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रंजन गोगोई को असम का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने को लेकर क्या बोली बीजेपी
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का नाम असम में बीजेपी के अगले 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में आने के बाद प्रदेश में अगले मुख्यमंत्री के नाम पर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है.
दरअसल, असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई ने कहा है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं.
असम विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीनों का समय बचा है. प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से चुनावी राजनीति पर अबतक खुलकर चर्चा नहीं हो पा रही थी. लेकिन असम में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस बात पर बीजेपी के कुछ नेताओं के बयान ज़रूर सामने आ रहे थे. इस बीच तरुण गोगोई ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश का नाम लेकर एक तरह से राज्य में चुनावी राजनीति का माहौल तैयार कर दिया है.
असम के अगले 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश का नाम लेने के पीछे क्या राजनीति है?
इस बात का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बीबीसी से कहा, "आरएसएस के कुछ लोग रंजन गोगोई का नाम ले रहे हैं. उन्हीं लोगों ने कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी इस बात की जानकारी दी है. मुझे भी अपने कुछ लोगों से पता चला है कि रंजन गोगोई इस बार असम में बीजेपी के 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार हो सकते है. यह कोई पुख्ता जानकारी नहीं है लेकिन मुझे शक है कि यह बात सही हो सकती है."
असम में कांग्रेस की पिछली सरकार में लगातार 15 साल मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई आरोप लगाते हुए कहते हैं, "प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का एक मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ख़राब प्रदर्शन के कारण प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है. हिमंत के पास शिक्षा और लोक निर्माण विभाग भी है और वहां भी कोई काम नहीं हुआ. ये लोग काम नहीं करते हैं, केवल पब्लिसिटी ज़्यादा करते हैं."
कांग्रेस डरी हुई है: बीजेपी
हालांकि, बीजेपी तरुण गोगोई के इन आरोपों को कांग्रेस का चुनावी डर बताती है.
असम प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता कहते हैं, "राज्य में भाजपा के लगातार बढ़ रहे जनाधार से तरुण गोगोई और उनकी पार्टी कांग्रेस बेचैन है. इसलिए वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश का नाम लेकर लोगों को बेमतलब उलझाने का प्रयास कर रहे हैं. जबकि हमारी पार्टी में अगले 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर कोई चर्चा ही नहीं है. बात जहां तक हमारे मुख्यमंत्री और सरकार के प्रदर्शन की है तो सोनोवाल सरकार ने हर क्षेत्र में अच्छा काम किया है और इसलिए जनता का हमें समर्थन मिल रहा है."
अगर अगले 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर बीजेपी में कोई चर्चा ही नहीं है तो सर्वानंद सोनोवाल और हिमंत बिस्वा सरमा के नाम पर आपके मंत्री और सांसद क्यों बयान दे रहे हैं?
इस सवाल के जवाब में भाजपा नेता गुप्ता कहते हैं, "मीडिया के लोग कई बार सवाल पूछ लेते हैं कि क्या हिमंत बिस्वा सरमा अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं? क्या उनमें योग्यता है? ऐसे सवाल के जवाब में एक मंत्री ने कहा था कि निश्चित तौर वे योग्य हैं. लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि उनको (सर्वानंद) हटाकर इनको (हिमंत) बनाया जाए. हमारी पार्टी में सारे लोग योग्य और सक्षम हैं."
भाजपा नेता विजय गुप्ता कहते हैं, "कांग्रेस के पास जन समर्थन नहीं है, इसलिए वो एआईयूडीएफ़ जैसी पार्टी को साथ लेकर महागठबंधन बनाने का प्रयास कर रही है लेकिन ये दरअसल ठगों का गठबंधन है. जनता का साथ नहीं मिल रहा इसलिए वे तिलमिला कर यह बोल रहे हैं कि बीजेपी का मुख्यमंत्री कोई तीसरा व्यक्ति होगा. हमारी पार्टी में एक सक्षम मुख्यमंत्री है, लिहाज़ा कांग्रेस नेता अपनी पार्टी की चिंता करें."
असल में स्वास्थ्य मंत्री सरमा के सहयोगी स्वास्थ्य राज्य मंत्री पीजूष हजारिका ने हाल ही में मीडिया के समक्ष कहा था कि हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री पद के लिए फ़िट हैं और उनमें सारी योग्यताएं हैं.
