हाथरस: रेप, मेडिकल जाँच और मृतका का बयान...बातें जो अब तक बिल्कुल साफ हैं

हाथरस मामला

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    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हाथरस से

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए कथित गैंगरेप के मामले में अब नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं.

भारतीय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की नज़र भी इस मामले पर है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की घोषणा भी कर दी है. सरकार ने एसआईटी को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए दस और दिन का समय दिया है.

हर बीतते दिन के साथ इस घटना को लेकर नई बातें सामने आ रहीं हैं और विरोधाभासी दावे किए जा रहे हैं.

मीडिया में भी सूत्रों के हवाले से कई तरह की ख़बरें आ रही हैं. लेकिन, यहां वही जानकारियां दी गई हैं जिनकी पुष्टि बीबीसी ने की है.

घटनास्थल पर जांच करती यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी की टीम
इमेज कैप्शन, घटनास्थल पर जांच करती यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी की टीम

घटना कब हुई?

14 सितंबर की सुबह मृतक युवती अपनी मां और भाई के साथ घर से क़रीब आधा किलोमीटर दूर घास काटने गई थी. मृतक युवती के परिवार के मुताबिक जब वो घास काटने गए तब सुबह के आठ-पौने आठ बजे होंगे.

ठीक-ठीक समय उन्हें मालूम नहीं है. बड़े भाई के मुताबिक वो घास की एक गठरी लेकर घर आ गया था. इसके बाद मां को युवती बाजरे के खेत में बेसुध और नग्नावस्था में मिली थी.

मृतक युवती के परिवार के मुताबिक घटना सुबह साढ़े आठ बजे से नौ बजे के बीच की होगी. इसका भी ठीक-ठीक समय उन्हें याद नहीं है. थाने में दी गई पहली तहरीर में भाई ने घटना का समय सुबह 9.30 बजे बताया है.

मृतक युवती के बड़े भाई के मुताबिक वो करीब पौने नौ बजे घास लेकर घर आए थे और उन्हें करीब सवा नौ बजे घटना का पता चला था जिसके तुरंत बाद वो अपनी मां के साथ बहन को लेकर थाने गए थे. वो उसे लेकर घर आने के बजाए सीधे थाने ही गए थे.

वो कहते हैं, 'उसे खेत से उठाकर सड़क तक लाने में भी टाइम लगा. वो बीच में और पीछे मां बैठी थी, हम उसे लेकर सीधे थाने पहुंचे और बाहर चबूतरे पर उसे लिटा दिया.' पीड़िता की मां के मुताबिक रास्ते में वो कुछ होश में थी और उसे उल्टियां आई थीं. उसका शरीर लटक रहा था.

चंदपा थाने में मृतक युवती की मां से पूछताछ करते पुलिसकर्मी
इमेज कैप्शन, चंदपा थाने में मृतक युवती की मां से पूछताछ करते पुलिसकर्मी

परिवार थाने कब पहुंचा?

तत्कालीन एसएसपी विक्रांत वीर के मुताबिक पीड़ित परिवार साढ़े नौ बजे के आसपास चंदपा थाने पहुंचा था और यहां साढ़े दस बजे पहली एफ़आईआर दर्ज कर ली गई थी. पहली एफ़आईआर पर समय साढ़े दस बजे ही अंकित है.

घटनास्थल से थाना करीब पौने दो किलोमीटर दूर है. थाने के चबूतरे पर रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें पीड़िता ने अपने साथ जबरदस्ती किए जाने का जिक्र किया है.

मौके पर मौजूद रहे एक पत्रकार के मुताबिक ये वीडियो तत्कालीन एसएचओ ने रिकॉर्ड किया है और इसमें पुलिसकर्मी पीड़िता से प्रश्न कर रहे हैं.

हालांकि, तत्कालीन एसएचओ और अब निलंबित डीके वर्मा का कहना है कि ये वीडियो उन्होंने नहीं बल्कि पत्रकार ने ही रिकॉर्ड किया था और पीड़िता से वो ही प्रश्न कर रहे हैं.

इस वीडियो में पीड़िता ने मुख्य आरोपी के नाम का ज़िक्र किया है जो उसके भाई का हमनाम भी है.

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चंदपा थाना

मृतक युवती के अपने बयान में ज़बरदस्ती की बात करने के बावजूद उसके भाई की ओर से थाने में दी गई तहरीर में सिर्फ़ जान से मारने की कोशिश का जिक्र है और एफ़आईआर इसी आधार पर हुई है.

तहरीर पर घटना का वक्त साढ़े नौ बजे बताया गया है.

