सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी, अगले अधिवेशन में होगा अध्यक्ष का चुनाव

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कांग्रेस कार्यसमिति ने सोनिया गांधी से अगली व्यवस्था होने तक अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का अनुरोध किया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है.
पार्टी नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला ने कार्यसमिति की बैठक का ब्यौरा देते हुए पत्रकार वार्ता में कहा कि इस संबंध में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया.
पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि नए अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के अधिवेशन की बैठक में किया जाएगा.
पार्टी प्रवक्ताओं ने पार्टी में सुधार को लेकर 23 नेताओं की चर्चित चिट्ठी के बारे में कहा कि पार्टी ने तय किया है कि अब हमें इसे भूलकर आगे की ओर बढ़ना है.
रणदीप सुरजेवाला ने कहा," उनमें से कई महत्वपूर्ण नेतागण इस कार्यसमिति में शामिल थे और उनकी सहमति से ही पार्टी कार्यसमिति ने सर्वसम्मिति से एक प्रस्ताव पारित किया है."
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हालाँकि पार्टी कार्यसमति के सदस्य पीएल पूनिया ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की चिट्ठी की बात अख़बार में प्रकाशित होने पर चिंता जताई गई.
उन्होंने कहा,"अपनी बात कह सकते हैं, उसकी स्वतंत्रता है, इनपर चर्चा होनी चाहिए पर वो पार्टी फ़ोरम पर होनी चाहिए ना कि पब्लिक डोमेन में, और ये बात मीडिया में गई इसपर लोगों ने ज़रूर चिंता जताई."
पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के 52 नेताओं ने हिस्सा लिया. केवल असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई सेहत की वजह से बैठक में हिस्सा नहीं ले सके.
राहुल गांधी के कथित बयान पर प्रतिक्रियाएँ
इससे पहले पार्टी की कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी के एक कथित बयान को लेकर बड़े नेताओं ने सफ़ाई और खंडन के बयान जारी किए.
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कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि राहुल गांधी ने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा कि कांग्रेस के जिन नेताओं ने पार्टी में सुधारों के लिए चिट्ठी लिखी है उनकी बीजेपी से सांठ-गांठ है.
ग़ुलाम नबी आज़ाद से पहले पार्टी नेता कपिल सिबल ने राहुल गांधी की इस कथित टिप्पणी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर पहले कड़ी आपत्ति जताई और फिर इस ट्वीट को ये कहते हुए वापस ले लिया राहुल गांधी ने ऐसा कुछ नहीं कहा.
दरअसल सोमवार को एक ओर जहाँ पार्टी कार्यसमिति की बैठक चल रही थी वहीं मीडिया में ऐसी ख़बरें चलने लगीं कि राहुल गांधी ने बैठक में चिट्ठी लिखने पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि जिन नेताओं ने ये चिट्ठी लिखी उनकी बीजेपी से सांठ-गांठ है.

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इसके बाद कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, "राहुल गांधी कहते हैं कि हमारी बीजेपी के साथ मिली भगत है. राजस्थान हाई कोर्ट में कांग्रेस का सफलता पूर्वक बचाव किया. मणिपुर में बीजेपी की सरकार गिराने के लिए पार्टी का बचाव. पिछले 30 साल में कभी भी किसी भी मुद्दे पर बीजेपी के पक्ष में बयान नहीं दिया. फिर भी हमारी बीजेपी के साथ मिली भगत हैं!"
फिर कपिल सिब्बल की इस टिप्पणी को रीट्वीट करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मीडिया में राहुल गांधी को लेकर जो बात कही जा रही है वो बात उन्होंने नहीं कही है.
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सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''राहुल गांधी ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है. इस संदर्भ में कोई बात नहीं हुई है. कृपया फ़र्ज़ी मीडिया रिपोर्ट से भ्रमित ना हों या फिर ग़लत सूचना न फैलाएं. हाँ, यह ज़्यादा ज़रूरी है कि क्रूर मोदी शासन के ख़िलाफ़ एकजुट होकर लड़ें न कि आपस में ही भिड़ते रहें.''
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इसके बाद कपिल सिब्बल ने भी एक और ट्वीट किया. सिब्बल ने दूसरे ट्वीट में कहा, ''मुझसे राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जैसा मीडिया में कहा जा रहा है. मैं अपना वो ट्वीट वापस लेता हूं.''
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इसके कुछ घंटे बाद पार्टी ने ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी ट्वीट कर लिखा - "मीडिया के एक हलके में ये ग़लत कहा जा रहा है कि कार्यसमिति की बैठक में मैंने राहुल गांधी से कहा कि वो ये साबित करें कि हमने जो चिट्ठी लिखी वो बीजेपी से सांठ-गांठ के बाद लिखी. मैं ये बात बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि श्री राहुल गांधी ने ना तो कार्यसमिति और ना ही उसके बाहर कभी ये कहा कि ये चिट्ठी बीजेपी की वजह से लिखी गई है."

