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हाथरस जैसे वो बड़े मामले जिन्हें साज़िश ठहराया गया
- Author, टीम बीबीसी
- पदनाम, दिल्ली
उत्तर प्रदेश के हाथरस मामले में प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि राज्य में जातीय दंगे भड़काने और मुख्यमंत्री योगी की सरकार की छवि ख़राब करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय साज़िश रची जा रही है.
ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'हमारे विरोधी अंतरराष्ट्रीय फ़ंडिंग के ज़रिए जातीय और सांप्रदायिक दंगों की नींव रखकर हमारे ख़िलाफ़ साज़िश कर रहे हैं'.
यूपी पुलिस ने हाथरस के चंदपा थाने में सोमवार को एक एफ़आईआर दर्ज कर अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कई धाराएँ लगाई हैं जिनमें आपराधिक साज़िश (120B) और राजद्रोह (124A) जैसी धाराएँ शामिल हैं.
ये धाराएँ अंग्रेज़ों के ज़माने से भारतीय दंड संहिता या आईपीसी का हिस्सा रही हैं.
आपराधिक साज़िश के मामले में अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड और आजीवन कारावास से लेकर छह महीने तक की सज़ा हो सकती है.
देशद्रोह के मामले में आजीवन कारावास से लेकर तीन साल तक की सज़ा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह ग़ैर-ज़मानती अपराध माना जाता है.
हाल के वर्षों में कई चर्चित मामलों में साज़िश और देशद्रोह का नाम सुना गया है. आइए नज़र डालते हैं ऐसे ही कुछ मामलों पर जिन्हें साज़िश ठहराया गया.
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दिल्ली दंगा
दिल्ली पुलिस ने इस साल हुए दंगों को एक सुनियोजित साज़िश क़रार दिया है.
उसने 16 सितंबर को अपनी हज़ारों पन्नों के आरोप पत्र में 15 लोगों के ख़िलाफ़ जो धाराएँ लगाई गई हैं उनमें आपराधिक साज़िश रचने और देशद्रोह की धाराएँ भी शामिल हैं.
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में व्हाट्सएप मैसेजों और ग्रुपों को आधार बनाते हुए दंगों को साज़िश क़रार दिया है.
जेएनयू मामला
दिल्ली पुलिस ने फ़रवरी 2016 के चर्चित जेएनयूए मामले में भी साज़िश की बात की और वहाँ भी इन्हीं धाराओं का इस्तेमाल किया.
पुलिस ने जनवरी 2019 में दिल्ली की एक अदालत में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, छात्र उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और सात अन्य कश्मीरी छात्रों, यानी कुल 10 लोगों के ख़िलाफ़ इन्हीं धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था.
उनपर आरोप लगाया कि उन्होंने 9 फ़रवरी 2016 को 2002 में संसद पर हुए मामले में अफ़ज़ल गुरू को फांसी दिए जाने के विरोध में बुलाई गई एक सभा में देशद्रोही नारे लगाए.
आपराधिक प्रक्रिया संहिता या सीआरपीसी के तहत राष्ट्रद्रोह संबंधी मामलों में अदालत में मुक़दमा चलाने के लिए राज्य सरकार से मंज़ूरी लेना आवश्यक होता है. मगर दिल्ली सरकार ये कहकर इसे टालती रही कि उसे आरोप की सत्यता मालूम करने के लिए और समय चाहिए.
फिर इस साल 19 फ़रवरी को दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वो 3 अप्रैल तक मामले की स्टेटस रिपोर्ट पेश करे.
इसके नौ दिन बाद यानी मामला दर्ज होने के एक साल से भी ज़्यादा समय के बाद केजरीवाल सरकार ने 28 फ़रवरी को पुलिस को राष्ट्रद्रोह का मुक़दमा चलाने के लिए चार्जशीट दायर करने की अनुमति दे दी.
प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश
2017-18 के एल्गार परिषद मामले को भी पुलिस ने आपराधिक षडयंत्र और देशद्रोह का मामला बताया है और इन्हीं धाराओं का इस्तेमाल किया है.
पुणे पुलिस ने पिछले साल एल्गार परिषद मामले में जो आरोप लगाए थे उनमें अभियुक्तों के बारे में कहा गया कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के साथ-साथ सरकार को उखाड़ फेंकने और भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध छेड़ने की साज़िश रच रहे थे.
अभियुक्तों में वरवर राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, आनंत तेलतुंबडे, अरूण फ़रेरा, वर्नन गोन्साल्वेज़ जैसे कार्यकर्ताओं के नाम शामिल थे.
31 दिसंबर 2017 को पुणे में भीमा-कोरेगाँव युद्ध के 200 साल पूरे होने पर एल्गार परिषद नाम के एक कार्यक्रम के दौरान हिंसा भड़क उठी जिसमें एक व्यक्ति मारा गया था. इसके बाद पुणे और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अगले कई दिनों तक हिंसा हुई थी.
इस कार्यक्रम का आयोजन कबीर कला मंच ने किया था जो एनआई के अनुसार प्रतिबंध नक्सल संगठन सीपीआई (माओवादी) की शाखा है.
पिछले महीने कबीर कला मंच के तीन सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया और तब राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआईए ने उनके ख़िलाफ़ जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया उनमें देशद्रोह और आपराधिक साज़िश की धाराएँ भी शामिल थीं.
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केजरीवाल-मुख्य सचिव मामला
2018 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि 19-20 फ़रवरी की रात को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में कुछ विधायकों ने उनके साथ कथित रूप से मारपीट की थी.
इस घटना को भी पुलिस ने साज़िश क़रार दिया था और पुलिस ने बाद में 1300 पन्नों की जो चार्जशीट दायर की और उसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 11 विधायकों के ख़िलाफ़ जो धाराएँ लगाईं उनमें आपराधिक साज़िश का मामला भी शामिल था.
ये मामला अभी तक अदालत में लंबित है. आम आदमी पार्टी के सभी 13 नेता आरोप को बेबुनियाद बताते रहे हैं.
चिदंबरम मामला
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को भी पिछले साल जब सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ़्तार किया था, तो उनके ख़िलाफ़ भी आपराधिक साज़िश की धारा लगाई गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान सितंबर 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट में उनके वकील कपिल सिबल ने चिदंबरम की ओर से ये सवाल पूछा था, "ये मेरे ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश का आरोप क्यों लगाया गया? मैंने किसके साथ मिलकर साज़िश की है?"
चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद वो 106 दिनों के बाद 4 दिसंबर को रिहा हो सके थे.
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला
पिछले दिनों 28 साल पुराने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में एक विशेष अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया. इनमें एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह जैसे बीजेपी के कई बड़े नेताओं के नाम शामिल थे.
इस मामले में भी उनके ख़िलाफ़ जो धाराएँ लगाई गई थीं उनमें 120B यानी आपराधिक षडयंत्र की धारा भी शामिल थी.
इस धारा को 2001 में सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने तकनीकी कारणों में से हटा दिया था. मगर 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा आपराधिक साज़िश के आरोप को बहाल कर दिया.
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