पुलिस की ओर से दिए गए सादे काग़ज़ पर पीड़िता के बड़े भाई ने तहरीर दी थी.

पहली तहरीर में रेप का ज़िक्र क्यों नहीं किया इस सवाल पर उसका भाई कहता है, 'उस समय तक मुझे जो पता था मैंने तहरीर में वही लिखा. मैंने थाने में बने ऑफ़िस में अकेले बैठकर तहरीर लिखी थी. तब जो मुझे समझ आया वही मैंने लिखा.'

एफ़आईआर दर्ज होने के बाद परिजन पीड़िता को एक ऑटो में बैठाकर हाथरस ज़िला अस्पताल ले गए थे. एक महिला समेत दो पुलिसकर्मी भी उनके साथ थे.

पीड़िता की हालत ख़राब हो रही थी इसलिए परिजनों ने एंबुलेंस का इंतजार नहीं किया. पीड़िता के एक रिश्तेदार कहते हैं कि एंबुलेंस मौके पर पहुंची भी नहीं थी.

बांगला जिला अस्पताल
इमेज कैप्शन, मृतक युवती को बांगला जिला अस्पताल, हाथरस लाया गया था जहां उसकी एमएलसी नहीं की गई थी

हाथरस के ज़िला अस्पताल में नहीं हुई एमएलसी

हाथरस के ज़िला अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक पीड़िता सुबह 11.35 बजे वहां पहुंची थी. ये एक आपराधिक मामला था बावजूद इसके हाथरस के अस्पताल में पीड़िता की एमएलसी रिपोर्ट तैयार नहीं की गई थी.

हाथरस ज़िला अस्पताल की ओर से रेफरल स्लिप पीड़िता के परिजनों को दी गई थी जिसके आधार पर उसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था.

हाथरस ज़िला अस्पताल में मौजूद एक डॉक्टर ने बीबीसी से कहा, 'पीड़िता की हालत नाजुक थी ऐसे में यहां उसकी एमएलसी ना करके उसे तुरंत अलीगढ़ रेफर कर दिया गया था.'

अस्पताल के रेफरल नोट पर भी डॉक्टर ने लिखा है कि हालत गंभीर होने की वजह से एमएलसी नहीं हो सकी है. पीड़िता को जब अस्पताल लाया गया था तो वो अर्ध बेहोशी की हालत में थीं.

पर्ची
इमेज कैप्शन, पीड़िता को बिना एमएलसी किए ही अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया था

हाथरस ज़िला अस्पताल में पीड़िता को फर्स्ट एड दी गई थी और इंजेक्शन भी लगाया गया था. उसे यहां ड्रिप भी लगाई गई थी.

हाथरस ज़िला अस्पताल में भी पीड़िता का बयान पत्रकारों ने रिकॉर्ड किया था. इसमें भी पीड़िता ने अपने साथ ज़बरदस्ती किए जाने का ज़िक्र किया है.

थाने और ज़िला अस्पताल में रिकॉर्ड किए गए इन वीडियो में पीड़िता की मां का भी बयान है.

उन्होंने रेप का ज़िक्र नहीं किया है बल्कि 'बेटी को बाजरे के खेत में खींच लिए जाने' का ज़िक्र किया है. इसी बयान में उन्होंने ये कहा है, ''पीछे से कोई आ जाए बाजरा में तो हमें क्या पता. करो कुछ ना है, नार काटी है. ये ही बात है, और कोई बात ना है.''

पीड़िता की मां का वीडियो रिकॉर्ड करने वाले पत्रकार ने बीबीसी से कहा, 'वो अपनी बात बदल रही थीं.' उन्होंने बताया कि वीडियो क़रीब दस चंदपा थाने में तब रिकॉर्ड किया गया था जब पुलिस पीड़ितों से मामले की जानकारी ले रही थी.

मृतक युवती की मां के इस बयान को मीडिया और सोशल मीडिया पर बार-बार प्रसारित करके कहा जा रहा है कि उन्होंने रेप की कोई बात नहीं की है. जब यही सवाल मैंने उनसे किया तो उनका कहना था, 'शुरू में हम ना बोले कि बिटिया का जीवन बच जाए.'

मृतक युवती की चाची ने बीबीसी को बताया, ''उसकी पाजामी उतरी हुई थी. मां ने अपनी साड़ी से उसे ढंका था.''

रेप की बात कब सामने आई?

हाथरस पुलिस के तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर के मुताबिक मृतक युवती को बेहतर इलाज के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था.

यहां जब उसकी हालत कुछ बेहतर हुई तो जांच अधिकारी जो कि सर्किल ऑफ़िसर थे उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में मृतक युवती का बयान दर्ज किया.