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चिट्ठी और कार्यसमिति की बैठक
सोमवार को पार्टी कार्यसमिति की बैठक पार्टी के 23 बड़े नेताओं की सोनिया गांधी को लिखी एक चिट्ठी के बाहर आने के बाद आयोजित की गई.
इस पत्र पर कपिल सिब्बल, शशि थरूर, ग़ुलाम नबी आज़ाद, पृथ्वीराज चव्हाण, विवेक तनखा और आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के हस्ताक्षर है.
ग़ुलाम नबी आजाद हमेशा से गांधी परिवार के वफ़ादार माने जाते रहे हैं. वो कांग्रेस कार्यसमिति के भी सदस्य हैं.
पार्टी नेतृत्व के मुद्दे पर पार्टी बँट गई है. एक धड़ा जहाँ सामूहिक नेतृत्व की मांग कर रहा है तो वहीं दूसरा धड़ा नेहरू-गांधी परिवार में अपना विश्वास फिर से जता रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई से सूत्रों ने बताया है कि सोनिया गांधी इस बैठक में अपने इस्तीफ़े की पेशकश कर सकती हैं.
क़रीब 20 नेताओं ने उनसे पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने की मांग करते हुए पत्र लिखा था. पत्र में इसके अलावा पार्टी के अंदर ऊपर से नीचे कई तरह के बदलावों की मांग रखी गई है.
कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव की इस मांग के बाद रविवार को कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता गांधी परिवार के समर्थन में आ गए.
अलग-अलग राज्यों के कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने जब तक राहुल गांधी ज़िम्मेदारी नहीं लेते तब तक सोनिया गांधी के बने रहने की अपील की है.
कांग्रेस के लगभग सभी लोकसभा सदस्यों ने सोनिया गांधी को लिखकर अपनी एकजुटता उनके साथ प्रदर्शित की है और राहुल गांधी के नहीं आने तक उनसे पद संभालने की अपील की है.

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कई राज्यों की इकाइयों ने जिसमें दिल्ली और राजस्थान शामिल हैं, नेहरू-गांधी परिवार का समर्थन किया है. जिन लोगों ने नेतृत्व परिवर्तन की बात की है, उनमें से तीन ग़ुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हैं.
कई पार्टी नेता जो गांधी परिवार का समर्थन कर रहे हैं, उन्होंने आरोप लगाया है कि नेतृत्व परिवर्तन की बात करने वाले बीजेपी के हाथ में खेल रहे हैं और पार्टी को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं.
हरियाणा कांग्रेस प्रमुख कुमारी शैलजा ने कहा है, "हम सोनिया गांधी के साथ मज़बूती से खड़े हैं. यह वक़्त बीजेपी को कड़ी टक्कर देने का है ना कि अपने दरारों को दिखाने का."
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ पार्टी के दो सूत्रों ने बताया है कि पत्र लिखने वाले असंतुष्ट नेता चाहते हैं या तो नेहरू-गांधी परिवार सक्रिय भूमिका अदा करे या फिर पद से हट जाएं. इस पत्र का कांग्रेस के 300 क्षेत्रीय नेता समर्थन कर रहे हैं.
राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा है, "अगर पार्टी के 23 नेताओं के कार्यकारी अध्यक्ष को पत्र लिखने वाली बात सही है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है."
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