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अमरीका में हुई एक शादी पर कुर्ग के लोग नाराज़ क्यों?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
अमरीका में एक समलैंगिक जोड़े की शादी में पारंपरिक कपड़े पहनने को लेकर कर्नाटक के कोडावा समाज में रोष है.
समुदाय ने शादी में पारंपरिक कपड़े पहनने के लिए कोडावा समुदाय के ही एक सदस्य का बहिष्कार कर दिया है.
कैलिफ़ोर्निया में कोडावा समुदाय के सदस्य के उत्तर भारतीय व्यक्ति से हुई समलैंगिक शादी को समुदाय ने ईशनिंदा करार दिया है.
कोडावा समुदाय लड़ाकों का समुदाय है, जिसने फ़ील्ड मार्शल केएम करिअप्पा और थलसेना के पहले जनरल, जनरल के एस थिम्मैया जैसे नाम दिए हैं.
कोडावा समाज, माडिकेरी के अधयक्ष केएस देवैय्या ने बीबीसी को बताया, "हमारे समुदाय की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का मज़ाक बनाया गया है. हम इस पर कड़ा ऐतराज़ जताना चाहते हैं. हमारा ऐतराज़ इस बात पर है कि ये हमारी संस्कृति के ख़िलाफ़ है."
दक्षिण भारत के कोडावा समुदाय का नाता पूर्व के कुर्ग राज्य से है जहां कॉफी और मसालों की खेती होती है. कुर्ग का नाम बदल कर अब कोडागु कर दिया गया है.
समुदाय के नेताओं को अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि इंटर-कास्ट शादियों के कारण उनकी आबादी लगातार कम होती जा रही है. वो दावा करते हैं कि अब उनकी संख्या घटकर केवल 1.25 लाख ही रह गई है.
हमने केएस देवैय्या से पूछा कि समाज की नाराज़गी किस बात को लेकर है- शरत पोनप्पा पुट्टिचंदा के समलैंगिक शादी करने से या फिर शादी में कोडावा समुदाय के पारंपरिक कपड़े पहनने पर.
इस सवाल पर केएस देवैय्या इतने नाराज़ हो गए कि उन्होंने ये कहते हुए फ़ोन रख दिया कि, "वो इंसान से शादी करें, आदमी से या फिर किसी गधे से, वो हमारी चिंता का विषय नहीं है. हमारा मुद्दा ये है कि ये हमारी संस्कृति के ख़िलाफ़ है."
समुदाय के ख़त्म हो जाने का डर
कोडावा समाज, माडिकेरी एसोसिएशन ने शरत पोनप्पा पुट्टिचंदा के बहिष्कार का फ़ैसला लिया है. नाम न बताने कती शर्त पर एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि कैलिफोर्निया में संदीप दोसांज से हुई शादी के दौरान शरत ने समुदाय का पारंपरिक पहनावा कुप्या-छेले पहना था.
बीबीसी ने शरत पोनप्पा से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन अब तक उनसे बात नहीं हो पाई है. लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उनकी शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया में आने के बाद से कोडावा समुदाय के लोग उनसे नाराज़ है.
जानेमाने क्रिमिनल लॉयर और कोडावा समाज, बंगलुरू के अध्यक्ष और एटी नानैय्या ने बीबीसी हिंदी को बताया, "ये सुन कर हमें आश्चर्य हुआ कि हमारे पारंपरिक पहनावे का इस्तेमाल समलैंगिक शादी में किया गया है. वहां एक आदमी से शादी करना उनके लिए क़ानूनी तौर पर मान्य होगा लेकिन परंपरा और संस्कृति की कीमत पर ये नहीं होना चाहिए. उन्होंने हमारे छोटे-से समुदाय की इज़्ज़त पर धब्बा लगाया है. हमारे समुदाय में अअब 1.25 लाख लोग ही तो बचे हैं."
नानैय्या बताते हैं कि कोडावा समुदाय के लोग कुप्या-छेले के साथ पगड़ी बांधते हैं और साथ में अपनी कमर पर "पिचेकट्टी" बांधते हैं जो सिख और गोरखाओं के कृपाण या खुक्री की तरह का एक हथियार होता है. ये लोग कमर पर मांडेथुनी बांधते हैं जो बेल्ट की तरह होता है. कमरबंद के लिए कोडावा समुदाय के लोग शॉल का इस्तेमाल करते हैं.
नानैय्या बताते हैं "समुदाय का कोई व्यक्ति अपने जीवन में दो ही बार सफेद रंग के कपड़े पहनता है. पहला जब वो दूल्हा बनता है और दूसरा जब उसकी मौत हो जाती है. बाकी स,भी मौक़ों पर वो काले रंग के कपड़े पहनता है. उसका पहनावा उसके कर्म की तरफ इशारा होता है."
वो कहते हैं, "अगर हमारे समुदाय के लोग समलैंगिक शादियां करने लगे तो कुछ ही वक्त में हमारा समुदाय ही ख़त्म हो जाएगा. हम भी पारसियों की तरह हो जाएंगे."
"मैं आपको बता सकता हूं कि जो उन्होंने किया है उससे केवल समुदाय के वरिष्ठ लोग ही नाराज़ नहीं हैं, मैंने कई युवाओं से भी बात की है और वो भी इस शादी से नाखुश हैं."
हाल के वक्त में कोडागु ज़िले में कोडावा समाज ने इंटर-कास्ट शादियों के लिए मैरिज हॉल देना बंद कर दिया है.
नानैय्या कहते हैं, "अगर दूल्हा हमारे समाज से बाहर शादी करता है तो हम उसे समाज के पारंपरिक कपड़े पहनने की अनुमति नहीं देते."
वो कहते हैं, "इनका बहिष्कार कर के हम अपने समाज के दूसरे युवाओं को इस तरह की शादी करने से रोकना चाहते हैं."
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