पुलिस के मुताबिक इस बयान में मृतक युवती ने अपने साथ छेड़छाड़ की बात कही और एक और अभियुक्त का नाम लिया जिसे एफ़आईआर में जोड़ लिया गया.

उनके मुताबिक पीड़िता ने गैंगरेप के बारे में सबसे पहले 22 सितंबर को बताया था और उसी दिन एफ़आईआर में आईपीसी की धारा 376 डी जोड़ ली गई थी.

पीड़िता ने अपने पहले बयान में स्पष्ट तौर पर रेप का जिक्र नहीं किया था. पुलिस के मुताबिक पहली बार उसने 22 सितंबर को गैंगरेप के बारे में बताया था.

अस्पताल की रिपोर्ट
इमेज कैप्शन, अलीगढ़ के अस्पताल में पीड़िता की देखरेख कर रहे डॉक्टरों ने अस्पताल के फोरेंसिक विभाग को 22 सितंबर सुबह 11.30 बजे सूचित किया था कि पीड़िता अपने साथ रेप का प्रयास होने की जानकारी दे रही है.
अस्पताल का नोट
इमेज कैप्शन, मृतक युवती का मुआयना करने वाले डॉक्टर ने अपने नोट में लिखा है कि उसने सबसे पहले रेप के बारे में 22 सितंबर को ही बताया था.

अलीगढ़ के अस्पताल में मृतक युवती का बयान दर्ज करते हुए पुलिस ने जब उससे पूछा था कि पहले बयान में आपने सिर्फ़ एक अभियुक्त का नाम लिया था और छेड़खानी की बात कही थी तो पीड़िता ने कहा था, 'तब मैं पूरी तरह होश में नहीं थी.'

क्या अब कोई नई जानकारी सामने आई है, इस सवाल पर हाथरस के नए एसपी विनीत जायसवाल ने कहा, ''अभी मेरी जानकारी में कोई नया तथ्य नहीं आया है. हो सकता है कि एसआईटी को कुछ जानकारी मिली है. इस बारे में एसआईटी ही अधिक बता पाएगी.''

तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर ने बीबीसी से कहा था कि पुलिस ने अस्पताल में मृतक युवती के बयान वीडियो पर भी रिकॉर्ड किए हैं.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

पीड़िता जब अलीगढ़ पहुंची तो हालत कैसी थी?

पीड़िता 14 सितंबर को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर अलीगढ़ के अस्पताल में भर्ती हुई थी.

उस दौरान वहां रहे एक डॉक्टर ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि वो अर्ध बेहोशी की हालत में थी. उसे समय, जगह और इर्द-गिर्द मौजूद लोगों का तो होश था लेकिन वो पूरे होश में नहीं थी.

पीड़िता को जब अलीगढ़ लाया गया तब कोई पुलिसकर्मी उसके साथ नहीं था. पिता ओमप्रकाश ने उसे भर्ती कराया था.

परिवार के मुताबिक अस्पताल में भर्ती किए जाने के दौरान पीड़िता के कपड़े बदले गए थे.

जो कपड़े उसने पहने थे वो परिवार ने अपने पास रख लिए थे जिन्हें बाद में पुलिस को सौंप दिया गया.

मृतक युवती का अंतिम बयान

22 सितंबर को जब पीड़िता की हालत बिगड़ी तो ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल अफसर ने अधिकारियों को सूचित कर उसका अंतिम बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) रिकॉर्ड करने की गुज़ारिश की.

ये मेडिको लीगल केस था और ऐसे मामलों में डॉक्टर पीड़ित की हालत खराब होने या ये महसूस होने कि अब वो मर सकता है, उसका अंतिम बयान दर्ज करवाते हैं.

अस्पताल के एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि अंतिम बयान रिकॉर्ड किए जाते वक़्त पीड़िता के पास डॉक्टर, मजिस्ट्रेट, नर्स मौजूद थे. इस दौरान उसके परिजनों को बाहर निकाल दिया गया था ताकि वो बिना किसी दबाव के अपना बयान दर्ज करा सके.

सूत्र के मुताबिक पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया. उसने कहा कि दो लोगों ने उसके साथ रेप किया जिसके बाद वो बेहोश हो गई थी. उसने दो और लोगों के नाम लिए. उसने कहा कि बेहोश होने के बाद क्या हुआ ये उसे याद नहीं है.

ये अंतिम बयान अस्पताल में 22 सितंबर को शाम 5.30 बजे से लेकर 5.50 बजे के बीच रिकॉर्ड किया गया है. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कहा है कि पीड़िता ने पहली बार 22 सितंबर को कहा कि उसके साथ गैंगरेप हुआ.

