टैक्स सुधार के नए नियम से सैलरी वालों को कितना फ़ायदा?

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

करदाता से बिना संपर्क किए टैक्स निर्धारण की जिस नई प्रणाली की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है वो ऐसे समय में हुई है जब कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था पर काफ़ी बुरा असर पड़ा है.

कोरोना वायरस महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था के उबरने की चुनौती बड़ी है. ऐसे में नए नियमों के बाद कितने नए लोग इस टैक्स सिस्टम में जुड़ेंगे, इस पर सवाल बना हुआ है. साथ ही इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि पहले की तुलना में आयकर विभाग कर वसूली के अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा ना कर पाए.

जानकारों का कहना है कि ऐसे में नई कर प्रणाली उन लोगों को टैक्स देने के लिए ज़्यादा प्रोत्साहित करेगी जो आयकर विभाग में 'बाबूगिरी' या 'अफ़सरशाही' की वजह से सही तरह से अपने कर का मूल्यांकन नहीं करा पाते थे.

इस नई कर व्यवस्था को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'पारदर्शी कर प्रणाली' की संज्ञा दी है. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि ये प्रणाली 'उचित, विनम्र और तर्कसंगत' होगी. इस नई व्यवस्था को आने वाले 25 सितंबर से लागू किया जायेगा.

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नए कर सुधारों की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "अब टैक्स सिस्टम भले ही फ़ेसलेस हो रहा है, लेकिन टैक्स पेयर को ये फेयरनेस और फ़ीयरलेसनेस का विश्वास देने वाला है. जो टैक्स देने में सक्षम हैं, लेकिन अभी वो टैक्स नेट में नहीं है, वो स्वप्रेरणा से आगे आएं, ये मेरा आग्रह है और उम्मीद भी."

हालाँकि इस नयी प्रणाली से बड़े घोटालों, बड़े टैक्स चोरी के मामलों, काला धन, बेनामी संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय कर को अलग रखा गया है.

वैसे नौकरी पेशा कर दाताओं को भी इसका कुछ लाभ मिलेगा, मगर जानकारों का कहना है कि ज़्यादा लाभ उन्हें मिलेगा जो व्यवसाय करने वाले लोग हैं और आयकर विभाग के अधिकारियों के काम करने की शैली से दुखी होने की वजह से अपने कर का मूल्यांकन नहीं करा पाते हैं.

प्रधानमंत्री के मुताबिक़ अभी तक ये होता है कि जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर का कर विभाग स्क्रूटनी, नोटिस, सर्वे या ज़ब्ती जैसे मामलों को देखता था. अब स्क्रूटनी के मामलों को देश के किसी भी क्षेत्र में किसी अधिकारी के पास आवंटित किया जाएगा. इससे जो आदेश निकलेगा उसकी समीक्षा किसी और राज्य की टीम करेगी.

क्या है फेसलेस मूल्यांकन

आसान शब्दों में कहें तो इस तरह के मूल्यांकन व्यवस्था में मुख्य तौर पर निम्नलिखित बातों पर ज़ोर होगा.

  • आयकर दफ़्तर जाने की ज़रूरत नहीं
  • कर दाताओं का चयन डाटा एनालिटिक्स और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस यानी कंप्यूटर के माध्यम से होगा
  • एक शहर में आयकर के असेसमेंट का आदेश, दूसरे शहर में समीक्षा और तीसरे शहर में उसे अंतिम रूप दिया जाएगा
  • आयकर के अधिकारियों को केस, ऑटोमेटिक तरीके से कंप्यूटर आवंटित करेगा
  • अधिकारियों का क्षेत्राधिकार समाप्त हो जाएगा
  • सीधे संपर्क के बिना कर निर्धारण होगा
  • कर चुकाने में शिकायत पर 'फेसलेस अपील' की सुविधा दी जाएगी
  • अधिकारी नहीं बल्कि अधिकारियों की टीम द्वारा मामलों की समीक्षा होगी

नई कर व्यवस्था पर इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के चाँद वाधवा का कहना है कि सरल तरीके से अगर देखा जाये तो अब सूचना का आधार सैलरी, टीडीएस और रेंट का जो विवरण लोग ख़ुद देते हैं अपने दफ्तर में, उसी को बनाया जाएगा. सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी.

सैलरी क्लास के लिए क्या?

इसके अलावा हर तरह के खर्चों पर भी जानकारी ऑनलाइन ही जमा की जाएगी जैसे क्रेडिट कार्ड से ख़र्च किये गए पैसे, ट्रेवल सम्बंधित जानकारी और दूसरे ख़र्चे जैसे ऑनलाइन पेमेंट्स सबकी जानकारी ऑटोमेटिक तरीके से रखी जा सकेगी.

वाधवा कहते हैं, "ये सहूलियतें आम कर दाताओं को मिलेगी जो सैलरी पर अपना जीवन गुज़ारते हैं. उनके लिए भी सुविधाजनक होगा. अब उन्हें ख़ुद ही सारी जानकारी देनी पड़ेगी जिसपर आयकर विभाग विश्वास करेगा. इसमें पहले लोगों को नोटिस मिला करते थे. ये अब नहीं मिलेंगे. सिर्फ स्पष्टीकरण माँगा जाएगा और जानकारी को अपडेट कर दिया जाएगा."

इसी श्रेणी में दूसरे तरह के कर दाता भी आते हैं, जिनका टीडीएस कटता है और वो बाद में 'रिफंड' लेते हैं. टीडीएस का रिफंड लेने वालों की संख्या भी 6 करोड़ से ज्यादा है.

वाधवा कहते हैं कि नई व्यवस्था का सबसे ज़्यादा लाभ उन व्यापारियों को होगा जो कर देना तो चाहते हैं मगर आयकर विभाग उन्हें हमेशा 'डिफॉल्टर' के रूप में देखता रहा.

व्यापारियों के लिए लाभ

वाधवा इसके लिए उदाहरण भी देते हैं. मान लीजिए अगर कोई व्यापारी स्वेच्छा से अपनी आमदनी पांच करोड़ घोषित करता था तो भी उसे संदिग्ध के तौर पर देखा जाता था. आयकर विभाग के अधिकारी ये धारणा बनाए रहते थे कि उसकी आमदनी पांच करोड़ से ज़्यादा होगी. अब ऐसा नहीं होगा.

वहीं पहले आयकर विभाग के अधिकारी स्वतः आय की घोषणा करने वालों से कहते थे कि वो अपने पूरे रिकॉर्ड लेकर दफ़्तर आएँ.

जानकारों का कहना है कि यहीं से अविश्वास पैदा होता था. या तो लोग पैसे देकर अपने असेसमेंट करवाते थे या फिर जुर्माने की रक़म को कम करवाने के लिए रिश्वत देते थे. नई प्रणाली में अपने कर की स्वतः घोषणा करने वालों को संदिग्ध के तौर पर नहीं देखा जाएगा.

अब ऐसे लोगों के लिए, असेसमेंट भी ऑटोमेटिक किया जाएगा. यानी उनके जीएसटी और आयकर की जानकारी कंप्यूटर पर उपलब्ध होगी और उन्हें अपना कर जमा करने में आसानी होगी.

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