बाद न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने लिपि सिंह का एक बयान ट्वीट किया था जिसमें कहा गया था कि "दुर्गा पूजा के दौरान हुए विसर्जन में कुछ असमाजिक तत्वों ने पथराव शुरू किया जिसमें 20 पुलिसकर्मी घायल हो गए और भीड़ में किसी ने गोली चलाई जिसकी वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई. मगर स्थिति नियंत्रण में है."
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर और ट्विटर पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और पुलिस की इस मामले में आलोचना की.

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बीबीसी के सहयोगी पत्रकार नीरज प्रियदर्शी ने इस घटना के बाद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों से बात की जिन्होंने पूरी घटना के लिए एसपी लिपि सिंह को दोषी ठहराया और आरोप लगाया कि उन्हीं के कहने पर वहाँ पुलिस ने गोली चलाई थी.
हालांकि इस घटना से पहले लिपि सिंह को मुंगेर के लोग रॉबिनहुड नाम से पुकारते थे. जब उन्होंने मुंगेर की एसपी का पदभार संभाला था तो लोगों ने फूलों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया था. लोगों का कहना था कि उन्हें एक ऐसी कड़क अफ़सर मिली हैं जिसकी मुंगेर को ज़रूरत थी. लोग ये भी कहते हैं कि उनके आने के बाद अपराध में कमी भी आई.
लेकिन इस घटना के बाद एसपी लिपि सिंह के बारे में मुंगेर शहर के लोगों की राय नकारात्मक हो गई है.
मुंगेर के एक युवा पिंटू श्रीवास्तव, लिपि सिंह को जनरल डायर के नाम से बुलाते हैं.

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वे कहते हैं, "लिपि सिंह को पुलिसिंग करने नहीं आता, अगर आता तो वे विसर्जन जैसे संवेदनशील समय में बाहर के सुरक्षा बलों को हमारे ख़िलाफ़ नहीं उतारतीं. यहाँ ज़रूरत थी लोकल पुलिस की क्योंकि लोकल पुलिस को विसर्जन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी."
शादीपुर इलाक़े में बड़ी दुर्गा मंदिर के पास मिले विवेक सिंह कहते हैं, "लिपि सिंह ने जो किया वैसा आज तक किसी अफ़सर ने नहीं किया. यहाँ एक से बढ़कर एक अफ़सर आए. लिपि सिंह तानाशाह जैसा व्यवहार करती हैं. एक अच्छा पुलिस अफ़सर आता है तो इलाका शांत रहता है, लेकिन जब से लिपि सिंह आई हैं, मुंगेर शहर तब से अशांत है. रामनवमी के समय भी लिपि सिंह ने कुछ इसी तरह करने की कोशिश की थी."
दीनदयाल चौक के पास रहने वाले संजय कुमार लिपि के समर्थन में अपनी बात रखते हैं.
वे कहते हैं, "अगर आपके पिता सरकार के आदमी हैं तो सवाल उठना लाज़िम है. लेकिन केवल इसी वजह से लिपि सिंह पर सवाल उठाना ठीक नहीं. यदि इस घटना को छोड़ दें तो लिपि सिंह का मुंगेर में अब तक ठीकठाक प्रदर्शन रहा है. उन्होंने अपराधियों के मन में ख़ौफ़ पैदा किया है. बड़ी संख्या में अवैध बंदूक फैक्ट्रियों और हथियार माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ एक्शन लिया है."
इधर ट्विटर पर भी लोगों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
@TrulyMonica नामक ट्विटर यूज़र ने लिखा है कि ''दुर्गा पूजा के जुलूस के दौरान मुंगेर पुलिस को गोलियाँ चलाने का आदेश लिपि सिंह, एसपी और आईपीएस अधिकारी ने दिया. मीडिया क्यों कह रही है कि ‘कुछ लोगों ने गोलियाँ चलाई.''
@GulliCri नामक हैंडल से सिद्धार्थ सुमन लिखते हैं कि लिपि सिंह, एसपी मुंगेर एक समुदाय के लिए धब्बा हैं. उन्होंने अपनी अंतरआत्मा को अपने राजनैतिक पिता को बेच दिया है. दुर्गा पूजा विसर्जन मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है.
आईपीएस एम नागेश्वर राव ने भी ट्वीट के ज़रिए इस घटना पर कार्रवाई करने की माँग की है.
वे लिखते हैं कि मुंगेर की एसपी लिपि सिंह को चार साल का अनुभव है और वे नई हैं. डीएम राजेश मीणा वरिष्ठ हैं और स्वयं पैदा की गई इस समस्या के लिए डीएम और एसपी ज़िम्मेदार हैं. बिहार के मुख्यमंत्री को दोनों का तबादला करना चाहिए. इस मामले की न्यायिक जाँच करवानी चाहिए और मृत के परिवार को पाँच करोड़ और सरकारी नौकरी मुआवज़े के तौर पर दी जानी चाहिए.
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने हाई कोर्ट की निगरानी में जाँच की माँग की थी. वहीं कांग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला और महागठबंधन के अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर हमला बोलते हुए सवाल पूछा कि मुंगेर पुलिस को ‘जनरल डायर’ जैसी कार्रवाई करने के आदेश किसने दिए थे.
तेजस्वी यादव ने इस घटना पर अपना विरोध जताते हुए ट्वीट किया, ''महागठबंधन के साथियों संग तानाशाही एनडीए सरकार की गोली से शहीद श्रद्धालुओं को मौन रख श्रद्धांजलि अर्पित की. सीएम बताएं पुलिस को जनरल डायर बन निर्दोषों पर क्रूरतापूर्वक गोली चलाने की अनुमति किसने दी? 10 नवंबर को सरकार बनते ही दोषियों को सख़्त सज़ा निश्चित.''
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आपको याद ही होगा कि ब्रिगेडियर जनरल रेजिनॉल्ड डायर ने 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियावालां बाग़ में निहत्थे लोगों की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया था. इस घटना में 300 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