पीड़िता का बयान दर्ज किए जाने के बाद उसकी मां का बयान भी अस्पताल में दर्ज किया गया था. इस बयान में मां ने भी चार लोगों के नाम लिए और बेटी के साथ गैंगरेप होने की बात कही.

पीड़िता की चिता
इमेज कैप्शन, यूपी पुलिस ने रात के अंधेरे में बिना परिजनों की मौजूदगी के पीड़िता का अंतिम संस्कार किया.

मृतक युवती का अंतिम संस्कार

मृतक युवती के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बिना उनकी अनुमति के उनकी गैर मौजूदगी में जबरदस्ती मृतक युवती का अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन, बीबीसी से बातचीत में हाथरस के तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर ने कहा था कि मृतक युवती के परिवार की अनुमति ली गई है.

यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया है कि क़ानून व्यवस्था के मद्देनज़र रात में अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया.

एक स्थानीय व्यक्ति ने चिता के पास से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो बीबीसी को मुहैया कराया है.

चार मिनट का ये वीडियो रात 2.33 मिनट पर रिकॉर्ड किया गया है.

इसमें पुलिसकर्मी चिता को तैयार करते, अर्थी को चिता पर रखते और चिता को माचिस से आग लगाते दिख रहे हैं. वीडियो में स्पष्ट है कि पीड़िता की चिता को किसी परिजन ने मुखाग्नी नहीं दी थी.

इन परिस्थितियों में अंतिम संस्कार किए जाने का पीड़िता के परिजनों ने विरोध किया है और वो सवाल करते हैं कि ऐसा सबूतों को नष्ट करने के लिए किया गया है.

डॉक्टरों को दिया बयान
इमेज कैप्शन, पीड़िता ने अस्पताल में डॉक्टरों को अपने साथ हुए रेप के बारे में बताया और चार लोगों का नाम लिया
पीड़िता के मेडिकल एक्ज़ामिनेशन की रिपोर्ट
इमेज कैप्शन, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में रेप को लेकर स्पष्ट राय नहीं दी थी. हालांकि बल के इस्तेमाल का ज़िक्र किया था.

क्या कहती है मृतक युवती की मेडिकल रिपोर्ट

एएमयू के अस्पताल में मृतक युवती की जांच करने वाली मेडिकल टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतक युवती ने 'बल के इस्तेमाल के संकेत दिए थे.'

मृतक युवती का परीक्षण करने वाली डॉक्टर ने रिपोर्ट में निष्कर्ष में लिखा था, ''परीक्षण के आधार पर मेरी राय ये है कि बल का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, पेनिट्रेटिव इंटरकोर्स के बारे में राय सुरक्षित है और अंतिम राय एफएसएल की रिपोर्ट के आधार पर ही तय की जाएगी.''

जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एएमयू का मेडिकल कॉलेज) से जुड़े और इस रिपोर्ट को देखने वाले एक डॉक्टर ने बताया कि मृतक युवती का पहला मेडिकल टेस्ट 22 सितंबर को ही किया गया था यानी घटना के आठ दिन बाद.

उनके मुताबिक फोरेंसिक जांच के लिए नमूने 22 सितंबर को लिए गए थे. ये नमूने आगरा भेजे गए थे.

यूपी पुलिस के मुताबिक आगरा एफएसएल की रिपोर्ट में स्पर्म नहीं मिला है. यूपी पुलिस ने इसी आधार पर एक बयान में कहा है कि मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर पीड़िता से रेप की पुष्टि नहीं हुई है. ये जानकारी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को भी दी गई है.

अलीगढ़ यूनिवर्सिटी की रेज़िडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हमज़ा मलिक ने बीबीसी से कहा, ''इस मामले में एफएसएल की रिपोर्ट या मेडिकल टेस्ट का बहुत मतलब नहीं है क्योंकि नमूने बहुत देरी से लिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक अधिकतम 96 घंटों के अंदर नमूने ले लिए जाने चाहिए.''

उन्होंने कहा, ''ये दोनों रिपोर्ट रेप ना होने की पुष्टि नहीं कर रही हैं, बल्कि ये बता रही हैं कि सीमन का जो सेंपल लिया गया था उसमें स्पर्म नहीं है. अंतिम निष्कर्ष में वेजाइनल पेनिट्रेशन से इनकार किया गया है. उन्होंने रेप की पुष्टि नहीं की है. अब रेप की परिभाषा बदल गई है. अब रेप होने के लिए पेनिट्रेशन अनिवार्य नहीं है.''

