अयोध्या में अचानक ऐसा क्या हुआ जबकि पूरी दुनिया मुश्किल में- प्रेस रिव्यू

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कोरोना वायरस की महामारी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर शून्य से नीचे माइनस 24 फ़ीसदी चली गई है लेकिन अयोध्या की तस्वीर कुछ और ही है.
अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन के बाद यहां की प्रॉपर्टी की क़ीमत आसमान छूने लगी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अयोध्या में ज़मीन ख़रीदना अब आम आदमी के बस की बात नहीं रही.
टाइम्स ऑफ इंडिया से प्रॉपर्टी कंस्लटेंट ऋषि टंडन ने कहा, ''अयोध्या में अभी ज़मीन की क़ीमत 2000-3000 रुपए प्रति वर्ग फ़ीट हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले यहां 900 रुपए वर्ग फ़ीट की दर पर ज़मीन आसानी से मिल जाती थी.''
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कई बड़े इन्फ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की घोषणा की थी. इनमें थ्री स्टार होटल, इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ अयोध्या को भारत का वैटिकन सिटी बनाने का वादा किया है. इसके बाद से यहां ज़मीन की मांग अचानक से बढ़ गई है.
अयोध्या भारत की राजनीति में दशकों से केंद्र में रही है और अब यह भव्य राम मंदिर को लेकर चर्चा में है. राज्य सरकार की इन्फ़्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े पैमाने पर ज़मीन अधिग्रहण करने वाली है. ऐसे में लोग ज़मीन में निवेश कर रहे हैं. लोगों को लग रहा है कि ज़मीन ख़रीदने के बाद राज्य सरकार चब इनका अधिग्रहण करेगी तो और ऊंची क़ीमत मिलेगी.
ऋषि टंडन ने अख़बार से कहा कि अयोध्या में यह बूम तात्कालिक है. उन्होंने कहा, ''नए ख़रीदार जिस दर पर अभी ज़मीन ख़रीद रहे हैं और अगर उनकी सोच के हिसाब से चीज़ें नहीं हुईं तो भारी नुक़सान उठाना पड़ सकता है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार कई लोगो भविष्य के लिाहाज से यहां निवेश कर रहे हैं. ख़ास कर मंदिर और सरयू नदी के आसपास ज़मीन की मांग और महंगाई तेज़ी से बढ़ रही है. कई लोग धर्मशाला बनाना चाहते हैं तो कई लोग कम्युनिटी किचेन.

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उपसभापति हरिवंश के ख़िलाफ़ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव
राज्यसभा में कृषि सुधारों से जुड़े विधेयकों का पारित कराने के दौरान हुए ज़बर्दस्त सियासी शोर के बाद 12 विपक्षी दलों ने उपसभापति हरिवंश के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है.
राज्यसभा उपसभा पति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का अभूतपूर्व फैसला करते हुए विपक्षी दलों ने हरिवंश पर संसदीय नियमों और पंरपराओं की धज्जियां उड़ाते हुए जबरन बिल पारित कराने का भी आरोप लगाया है.
इस ख़बर को दैनिक जागरण ने दूसरे पन्ने पर प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार ने लिखा है, ''सभापति वेंकैया नायडू हंगामे के दौरान संसदीय मर्यादा के विपरीत उग्रता दिखाने वाले विपक्षी सासंदों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं.
हरिवंश के ख़िलाफ़ 12 विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है. इसकी जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने दी है. उन्होंन कहा कि बेहद आहत होकर विपक्षी दलों ने यह क़दम उठाने का फ़ैसला किया है.''

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बीजेपी से अलग हो सकता है शिरोमणि अकाली दल
शिरोमणि अकाली दल नेता और राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा है कि बीजेपी से गठबंधन को लेकर एक हफ़्ते के भीतर फ़ैसला हो जाएगा. शिरोमणि अकाली दल एनडीए की सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक है.
कृषि बिल को लेकर शिरोमणि अकाली दल से मोदी कैबिनेट में एकमात्र मंत्री हरसिमरत कौर ने पिछले हफ़्ते ही इस्तीफ़ा दे दिया था. नरेश गुजराल ने कहा कि रविवार को राज्यसभा में जिस तरह से बिल पास किया गया है उससे बहुत ग़लत संदेश गया है.
नरेश गुजराल ने कहा, ''हम अगले चार-पाँच दिनों में पार्टी कैडरों से फीडबैक लेंगे. इसके साथ ही पार्टी की कोर कमिटी की बैठक बुलाई जाएगी. इसके बाद हम बीजेपी से गठबंधन जारी रखने पर फ़ैसला लेंगे. हम किसानों की कैडर आधारित पार्टी हैं. बिल को पहले सिलेक्ट कमिटी के पास भेजना चाहिए था. इसमें इतनी जल्दबाजी की कोई ज़रूरत नहीं थी.''
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