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कौन हैं लिपि सिंह
ये माना जाता है कि विपक्ष लिपि सिंह पर निशाना इसलिए भी साध रहा है क्योंकि वे राज्यसभा से जेडीयू सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह की बेटी हैं.
उनके पिता उत्तर प्रदेश काडर के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के क़रीबी माने जाते हैं.
लिपि सिंह के पति सुहर्ष भगत भी आईएएस अफ़सर हैं. इससे पहले पिछले साल भी 2016 बैच की आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह मोकामा ज़िले के बाहुबली और निर्दलीय विधायक अनंत सिंह के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई को लेकर चर्चा में आई थीं.
विधायक के मोकामा स्थित पैतृक गाँव के घर से एक एके-47 और विस्फोटक बरामद हुआ था जिसके बाद अनंत सिंह को जेल जाना पड़ा.
उस समय अनंत सिंह ने आरोप लगाया था कि आरसीपी सिंह के इशारों पर लिपि सिंह ने उनपर कार्रवाई की है.
लिपि सिंह की इस कार्रवाई के बाद उन्हें शोभा ओहतकर के बाद दूसरी कड़क महिला कहा जाने लगा था और उन्हें लेडी सिंघम कहकर भी बुलाया जाने लगा.
शोभा ओहतकर 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी थीं और उन्होंने कई संगठित अपराधों जैसे बैंक लूटपाट, अपहरण, फ़िरौती और कॉट्रेक्ट कीलिंग जैसी वारदातों पर लगाम लगाई थी.
वहीं लिपि सिंह की अवैध हत्यारों को ज़ब्त करने और बड़ी संख्या में अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को लेकर उनकी ख़ासी प्रशंसा हुई थी.
एक अख़बार को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि मैं सबूतों के आधार पर कार्रवाई करती हूँ और मेरा किसी राजनीतिक गतिविधि के कोई लेना-देना नहीं है.
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