सुदीक्षा भाटी की मौत के मामले में एसआईटी का गठन

Saurabh Sharma

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

अमरीका के बॉब्सन कॉलेज से क़रीब चार करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पाने वाली सुदीक्षा भाटी की मौत के मामले में पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है.

बुलंदशह के एससएसपी ने सीओ सिटी दीक्षा सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यों की एसआईटी टीम का गठन किया है.

सुदीक्षा भाटी की सोमवार को बुलंदशहर में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी.

लेकिन परिजनों का आरोप है कि कुछ बाइक सवार युवकों ने सुदीक्षा के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की थी और उसी दौरान दोनों बाइक की टक्कर में उनकी मौत हो गई.

हालांकि, पुलिस छेड़छाड़ के मामले से इनकार कर रही है, लेकिन सुदीक्षा भाटी के साथ जा रहे उनके चाचा सतेंद्र भाटी का कहना है कि 'बुलेट सवार कुछ युवकों ने काफ़ी देर तक उनका पीछा किया और बाद में आगे बढ़कर अचानक ब्रेक लगा दिये.'

मीडिया से बातचीत में सतेंद्र भाटी ने बताया कि "सुदीक्षा छुट्टियों में घर आई थी और उसके स्कूल से कुछ काग़ज़ लेने थे. मेरे साथ बाइक पर वो पीछे बैठी थी. दादरी के बाद से ही कुछ लड़के हमारे पीछे लग गये. इधर-उधर की बातें भी कर रहे थे, परेशान कर रहे थे. पर हम चुपचाप चले आ रहे थे."

उन्होंने कहा, "औरंगाबाद के क़रीब आगे बढ़कर बुलेट वाले लड़के ने अचानक ब्रेक लगा दिया. हमारी बाइक की स्पीड काफ़ी कम थी लेकिन अचानक ब्रेक लगने से हमारी बाइक बुलेट से टकरा गई और बेटी नीचे गिर गई."

सतेंद्र के अनुसार, सुदीक्षा भाटी के सिर में चोट आई थी और अस्पताल पहुँचने से पहले उनकी मौत हो चुकी थी.

अभी तक सुदीक्षा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली है. पर पुलिस का दावा है कि 'सुदीक्षा अपने नाबालिग़ भाई के साथ बाइक से जा रही थी और आमने-सामने की टक्कर से हुई दुर्घटना में सुदीक्षा की मौत हुई.'

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इमेज कैप्शन, डीएम रवींद्र कुमार

बुलंदशहर के डीएम रवींद्र कुमार ने बीबीसी को बताया कि "आरंभिक जाँच में जो बात सामने आयी है वो यह है कि बाइक सुदीक्षा भाटी का भाई चला रहा था. चाचा के बाइक चलाने की बात ठीक नहीं है. छेड़छाड़ की बात अभी तक सामने नहीं आयी है लेकिन मामले की पूरी जाँच की जा रही है, जल्द ही सही तथ्य सामने आ जाएंगे."

परिजनों के मुताबिक़, गौतम बुद्धनगर ज़िले में दादरी तहसील के गाँव धूम मानिकपुर की रहने वाली सुदीक्षा अपने मामा से मिलने के लिए बाइक से बुलंदशहर जा रही थीं.

बाइक कौन चला रहा था, इसे लेकर ना सिर्फ़ पुलिस की ओर से बल्कि परिजनों की ओर से भी विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं.

सुदीक्षा के भाई ने घटना के बाद कुछ मीडियाकर्मियों को जानकारी दी थी कि सुदीक्षा उसी के साथ जा रही थीं, जबकि सुदीक्षा के चाचा का दावा है कि सुदीक्षा उनके साथ जा रही थीं.

वहीं, घटनास्थल पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने मीडियाकर्मियों से कहा था कि 'बाइक सुदीक्षा ख़ुद चला रही थीं.'

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इमेज कैप्शन, सुदीक्षा के चाचा सतेंद्र भाटी

स्थानीय पत्रकार सौरभ शर्मा बताते हैं कि दुर्घटना में ना तो सुदीक्षा के भाई को और ना ही उनके चाचा सतेंद्र भाटी को कोई ख़ास चोट आई है.

उनके मुताबिक़, "ऐसे में यह दुर्घटना और भी ज़्यादा संदेह के घेरे में आ जाती है. अब पुलिस की जाँच में ही पता चल सकेगा कि आख़िर हुआ क्या था?"

फ़िलहाल इस बारे में पुलिस को कुछ सीसीटीवी फ़ुटेज मिले हैं जिनके आधार पर दुर्घटना और छेड़छाड़ की जाँच की जा रही है.

सुदीक्षा के परिजनों का कहना है कि पुलिस जानबूझकर इसे दुर्घटना बता रही है, जबकि सुदीक्षा की हत्या की गई है.

परिजनों का आरोप है कि उनकी शिकायत के बावजूद अब तक एफ़आईआर नहीं लिखी गई है, जबकि पुलिस के अधिकारी इस बारे में साफ़तौर पर कुछ भी नहीं बता रहे हैं.

बुलंदशहर के पुलिस के अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं कि एफ़आईआर दर्ज हुई है या नहीं.

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इमेज कैप्शन, बुलंदशहर के एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव

घटना के बाद बुलंदशहर के एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने प्रेस से बातचीत में कहा कि "परिजनों की शिकायत के आधार पर जाँच शुरू कर दी गई थी. अब परिजनों ने छेड़छाड़ की बात कही है जिसके आधार पर भी जाँच शुरू कर दी गई है. जल्द ही अभियुक्तों का पता लगाकर उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

दादरी की रहने वाली होनहार छात्रा सुदीक्षा भाटी दो साल पहले तब चर्चा में आई थीं, जब अमरीका के मशहूर बॉब्सन कॉलेज से उन्हें क़रीब 3.8 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी गई थी.

गाँव में ही चाय का ढाबा चलाने वाले सुदीक्षा के पिता जितेंद्र भाटी बेहद कम पढ़े-लिखे हैं और सुदीक्षा की माँ गीता भाटी घरेलू महिला हैं.

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इमेज कैप्शन, सुदीक्षा को चार वर्ष तक अमरीका में पढ़ने की स्कॉलरशिप मिली थी

सुदीक्षा ने उसी साल बारहवीं की परीक्षा भी 98 फ़ीसद अंकों के साथ पास की थी.

परिजनों के मुताबिक़, कोरोना संक्रमण की वजह से सुदीक्षा गाँव आई थीं और अगले कुछ दिनों में ही उन्हें वापस अमरीका जाना था. अमरीका से उन्हें चार साल की स्कॉलरशिप मिली थी.

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