नेपाल की किताब में अब उत्तराखंड के पिथौरागढ़ को बताया अपना-प्रेस रिव्यू

नेपाल

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नया राजनीतिक नक़्शा जारी करने के तीन महीने बाद नेपाल की किताब में अब उत्तराखंड के पिथौरागढ़ को अपना बताया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल की स्कूली किताबों पिथौरागढ़ को नेपाली हिस्सा बताया गया है.

नेपाली शिक्षा मंत्री गिरिराज मणि पोखरियाल के कार्यालय ने अख़बार से इस ख़बर की पुष्टि की है.

नेपाल में 11-12वीं की भूगोल की किताब 'नेपालको भूभाग रा सीमासम्बन्धिनी स्वाध्याय सामग्री' नाम की किताब में कालापानी को नेपाल का हिस्सा बताया गया है.

इस किताब की प्रस्तावना ख़ुद नेपाली शिक्षा मंत्री गिरिराज मणि पोखरियाल ने लिखी है.

सूत्रों के मुताबिक़, किताब में लिखा गया है कि नेपाल का कुल भौगोलिक क्षेत्र 1,47,641.28 वर्ग किलोमीटर है जिसमें से 460 वर्ग किलोमीटर हिस्सा कालापानी का है.

इसके अलावा नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली की अगुआई वाली कैबिनेट ने देश के केंद्रीय बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक को एक और दो रुपये के नए सिक्के बनाने की अनुमति भी दे दी, जिन पर नया राजनीतिक नक़्शा छपा होगा.

गलगित-बाल्तिस्तान

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गिलगित-बल्टिस्तान को पूर्ण राज्य का दर्जा देगा पाकिस्तान

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में कश्मीर और गिलगित-ल्टिस्तान मामलों के मंत्री अली आमीन गंडापुर ने बुधवार को इस्लामाबाद में कुछ पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान सरकार की योजना के बारे में जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि गिलगित-बल्टिस्तान को पूर्ण राज्य का दर्जा और संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व जैसे सभी संवैधानिक अधिकार दिए जाएंगे.

पाकिस्तानी मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, प्रधानमंत्री इमरान ख़ान जल्दी ही इस बदलाव के बारे में औपचारिक घोषणा करने के लिए गिलगित बाल्टिस्तान का दौरा कर सकते हैं.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान गिलगित बलतिस्तान में इस प्रोजेक्ट से कितना बड़ा ख़तरा मोल ले रहा है?

इस बारे में जानकारी देते हुए अली आमीन ने कहा, "सभी पक्षों से सलाह-मशविरा करने के बाद सरकार ने गिलगित-बाल्टिस्तान को सभी संवैधानिक अधिकार देने का फ़ैसला किया है. हमारी सरकार ने यहां के लोगों के से किया अपना वादा पूरा करने का निर्णय लिया है."

भारत की ओर से इस बारे में अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

इससे पहले मई में भी भारत ने गिलगित बल्टिस्तान में चुनाव कराए जाने को मंज़ूरी देने के पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी.

ब्रिटेन से आज़ादी से पहले गिलगित बल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर रियासत का अंग हुआ करता था. लेकिन 1947 के बाद से इस पर पाकिस्तान का नियंत्रण है.

चीनी सैनिक

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पैंगॉन्ग त्सो के बहाने डेपसांग पर है चीन की नज़र?

चीनी सैनिक एलएसी पर सामरिक रूप से अहम डेपसांग मैदान पर अप्रैल से ही भारतीय पेट्रोलिंग दस्तों को रोक रहे हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा विशेषज्ञों को आशंका है कि पैंगॉन्ग त्सो की आड़ में चीन असल में डेपसांग पर क़ब्ज़ा करना चाहता है.

अख़बार ने एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से लिखा है कि डेपसांग मैदान विवाद की पुरानी जगह है जिसे लेकर पैगॉन्ग त्सो झील, चुशुल सब सेक्टर, गोगरा हॉटस्प्रिंग और गलवान घाटी जैसी विवाद की जगहों की तरह ही सतर्क रहना चाहिए.

वीडियो कैप्शन, भारत चीन तनाव पर राजनाथ राज्यसभा में क्या बोले?

सुरक्षा अधिकारी ने कहा, "डेपसांग में अभी सैन्य संघर्ष की स्थिति नहीं है लेकिन यहाँ एलएसी को लेकर भारत और चीन दोनों ही अलग-अलग दावे करते हैं."

अख़बार के मुताबिक़ सुरक्षा मामलों के जानकार अब इस बात को लेकर चिंता रहा हैं कि शायद चीन ने दूसरी जगहों पर मोर्चा इसलिए खोला है ताकि वो कई गुना ज़्यादा महत्वपूर्ण डेपसांग से भारत का ध्यान भटका सके.

चीनी सेना पिछले पाँच महीनों यानी अप्रैल से भारतीय सैनकों को डेपसांग में पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर जाने से रोक रही है.

पाकिस्तान सरकार गिलगित-बाल्तिस्तान का दर्जा बदलकर इसे पूर्ण राज्य बनाने पर विचार कर रही है.

ग़रीबी के चंगुल में बच्चे

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कोरोना ने 15 करोड़ बच्चों को ग़रीबी में धकेला

बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ़ के अनुसार कोरोना महामारी और लॉकडाउन जैसे संकट की वजह से दुनिया भर में करीब 15 करोड़ बच्चे ग़रीबी के दलदल में धँस गए हैं.

कोरोना संकट की वजह से गरीब हुए बच्चों को मिलाकर अब दुनिया में करीब 1.2 अरब बच्चे ग़रीब हो गए हैं.

बच्चों की ग़रीबी के बारे में यह नया विश्लेषण यूनिसेफ़ और बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रेन ने किया है.

ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना के दौरान करोड़ो बच्चे तो ग़रीब हुए ही, साथ ही पहले से ग़रीब बच्चे और ज़्यादा ग़रीब हो गए.

इस अध्ययन के मुताबिक़, महामारी और लॉकडाउन के दौरान ऐसे बच्चों की संख्या में 15 फ़ीसदी बढ़त हुई जिन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, घर, पोषण, साफ़-सफ़ाई और पीने का पानी नहीं मिलता. यूनिसेफ़ ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ सकती है.

जनसत्ता ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर एंकर स्टोरी के तौर पर प्रकाशित किया है.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: बच्चों में ऐसे पता लगाएं कोरोना

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