ऐसी ही बात तेज़पुर से भाजपा के लोकसभा सांसद पल्लब लोचन दास ने कही थी. जिसके बाद मंगलदई से भाजपा के लोकसभा सांसद दिलीप सैकिया ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि सर्बानंद सोनोवाल ही फिर से प्रदेश मुख्यमंत्री होंगे.
असम प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया, "बीजेपी के एक-दो मंत्रियों या सांसदों के ऐसे बयानों के कारण कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने पार्टी में चुनाव से पहले विवाद पैदा करने के इरादे से पूर्व मुख्य न्यायाधीश का नाम सीएम उम्मीदवार के तौर पर उछाला है. दरअसल, मुख्यमंत्री पद के लिए सर्बानंद और हिमंत के बीच जारी मुक़ाबले में एक ऐसे तीसरे व्यक्ति का नाम लिया गया है जो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहें है ताकि इन दोनों नेताओं को जनता के सामने अयोग्य साबित कर सके. इस तरह से कांग्रेस नेता ने बीजेपी को कमज़ोर करने के इरादे से रंजन गोगोई का नाम लिया है. लेकिन पार्टी स्तर पर अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई है."
हालांकि, बीजेपी नेता अगले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री बदलने की संभावनाओं से इनकार नही करते और हिमंत को सर्बानंद के मुकाबले अधिक मज़बूत उम्मीदवार मानते है.
हिमंत की दावेदारी कैसी है?
असम के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर शुरू हुई इस पूरी चर्चा पर वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठ नाथ गोस्वामी कहते हैं, "असम की बीजेपी अन्य प्रदेशों की बीजेपी से इसलिए थोड़ी अलग है क्योंकि यहां पार्टी में ज्यादातर नेता दूसरे दलों से आए हुए हैं और जो असली बीजेपी कार्यकर्ता थे, उनमें अधिकतर को दरकिनार कर दिया गया है. खुद मुख्यमंत्री सर्बानंद क्षेत्रीय पार्टी एजीपी से आए हैं. लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस केवल इसलिए छोड़ी थी क्योंकि वहां वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए. जबकि कांग्रेस ने उन्हें उप-मुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया था. पिछली बार बीजेपी में उन्हें मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला क्योंकि वे पार्टी में नए आए थे. लेकिन इस बार हिमंत ने खासकर नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के ज़रिए पार्टी हाई कमान के समक्ष अपनी एक ऐसी मज़बूत छवि तैयार करने का प्रयास किया है कि उनके बिना पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी का उत्थान संभव नहीं है. अगर यह बात पार्टी हाई कमान के समक्ष स्थापित हो जाती है तो इस बार उन्हें मुख्यमंत्री का पद मिल जाएगा."
अगर पार्टी हाई कमान सर्बानंद सोनोवाल को दोबारा मुख्यमंत्री बनाती है तो क्या होगा?
इस सवाल का जवाब देते हुए पत्रकार गोस्वामी कहते हैं, "इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सोच समझकर फ़ैसले लेने होंगे क्योंकि मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी में अभी से घमासान शुरू हो गया है. मंत्री हिमंत अपने गठबंधन वाले साथियों को साथ लेकर ज्यादा से ज्यादा अपने समर्थन वाले नेताओं को चुनाव में जीत दिलाने का प्रयास करेंगे. मंत्री हिमंत कई बार सार्वजनिक तौर पर असम के मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं. ऐसे में, इस बार वे मौक़े को ख़ाली जाने नहीं देंगे. अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो पार्टी में विद्रोह होने की आशंका भी है. जबकि सर्बानंद के साथ इस बार ऑल असम स्टूडेंट यूनियन का भी समर्थन नहीं है."
"असम में तीसरे व्यक्ति के विकल्प के तौर पर हो सकता है कि आरएसएस पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को चाहता हो लेकिन ये सिर्फ़ राजनीतिक अटकलें हैं. फ़िलहाल असम के अगले मुख्यमंत्री की दौड़ में हिमंत सबसे मज़बूत उम्मीदवार हैं."
इस बीच, पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने इस तरह के सभी अटकलों को खारिज कर दिया है. गुवाहाटी के 'प्रतिदिन टाइम' में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, रंजन गोगोई ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा कि वे एक राजनीतिज्ञ नहीं है और न ही ऐसी कोई महत्वाकांक्षा या इरादा रखते हैं.
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 'राज्यसभा के एक नामित सदस्य और एक राजनीतिक दल के उम्मीदवार के बीच अंतर होता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग यह समझने की कोशिश नहीं करते हैं.'
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