रिलायंस ने कहा, तेज़ रफ़्तार इंटरनेट के लिए देसी 5G तकनीक ला रहे - प्रेस रिव्यू

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अधिकांश बड़े अख़बारों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की बुधवार को हुई 43वीं सालाना बैठक को कवर किया है. इस बैठक में बुधवार को कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कई बड़े ऐलान किए.
इकोनॉमिक टाइम्स अख़बार ने लिखा है कि "रिलायंस जियो ने अपनी ख़ुद की 5G टेक्नोलॉजी तैयार कर ली है जिसे वो अन्य टेलीकॉम कंपनियों को देने के बारे में भी विचार कर रहे हैं."
रिलायंस कंपनी ने बताया है कि "उनकी टेलीकॉम यूनिट ने 100 प्रतिशत देसी तकनीकों की मदद से इस 5G तकनीक को विकसित किया है जो भारत में तेज़ रफ़्तार इंटरनेट सेवा का सपना पूरा करेगी."
अख़बार ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा है, "चीन के साथ मौजूदा विवाद के बाद भारत ख़्वावे और ज़ेडटीई जैसी चीनी कंपनियों को देश से बाहर रखना चाहता है, ऐसे में इस तकनीक के विकसित होने से विदेशी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कम होगी. विदेशी कंपनियों से तकनीक से संबंधित सेवाएं लेने के लिए भारत को ज़्यादा ख़र्च करना पड़ता था."
कंपनी की सालाना बैठक के दौरान मुकेश अंबानी ने कहा था, "जियो ने 5G सॉल्यूशन तैयार कर लिया है. स्पेक्ट्रम उपलब्ध होने के साथ ही इस मेड-इन-इंडिया 5G सॉल्यूशन का ट्रायल शुरू हो जाएगा. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ाया गया एक क़दम है. आने वाले दिनों में 5G सॉल्यूशन का निर्यात किया जायेगा."
साथ ही बैठक में ये भी कहा गया है कि गूगल और जियो मिलकर देश में सस्ते 4G और 5G स्मार्टफोन लाएंगे.
इससे पहले गूगल ने कहा था कि वो जियो प्लेटफ़ॉर्म्स में 7.7 फ़ीसदी हिस्सेदारी के लिए 33,737 करोड़ रुपए निवेश करेगा.

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भारत-चीन सीमा विवाद: पूर्वी लद्दाख में शांति बहाल करने में वक़्त लगेगा
लद्दाख में भारत-चीन के मौजूदा तनाव पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसके अनुसार पैंगोंग सो और डेपसांग समेत पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में दोनों सेनाओं के पीछे हटने में अभी और समय लग सकता है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और चीन फ़िलहाल ये तय नहीं कर पाये हैं कि पीछे हटने की चरणबद्ध प्रक्रिया को कैसे लागू किया जाये.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच 'पीछे हटने के विस्तृत प्रस्ताव, विकल्पों और चिंताओं' पर बहुत लंबी बैठक हुई है. लेकिन 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई भिडंत के बाद बातचीत में 'भारी अविश्वास' देखा गया.

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ट्रंप प्रशासन ने रद्द की विवादित वीज़ा नीति
क़ानूनी चुनौती मिलने के बाद ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के वीज़ा रद्द करने का निर्णय वापस ले लिया है.
हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. अख़बार लिखता है, "ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाना काम आया, सभी अमरीकी विश्वविद्यालयों और अमरीका में पढ़ रहे डेढ़ लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने इसका स्वागत किया है."
पिछले हफ़्ते ही ट्रंप प्रशासन ने देश में रहकर ऑनलाइन कक्षाएं लेने वाले छात्रों को अपने देश वापस जाने का फ़रमान सुनाया था.
ट्रंप प्रशासन के पीछे हटने से, कोरोना वायरस महामारी की वजह से ऑनलाइन कक्षाएं लेने को मजबूर अमरीकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हज़ारों विदेशी छात्रों को राहत मिली है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और एमआईटी ने कई अन्य इंस्टीट्यूट्स के सहारे ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले को क़ानूनी तौर पर अदालत में चुनौती दी थी.
अख़बार ने लिखा है, "इस फ़ैसले को वापस लेने की जानकारी ट्रंप प्रशासन ने अमरीका की एक संघीय ज़िला अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान दी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज अलिसन बरॉ ने कहा कि सरकार ने 6 जुलाई के अपने आदेश को रद्द करने की सहमति दी है. जज ने कहा कि यह नीति देशभर में लागू होगी."
अमरीकी सांसद ब्रैड स्नीडर ने कहा कि "यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अमरीकी कॉलेजों के लिए एक बड़ी जीत है."
कई अमरीकी सांसदों ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन को पत्र लिखकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर अपने आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था.

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'2047 में भारत की जनसंख्या सर्वोच्च स्तर पर होगी'
लैंसेट जर्नल में प्रकाशित के एक अध्ययन के अनुसार, इस शताब्दी के समाप्त होने तक भारत लगभग 100 करोड़ की जनसंख्या वाला देश होगा.
लैंसेट ने बुधवार को यह ऑनलाइन रिपोर्ट जारी की है जिसे द हिंदू अख़बार ने प्रकाशित किया है.
अख़बार ने लिखा है, "मौजूदा वृद्धि दर के मुताबिक़, साल 2047 तक भारत की जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी जो साल 2100 तक घटकर क़रीब 103 करोड़ रह जाने का अनुमान है. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों के मुताबिक़ भारत में आबादी का पीक कुछ पहले आना चाहिए और इस शताब्दी के अंत तक आबादी को घटकर क़रीब 93 करोड़ होना चाहिए."
भारत के मामले में परम्परागत ज्ञान ये कहता है कि यद्यपि जनसंख्या में गिरावट की उम्मीद है, पर यह केवल 2046 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गणना के नवीनतम आकलन के अनुसार, भारत की आबादी उस वक़्त तक 140 करोड़ से थोड़ा अधिक होने की संभावना है.
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