मुसलमानों को दाढ़ी और टोपी के कारण कोलकाता के एक होटल से निकाला गया

मदरसा शिक्षक

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    • Author, अमिताभ भट्टासाली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

कोलकाता पुलिस के अनुसार एक गेस्ट हाउस में रह रहे दस मुसलमानों को उनकी दाढ़ी और टोपी के कारण वहां से ज़बरदस्ती निकाले जाने का मामला सामने आया है.

शिकायत के बाद कोलकाता के एक पॉश इलाक़े सॉल्ट लेक में स्थित इस गेस्ट हाउस के तीन कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

ये लोग एक मदरसा के हेडमास्टर और सहायक शिक्षक हैं. पश्चिम बंगाल में मदरसों का संचालन मदरसा बोर्ड करता है जो राज्य सरकार के तहत काम करता है.

ये सभी लोग मालदा ज़िला के रहने वाले हैं.

यह लोग सोमवार की शाम किसी सरकारी काम से कोलकाता आए थे और उस गेस्ट हाउस में ठहरे जिसकी उन्होंने पहले से ही बुकिंग करा रखी थी.

उनमें शामिल मोहम्मद महबूबुर्रहमान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "रात भर की यात्रा के बाद हम सभी लोग बहुत थके हुए थे. मदरसा बोर्ड के दफ़्तर जाने से पहले हम सभी लोगों को थोड़े आराम की सख़्त ज़रूरत थी. नहाने-धोने के बाद नाश्ता करने के लिए हमलोग होटल से बाहर गए. हमें बाद में पता चला कि उसी समय कुछ स्थानीय लोगों ने हमें देखा. हमारे चार साथियों की दाढ़ी है और वे टोपी पहने हुए थे."

नाश्ता करने के बाद जब वो गेस्ट हाउस वापस आए तो गेस्ट हाउस के एक कर्मचारी ने उन्हें बताया कि उन लोगों के लिए एक दूसरी जगह ठहरने का इंतज़ाम कर दिया गया है और उन्हें वहीं चलना होगा.

शिकायत पत्र

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दूसरा गेस्ट हाउस ज़्यादा दूर नहीं था.

महबूबुर्रहमान ने आगे कहा, "दूसरे गेस्ट हाउस के बाहर हमें कई घंटों तक इंतज़ार करवाया गया. हमें कोई भी कमरा नहीं दिया गया. उस वक़्त तक हमें इसका एहसास नहीं हुआ था कि असल कारण क्या है. जब हमने होटल के मैनेजर से पूछा कि हमें कमरा मिलने में देरी क्यों हो रही है तब उन्होंने कहा कि, आप यहां नहीं ठहर सकते हैं, आपलोग यहां से चले जाएं."

ये लोग एक ग़ैर-राजनीतिक शिक्षक संघ पश्चिमबंगा शिक्षक एक्या मुक्ति मंच से भी जुड़े हुए हैं.

चिंताजनक स्थिति

अल्पसंख्यक आंदोलन

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शिक्षक संघ के महासचिव मोइदुल इस्लाम ने बीबीसी से कहा कि गेस्ट हाउस के मैनेजर ने उन्हें सारी बात बताई.

मोइदुल इस्लाम का कहना था, "जब शिक्षकों ने मुझे फ़ोन किया तब मैंने गेस्ट हाउस के मैनेजर से बात की. उन्होंने मुझे बताया कि कुछ स्थानीय निवासियों ने उन शिक्षकों को दाढ़ी और टोपी में देखा था. उन्होंने गेस्ट हाउस के मैनेजर को मजबूर किया कि उन लोगों को गेस्ट हाउस में नहीं ठहरने दिया जाए. स्थानीय दबाव के कारण मैनेजर ने उन्हें जाने के लिए कहा. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षकों को भी इन सबका सामना करना पड़ा."

शिक्षकों को अपना सारा सामान रोड पर रखना पड़ा और फिर इसी तरह उन्होंने अपना सरकारी काम पूरा किया. वो सभी मंगलवार को मालदा अपने घर लौट गए.

लेकिन मोइदुल इस्लाम ने यह सब जानने के बाद अपने शिक्षकों के साथ हुए कथित अपमान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का फ़ैसला किया.

उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक ख़त लिखा और उसकी एक कॉपी सॉल्ट लेक पुलिस थाने को भी भेज दी.

पुलिस फ़ौरन हरकत में आई और दोनों गेस्ट हाउस के पाँच कर्मचारियों को हिरासत में लिया जिनमें दोनों गेस्ट हाउस के मैनेजर भी शामिल थे.

रातभर पूछताछ के बाद उनमें से दो को गिरफ़्तार कर दो दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार उन लोगों पर आईपीसी की चार धाराएं लगाई गईं हैं जिनमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना शामिल है.

मोइदुल इस्लाम ने कहा, क्या यह बंगाल का कल्चर है. हमलोग छात्रों को रविंद्रनाथ टैगोर और क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम के बारे में पढ़ाते हैं. हमलोग उन्हें हिंदू और मुसलमान को एक साथ मिलकर रहने की बात बताते हैं. लेकिन देखिए कि शिक्षकों का कैसा अपमान हुआ क्योंकि उनमें से कुछ ने दाढ़ी रखी थी और टोपी पहनी हुई थी. यह बहुत चिंताजनक स्थिति है.

ऐसी घटनाएँ बहुत कम होती हैं

बंगाल

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पश्चिम बंगाल के कई मदरसों में मुसलमानों की तुलना में हिंदू छात्र अधिक संख्या में पढ़ते हैं और स्टेट मदरसा बोर्ड की परीक्षा में उनकी रैंकिंग बहुत अच्छी रहती है.

इस तरह की घटना शायद ही कभी सुनने को मिलती है, जब होटल या गेस्ट हाउस वाले किसी को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर कमरा नहीं देते हैं.

लेकिन छानबीन करने के बाद पता चला कि कोलकाता के कई होटलों में बांग्लादेश से वैध तरीक़े से आने वाले मुसलमानों को भी कई बार नहीं ठहरने दिया गया.

हालांकि ऐसा बहुत ही कम होता है.

लेकिन बहुत लोगों के लिए चिंता की बात ये है कि सॉल्ट लेक जैसे पॉश इलाक़े में ऐसा कैसे हो गया, जहां ज़्यादातर लोग पढ़े लिखे हैं और मध्य और उच्च वर्ग से संबंध रखते हैं.

लेखक और रिटायर्ड शिक्षक प्रोफ़ेसर मीरातुन्नहार कहती हैं, "यह वो लोग हैं जिनके दिमाग़ में साम्प्रदायिकता भरी हुई है. आप आम आदमी में इस तरह का ज़हर नहीं देखेंगे. एक ही बाज़ार में हिंदू और मुसलमान को एक साथ सब्ज़ी बेचते हुए आप देख सकते हैं. आम आदमी को भी कभी-कभी भड़काया जा सकता है, लेकिन वो मूल रूप से साम्प्रदायिक नहीं हैं. अफ़सोस की बात है कि पढ़े लिखे लोगों में यह ज़्यादा भरा हुआ है."

वो आगे कहती हैं, "सत्ता में बैठी पार्टी का सिर्फ़ एक ही एजेंडा है, इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाना. नौकरियां जा रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं, यह सब उनके एजेंडा में नहीं है. सरकार चाहती है कि लोग इन सब मुद्दों से दूर रहें और सिर्फ़ एक ही मुद्दे पर ध्यान दें. यह घटना भी उसी सोच का नतीजा है."

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