उत्तर प्रदेश: दलित ग्राम प्रधान की हत्या के बाद गाँव में तनाव

आज़मगढ़

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

आज़मगढ़ ज़िले में ग्राम प्रधान की हत्या के तीन दिन बाद भी पुलिस सिर्फ़ एक नामज़द अभियुक्त को ढूंढ़ पाई है जबकि तीन अभियुक्त अब भी उसकी पकड़ से बाहर हैं.

गाँव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. इस बीच, राज्य सरकार ने आज़मगढ़ ज़िले के पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह का तबादला कर दिया है.

आज़मगढ़ ज़िले के तरवां थानाक्षेत्र में बांसगांव के ग्राम प्रधान सत्यमेव जयते उर्फ़ पप्पू राम की शुक्रवार को गाँव के ही कुछ लोगों ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी.

हत्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान हुए सड़के हादसे में एक बच्चे की भी मौत हो गई. ग़ुस्साई भीड़ ने रासेपुर बोंगरिया पुलिस चौकी में आग लगा दी और पुलिस के कई वाहनों में तोड़-फ़ोड़ और आगज़नी की.

मृत ग्राम प्रधान सत्यमेव जयते के परिजनों की ओर से गाँव के ही चार लोगों के ख़िलाफ़ नामज़द रिपोर्ट लिखाई गई. पुलिस ने परिजनों और ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा लेकिन तीन दिन बाद भी सिर्फ़ एक अभियुक्त को पकड़ा जा सका है.

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आज़मगढ़ के पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह ने बीबीसी को बताया कि पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि रविवार को हत्या में शामिल अभियुक्त वकील से मिलने जा रहे हैं और उसी दौरान उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए पुलिस सतर्क कर दी गई.

एसपी त्रिवेणी सिंह बताते हैं, "पुलिस टीम ने घेराबंदी की. इस दौरान हुई मुठभेड़ में 25 हज़ार का इनामी और हत्या के मुख्य अभियुक्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उससे पूछताछ की जा रही है. घटना के अन्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए भी पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है और उन्हें भी जल्दी ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा."

पुलिस ने चारों अभियुक्तों पर 25-25 हज़ार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा है. वहीं शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मृत ग्राम प्रधान के परिजनों को अनुसूचित जाति के तहत दी जाने वाली सहायता के अलावा पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाने की घोषणा की थी.

मुख्यमंत्री ने अभियुक्तों की संपत्ति ज़ब्त कर उनके ख़िलाफ़ एनएसए के तहत कार्रवाई करने और संबंधित थानाध्यक्ष और चौकी इंचार्ज को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के भी निर्देश दिए थे.

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गाँव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल के अलावा पीएसी को भी तैनात किया गया है. अभियुक्तों के परिजन गाँव से बाहर चले गए हैं जबकि मृत ग्राम प्रधान के घर में मातम पसरा हुआ है और परिजन अभी भी डरे हुए हैं.

मृत प्रधान की पत्नी मुन्नी देवी की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही विवेक सिंह, उर्फ़ गोलू, सूर्यांश दुबे, विजेंद्र सिंह और वसीम के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया था.

मृत प्रधान की पत्नी मुन्नी देवी बताती हैं, "चारों लोग हमारे घर आए और मेरे पति को बुलाकर ट्यूबवेल के पास ले गए. वहीं उन लोगों ने उन्हें गोली मार दी. आकर बोले कि सत्यमेव मर गया है, जाकर लाश उठा लो. हम लोग दौड़कर जब वहां पहुंचे तो वो मरे पड़े थे."

गाँव वालों के मुताबिक़, 42 वर्षीय सत्यमेव जयते पहली बार ग्राम प्रधान बने थे और दलितों को उनके अधिकारों के बारे में अक़्सर समझाते थे. उनके परिजनों के मुताबिक़, यही बात कुछ लोगों को अखरती थी और इसी वजह से उनकी हत्या की गई है.

बांसगांव के ही दिनेश कुमार बताते हैं, "गांव की आबादी में सवर्णों के घर मुश्किल से तीस होंगे जबकि दलितों के क़रीब 300 परिवार यहां रहते हैं. इसके बावजूद कुछ लोगों को सत्यमेव जयते का प्रधान बनना अच्छा नहीं लग रहा था. पहले भी उन्हें परेशान करने की कोशिशें हुईं लेकिन वो झुके नहीं. आख़िरकार उन्हें मार ही दिया गया."

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गाँव के ही रहने वाले एक व्यक्ति नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि ताज़ा विवाद गाँव में मतदाता सूची और निवास प्रमाण पत्र को लेकर था. उनके मुताबिक़, "ये लोग अपने हिसाब से मतदाता सूची तैयार कराना चाहते थे और फ़र्ज़ी निवास प्रमाण पत्र लेना चाहते थे. प्रधान ने ऐसा करने से मना किया तो उन लोगों ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया. चूंकि इसके अलावा, दोनों के बीच कोई दुश्मनी जैसी चीज़ नहीं थी."

वहीं, पुलिस भी विवाद की जड़ में चुनावी रंज़िश को ही देख रही है लेकिन वह अन्य पहलुओं से भी मामले की जांच कर रही है. इस बीच, रविवार देर शाम आज़मगढ़ के पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह का तबादला कर दिया गया.

इससे पहले आज़मगढ़ के डीआईजी सुभाष दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि पुलिस जब तक अभियुक्तों से पूछताछ नहीं कर लेती तब तक मृत ग्राम प्रधान के परिजनों की शिकायतों के आधार पर ही जांच की जा रही है.

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