''मेडिकल रिपोर्ट चाहे वो ऑटोप्सी हो, एमएलसी हो या एफएसएल की रिपोर्ट हो, ये अपने आप में एक जांच हैं, ये तय नहीं कर सकतीं कि रेप हुआ है या नहीं हुआ. सिर्फ़ अदालत ये तय कर सकती है कि रेप हुआ है या नहीं. इसके अलावा किसी डॉक्टर, पुलिस या नेता को इस बारे में राय जाहिर करने का अधिकार नहीं है.''

सफदरजंग अस्पताल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या है?

जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक पीड़िता की मौत सुबह 6.55 बजे हुई थी. उसके शव को पोस्टमार्ट के लिए 11 बजे लाया गया था. पीड़िता के परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम के दौरान वो मौजूद नहीं थे.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी रेप का ज़िक्र नहीं है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स में किसी तरह की चोट का ज़िक्र नहीं है.

सफदरजंग अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतक युवती को सही इलाज दिया गया, इसके बावजूद उसकी हालत ख़राब होती गई.

रिपोर्ट के मुताबिक उसकी बिगड़ती सेहत के बारे में साथ में मौजूद तामीरदार को जानकारी दी गई थी. उसे अंतिम समय में सीपीआर भी दिया गया था.

मृतक युवती के परिवार ने पोस्टमार्टम और एफएसएल की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है, ''उसने अपने बयान में गैंगरेप का ज़िक्र किया है. वो मरते-मरते झूठ क्यों बोलेगी?''

ये रिपोर्ट लिखे जाने तक पीड़िता के परिवार को मामले से जुड़े दस्तावेज़ नहीं मिले हैं. उन्हें मेडिकल रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी भी नहीं मिली है.

गांव में अभियुक्तों का घर
इमेज कैप्शन, गांव में अभियुक्तों का घर

क्या कहना है अभियुक्तों के परिजनों का?

इस घटना में जिन चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है उनके परिजनों का कहना है कि वो घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे. एक अभियुक्त के परिजनों का कहना है कि वो पास ही स्थित डेयरी पर मजदूरी करने गया था.

डेयरी के प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि घटना के दिन अभियुक्त ड्यूटी पर था.

हालाँकि, इसका सीसीटीवी पुराना होने की वजह से डिलीट हो गया है. जांच कर रही एसआईटी ने डीवीआर जब्त कर ली है और वीडियो फुटेज रिकवर करने की कोशिशें की जा रही हैं. एक प्रशासनिक सूत्र ने बीबीसी को बताया है कि ये वीडियो रिकवर हो गया है. हालांकि, इसकी स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है.

वहीं, एक-दूसरे अभियुक्त के परिजनों का कहना है कि घटना के समय वो घर पर मौजूद था और बेचने के लिए वेज बिरयानी तैयार कर रहा था. इस अभियुक्त की पत्नी का कहना है कि वो अपने पति के साथ हाथ बंटा रही थीं.

घटना के बाद जब बीबीसी ने मुख्य अभियुक्त के परिजनों से बात की थी तो उनका कहना था कि वो घर पर ही मौजूद था. अब अभियुक्त ने जेल से एसपी के नाम एक पत्र लिखकर कहा है कि वो घटना के दिन पीड़िता से मिला था और वहां उसे पीड़िता के भाई और मां ने देख लिया था.

जिस चौथे अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है उसके परिजनों का कहना है कि वह घटनास्थल के पास खेत पर काम कर रहा था और उसने ही पीड़िता को पानी पिलाया था. हालांकि, पीड़िता की मां इस बात से इनकार करती हैं.

पीड़िता के परिजन

अभियुक्त और पीड़िता के बीच कॉल की डिटेल

मीडिया रिपोर्टों में मुख्य अभियुक्त और मृतक युवती के बीच फोन पर बातचीत का ब्यौरा जारी किया गया है.

कथित तौर पर ये कॉल अभियुक्त के नंबर से मृतक युवती के नंबर पर बीते साल अक्तूबर से इस साल मार्च के बीच किए गए.

मृतक युवती के परिवार ने बीबीसी से बातचीत में इस तरह के किसी भी कॉल से इनकार किया है और जोर देकर कहा है कि मृतक युवती और अभियुक्त के बीच किसी तरह की बातचीत नहीं होती थी.

हाथरस के एसपी विनीत जायसवाल ने बीबीसी से कहा, ''इन कॉल के बारे में उन्हें मीडिया से ही जानकारी मिली है. मृतक युवती और अभियुक्त की कॉल की डिटेल एसआईटी की जांच का हिस्सा हैं. इस बारे में अधिक जानकारी एसआईटी ही दे सकती है.''

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